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उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार में संशोधन: जीवन के एक हिस्से का मापन

Lokesh Pal February 12, 2026 05:15 4 0

संदर्भ:

भारत में 2012 से 2024 तक चल रहा CPI (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) के आधार में संशोधन उपभोग के पैटर्न और अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक परिवर्तनों को दर्शाता है।

  • मुद्रास्फीति सीधे घरेलू बजट को प्रभावित करती है, जिससे CPI एक महत्वपूर्ण व्यापक आर्थिक संकेतक बन जाता है।

“शॉपिंग बास्केट” (Shopping Basket) अवधारणा के बारे में

  • बास्केट को परिभाषित करना: CPI को “शॉपिंग बास्केट” रूपक (Metaphor) के माध्यम से समझाया जाता है, जिसमें भोजन, किराया और पेट्रोल जैसी एक औसत भारतीय परिवार द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुएँ शामिल होती हैं।
  • मूल्यों पर नज़र रखना: यह सूचकांक यह मापता है कि विशेष वस्तुओं के मूल्य बढ़ रहे हैं या घट रहे हैं, ताकि महंगाई का आकलन किया जा सके। इसे अक्सर “कानून के बिना कराधान (Taxation Without Legislation)” कहा जाता है, क्योंकि यह समान वस्तुओं की लागत बढ़ा देता है बिना किसी औपचारिक कर कानून के।
  • भारांश (Weightage): बास्केट में प्रत्येक वस्तु समान नहीं होती है।
    • उदाहरण: नमक की कीमत में वृद्धि की तुलना में घर के किराए या पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि का परिवार के बजट पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है।
    • इसके परिणामस्वरूप, विभिन्न वस्तुओं को उनके सामान्य बजट में महत्व के आधार पर अलग-अलग “भार (weights)” प्रदान किया जाता है।

वर्ष 2012 के आधार वर्ष में संशोधन के कारण:

  • जीवनशैली में बदलाव: वर्ष 2012 में, 4G डेटा, नेटफ्लिक्स, ज़ोमैटो, स्विगी और ऑनलाइन कक्षाएं जैसी डिजिटल सेवाएं मौजूद नहीं थीं या प्रचलित नहीं थीं।
  • शहरीकरण: शहरों का विस्तार और ऑनलाइन खरीदारी की आदतों में बदलाव का अर्थ है कि 2012 पर आधारित सूचकांक 2024 की वास्तविकताओं को सटीक रूप से प्रतिबिंबित नहीं कर सकता है।
  • बदलते उपभोग पैटर्न: जैसे-जैसे परिवार भोजन, वस्त्र और आवास जैसी मूलभूत आवश्यकताओं से आगे बढ़कर यात्रा, डेटा पैक और डिजिटल सब्सक्रिप्शन जैसी चीजों को शामिल करने लगे हैं, उपभोग की प्राथमिकताएँ विविध हो गई हैं
    • हाउसहोल्ड कंजंप्शन एक्सपेंडिचर सर्वे (2023–24) के आधार पर, संशोधित CPI भार वर्त्तमान उपभोग पैटर्न और बदलती खर्च प्राथमिकताओं को दर्शाएंगे।

आर्थिक सिद्धांत और समायोजन:

  • एंजेल का नियम (Engel’s Law): संशोधित भार एंगेल के नियम को दर्शाते हैं, क्योंकि आय बढ़ने पर भोजन पर व्यय का अनुपात कम होता है और सेवाओं पर व्यय बढ़ता है।
  • भारांश का पुनर्संतुलन (Weightage Re-balancing): हाउसहोल्ड कंजंप्शन एक्सपेंडिचर सर्वे (HCES) के आंकड़ों के आधार पर, नया उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवाओं को अधिक भार प्रदान करेगा, जबकि चावल जैसे मुख्य खाद्य पदार्थों का भार कम करेगा।
    • इसका उद्देश्य बदलते उपभोग पैटर्न और आर्थिक स्थितियों को प्रतिबिंबित करना है, विशेष रूप से कोविड -19 महामारी के संदर्भ में।
    • संशोधित CPI, आधार वर्ष की तुलना में वस्तुओं के भार में बदलाव से अधिक प्रभावित होगा, जिससे संभवतः मुद्रास्फीति की अस्थिरता कम होगी।
  • वस्तुओं का आधुनिकीकरण: लैंडलाइन फोन जैसी पुरानी वस्तुओं को बास्केट में मोबाइल डेटा और ब्रॉडबैंड द्वारा प्रतिस्थापित किया जा रहा है।

डेटा संग्रह में तकनीकी उन्नयन:

  • मैनुअल से डिजिटल तक: पहले, डेटा रजिस्टरों में मैन्युअल रूप से एकत्र किया जाता था, जिससे त्रुटियां और विलंब होता था।
    • वर्ष 2024 की श्रृंखला CAPI (कंप्यूटर-असिस्टेड पर्सनल इंटरव्यूइंग) का उपयोग करती है, जिसमें साक्षात्कारकर्ता आमने-सामने साक्षात्कार करने के लिए टैबलेट या कंप्यूटर का उपयोग करते हैं।
  • ऑनलाइन मूल्य संग्रह: हवाई किराया और टेलीकॉम योजनाओं जैसी वस्तुओं के लिए, अब मूल्य सीधे ऑनलाइन पोर्टलों से एकत्र किए जाएंगे, न कि पारंपरिक मैनुअल सर्वेक्षणों के माध्यम से।
  • सरकारी स्रोत: रेलवे टिकट, डाक शुल्क और ईंधन जैसी नियंत्रित सेवाओं के मूल्य सीधे सरकार द्वारा निर्धारित किए जाएंगे।

संशोधन का महत्व:

  • मौद्रिक नीति: RBI CPI डेटा का उपयोग ब्याज दरें निर्धारित करने और महंगाई को 2–6% लक्ष्य सीमा में रखने के लिए करता है। सही डेटा यह सुनिश्चित करता है कि दरें गलत माप के आधार पर निर्धारित न हों
  • वेतन और महंगाई भत्ता (DA): सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) को CPI से जोड़ा जाता है; इसलिए, सही मापन उचित वेतन समायोजन सुनिश्चित करता है।
  • वैश्विक मानक: 2024 के आधार वर्ष पर जाने से भारत IMF और विश्व बैंक के दिशानिर्देशों के साथ संरेखित हो जाता है, जिससे भारत की महंगाई की तुलना अमेरिका और यूरोप जैसी वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं से करना आसान हो जाता है।

निष्कर्ष

हालाँकि बास्केट, भार और डेटा स्रोतों में संशोधन किए गए हैं, फिर भी CPI अपना मूल उद्देश्य बनाए रखता है, यानी घरेलू दृष्टिकोण से मूल्य परिवर्तनों को मापना। यह समय के साथ तुलना सुनिश्चित करता है और इसकी विश्वसनीयता और नीतिगत प्रासंगिकता को भी बढ़ाता है।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न: भारत में मैक्रोइकोनॉमिक संबंधी योजना और मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण सुनिश्चित करने में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार वर्ष को संशोधित करने के महत्व पर चर्चा करें।

(10 अंक, 150 शब्द)

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