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Lokesh Pal
March 02, 2026 05:15
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भारत एक निर्णायक जनसांख्यिकीय मोड़ पर खड़ा है। वर्ष 2040 तक जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) के कम होने की संभावना है। ऐसे में देश के पास अपने कौशल पारिस्थितिकी तंत्र को मांग-आधारित, जवाबदेह और उद्योग-प्रेरित प्रणाली में बदलने का सीमित अवसर है।
कौशल 21वीं सदी की अर्थव्यवस्था की परिभाषित मुद्रा हैं। भारत की जनसांख्यिकीय खिड़की अपनी युवा आबादी को उत्पादक मानव संसाधन में बदलने का ऐतिहासिक लेकिन समय-सीमित अवसर प्रदान करती है।
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