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भारत के अगले विकास चरण के लिए बुनियादी आधारशिला

Lokesh Pal December 30, 2025 05:00 14 0

संदर्भ

2025 भारत में सुर्खियों में रहने वाली घोषणाओं की बजाय शांत, संचयी सुधारों (रिफॉर्म एक्सप्रेस-2025) के एक चरण के रूप में चिह्नित किया गया।

समष्टि-अर्थव्यवस्था: प्रदर्शन और वैश्विक स्थिति

  • आर्थिक आकार और संवृद्धि: भारत की नाममात्र जीडीपी (Nominal GDP) $4.1 ट्रिलियन को पार कर गई है, जिससे यह जापान (कमजोर जापानी मुद्रा येन और जनसंख्या में कमी) को पीछे छोड़कर विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया।
    • भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश उपभोग और उत्पादन को बढ़ावा दे रहा है।
    • नाममात्र जीडीपी का अर्थ है, किसी देश के भीतर एक वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य, जिसे मौजूदा बाजार मूल्य पर मापा जाता है।
  • सॉवरेन रेटिंग अपग्रेड: स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने 18 वर्षों के बाद भारत की सॉवरेन रेटिंग को बढ़ाकर BBB कर दिया।
    • इस अपग्रेड ने भारत की समष्टि-अर्थव्यवस्था में स्थायित्व और लचीलेपन का संकेत दिया।

व्यापार प्रदर्शन और डिजिटल सुविधा:

  • निर्यात संवृद्धि: 2024-25 में भारत का कुल निर्यात $825.25 बिलियन तक पहुँच गया, जिसमें 6% से अधिक की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई।
  • डिजिटल व्यापार अवसंरचना: निर्यातक-संबंधी प्रक्रियाओं को सरल बनाने और लेनदेन लागत को कम करने के लिए निर्यातकों हेतु एक एकल डिजिटल विंडो के रूप में ‘ट्रेड कनेक्ट ई-प्लेटफ़ॉर्म’ शुरू किया गया।
  • ट्रेड इंटेलिजेंस एंड एनालिटिक्स पोर्टल: ट्रेड इंटेलिजेंस एंड एनालिटिक्स (TIA) पोर्टल ने रीयल-टाइम बाजार संबंधी डेटा प्रदान किया, जिससे निर्यातक सूचित निर्णय लेने और वैश्विक माँग के प्रति त्वरित प्रतिक्रिया करने में सक्षम हुए।
  • द्विपक्षीय और क्षेत्रीय व्यापार समझौते:
    • भारत-यूके CETA (व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता): इसने भारतीय निर्यातकों के लिए शुल्क-मुक्त पहुँच का निर्माण किया तथा सेवाओं, व्यापार और कुशल गतिशीलता के लिए स्पष्ट मार्ग भी प्रदान किए।
    • भारत-ओमान CEPA (व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता): इसने वस्तुओं, सेवाओं और निवेश के लिए एक रणनीतिक गलियारे को मजबूत किया, जिससे खाड़ी क्षेत्रों में भारत की आर्थिक भागीदारी बढ़ी।
    • भारत-न्यूजीलैंड FTA (मुक्त व्यापार समझौता): भारत ने न्यूजीलैंड के साथ FTA संबंधी वार्ता पूर्ण की, जिससे उच्च-मूल्य वाले बाजारों तक पहुँच का विस्तार हुआ और अनुशासित व्यापार वार्ता के लिए एक टेम्पलेट तैयार हुआ।

स्टार्टअप पारिस्थितिक तंत्र और डिजिटल बाजार:

  • स्टार्टअप्स का पैमाना: भारत का स्टार्टअप पारिस्थितिक तंत्र दो लाख से अधिक सरकार-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स तक विस्तारित हो गया।
    • इन स्टार्टअप्स ने सामूहिक रूप से 21 लाख से अधिक नौकरियाँ सृजित कीं।
    • भारत ने ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (GII) में भी अपनी स्थिति में सुधार किया तथा कुल 139 वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में 38वें स्थान पर पहुँच गया।
  • डिजिटल कॉमर्स के लिए ओपन नेटवर्क (ONDC): ONDC ने 326 मिलियन से अधिक ऑर्डर्स संसाधित किए, जिसमें औसतन 5.9 लाख दैनिक लेनदेन हुए। इसने डिजिटल कॉमर्स में प्रतिस्पर्धा और समावेशिता को सुदृढ़ किया।
    • ONDC ई-कॉमर्स का लोकतंत्रीकरण करने के लिए भारत सरकार की एक पहल है, जो एक खुला, इंटरऑपरेबल नेटवर्क बनाती है, जहाँ खरीदार और विक्रेता विभिन्न प्लेटफार्मों पर लेनदेन कर सकते हैं, न कि केवल अमेज़ॅन या फ्लिपकार्ट जैसे बड़े मार्केटप्लेस पर।
  • गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM): GeM प्लेटफॉर्म ने संचयी लेनदेन मूल्य में ₹16.41 लाख करोड़ को पार कर लिया।
    • 11 लाख से अधिक सूक्ष्म और लघु उद्यमों को ₹7.35 लाख करोड़ के ऑर्डर प्राप्त हुए।

विधिक अनुपालन:

  • अनुपालन में कमी: विभिन्न क्षेत्रों में 47,000 से अधिक अनुपालन संबंधी मुद्दों को कम किया गया। इसके अतिरिक्त 4,458 कानूनी प्रावधानों को अपराध-मुक्त घोषित किया गया।
  • निरसन और संशोधन विधेयक, 2025: 71 अप्रचलित अधिनियमों को पूरी तरह से हटा दिया गया, जिससे कानूनी अव्यवस्था और अनुपालन का बोझ कम हो गया।
  • राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली: नवंबर महीने के अंत तक 8.29 लाख से अधिक अनुमोदनों को संसाधित किया गया, जिससे पूर्व-अनुमानता में सुधार तथा अनुमोदन समय-सीमा कम हो गई।
  • जिला-स्तरीय ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’:
    • इस ढाँचे का उद्देश्य स्थानीय प्रशासन स्तर पर जवाबदेही और प्रतिक्रियाशीलता में सुधार करना था। इसने ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ को उद्यमियों के समीप लाया।

श्रम बाजार सुधार:

  • श्रम कानूनों का समेकन: चार श्रम संहिताएँ, जो 21 नवंबर, 2025 को लागू हुईं, ने 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को सरल विधिक ढाँचों में समेकित कर दिया।
  • शामिल क्षेत्र: चार श्रम संहिताएँ इस प्रकार हैं:
    • मजदूरी संहिता (Code on Wages) – (सार्वभौमिक न्यूनतम मजदूरी)
    • औद्योगिक संबंध संहिता (Industrial Relations Code) – (विवाद/यूनियन)
    • सामाजिक सुरक्षा संहिता (Social Security Code) – (पीएफ/पेंशन/बीमा)
    • व्यावसायिक सुरक्षा संहिता (Occupational Safety Code) – (स्वास्थ्य और काम करने की स्थिति)

वित्तीय बाजार सुधार:

  • प्रतिभूति बाजार संहिता विधेयक (Securities Markets Code Bill): यह विधेयक प्रतिभूति कानून को आधुनिक बनाने और विशेष बाजार न्यायालयों, विनियामकों के साथ मजबूत सूचना साझाकरण तथा समयबद्ध शिकायत निवारण के प्रस्तावों के साथ भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की जाँच और प्रवर्तन क्षमता को मजबूत करने के लिए प्रस्तुत किया गया था।

रसद और समुद्री सुधार:

  • शिपिंग पर व्यापार निर्भरता: भारत का लगभग 95% व्यापार (मात्रा के अनुसार) और 70% (मूल्य के अनुसार) समुद्री मार्गों से होता है।
    • भारत की रसद लागत जीडीपी का लगभग 13-14%, जबकि वैश्विक मानक जीडीपी का 8% है।
  • भारतीय बंदरगाह अधिनियम, 2025: इस अधिनियम ने औपनिवेशिक काल के ढाँचे को प्रतिस्थापित किया तथा आधुनिक शासन उपकरण, विवाद समाधान तंत्र और मजबूत सुरक्षा एवं पर्यावरण मानदंड प्रस्तुत किए।
  • मर्चेंट शिपिंग अधिनियम, 2025: इस अधिनियम ने शिपिंग नियमों को आधुनिक बनाया और समकालीन वाणिज्य के साथ देनदारियों एवं विवाद ढाँचे को संरेखित किया।
  • कैरिज ऑफ गुड्स बाय सी एक्ट, 2025: इस अधिनियम ने समुद्री कार्गो परिवहन को नियंत्रित करने वाले कानूनी नियमों को अपडेट किया तथा वाणिज्यिक शिपिंग परिचालन में स्पष्टता बढ़ाई।
  • जहाज निर्माण और औद्योगिक नीति:
    • जहाज निर्माण सहायता पैकेज: कैबिनेट ने जहाज निर्माण के लिए ₹69,725 करोड़ मंजूर किए। इसमें ₹25,000 करोड़ का मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड शामिल था।
    • पैकेज का उद्देश्य निर्भरता में कमी, घरेलू माल ढुलाई मूल्य को बनाए रखना और औद्योगिक गहराई का निर्माण करना था।

ऊर्जा क्षेत्र संबंधी सुधार:

  • तेल क्षेत्र संशोधन अधिनियम, 2025: इस अधिनियम ने पट्टे (lease) के जीवन चक्र के दौरान संविदात्मक शर्तों की स्थिरता पर बल दिया, जिससे निवेशकों के जोखिम और अनिश्चितता को कम किया जा सके।
  • पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियम, 2025: नियमों ने परियोजना चरणों में एकल पेट्रोलियम पट्टे की शुरुआत की तथा स्पष्ट अनुमोदन समय-सीमा भी स्थापित की।
  • ओपन एकरेज लाइसेंसिंग पॉलिसी: ओपन एकरेज लाइसेंसिंग पॉलिसी ने अन्वेषण मानचित्र का विस्तार करना जारी रखा, जिसमें राउंड X ने लगभग 0.2 मिलियन वर्ग किलोमीटर में 25 ब्लॉक की पेशकश की, जो मुख्य रूप से अपतटीय (offshore) हैं, जिनमें गहरे पानी और अति-गहरे पानी (ultra-deepwater) के अवसर शामिल हैं।
  • नेशनल डीप ओशन मिशन: मिशन ने घरेलू संसाधनों, प्रौद्योगिकी और क्षमता पर ध्यान केंद्रित किया। इसने भारत की रणनीतिक ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ किया।

परमाणु ऊर्जा और रणनीतिक प्रौद्योगिकी:

  • परमाणु ऊर्जा मिशन: 2025 के बजट में परमाणु ऊर्जा विकास के लिए ₹20,000 करोड़ आवंटित किए गए, जो 2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता तक पहुँचने के राष्ट्रीय उद्देश्य के अनुरूप है।
  • छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs): भारत ने 2033 तक स्वदेशी रूप से डिजाइन किए गए पाँच परिचालन SMRs का लक्ष्य रखा है।
  • शांति (SHANTI) विधेयक: ‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया’ (SHANTI) विधेयक ने नागरिक परमाणु व्यवस्था को आधुनिक बनाया। इसने विनियमित निजी भागीदारी के मार्ग खोले।
    • परमाणु ऊर्जा ग्रिड में निम्न कार्बन युक्त विद्युत उत्पादन शामिल करता है तथा अधिक आत्मविश्वास के साथ उन्नत विनिर्माण, डेटा अवसंरचना और ऊर्जा-गहन उद्योग निर्मित करने की भारत की क्षमता को मजबूत करती है।

निष्कर्ष

रिफॉर्म एक्सप्रेस-2025 उन सुधारों पर केंद्रित था, जिन्होंने सामूहिक रूप से बाधाओं, अनिश्चितता और उद्यमियों पर बोझ को कम किया। इसने उत्पादकता को संचयी रूप से बढ़ाने में सक्षम बनाया तथा विकास के अगले चरण के लिए नींव रखी।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: “रिफॉर्म एक्सप्रेस-2025 भारत की समय-समय पर होने वाली नीतिगत घोषणाओं से संस्थागत सुधारों की ओर परिवर्तन को प्रदर्शित करता है।” जाँच कीजिए, कि कानून और व्यापार सुविधा में सुधारों ने भारत के निवेश परिदृश्य तथा विकास संभावनाओं को किस प्रकार मज़बूत किया है। लंबे समय तक आर्थिक प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए उनके महत्त्व पर चर्चा कीजिए।

(15 अंक, 250 शब्द)

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