//php print_r(get_the_ID()); ?>
Lokesh Pal
February 20, 2026 05:30
4
0
गलगोटिया विश्वविद्यालय का रोबोडॉग प्रकरण केवल एक शर्मनाक घटना नहीं है, बल्कि यह भारत के कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पारिस्थितिकी तंत्र की गहरी संरचनात्मक कमजोरियों को भी उजागर करता है। इससे डिजिटल उपनिवेशवाद और वास्तविक नवाचार की कमी को लेकर गंभीर चिंताएँ उत्पन्न हुई हैं।
भारत को केवल प्रदर्शन-आधारित AI से आगे बढ़कर क्षमता-आधारित नवाचार की ओर बढ़ना होगा। संरचनात्मक सुधार ही वास्तविक तकनीकी संप्रभुता सुनिश्चित कर सकते हैं।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:प्रश्न: भारत एक वैश्विक AI केंद्र बनने की आकांक्षा रखता है, किन्तु मूलभूत (फाउंडेशनल) AI अनुसंधान में निवेश अभी भी सीमित है। विदेशी AI अवसंरचना और प्लेटफार्मों पर निर्भरता किस प्रकार डिजिटल उपनिवेशवाद के नए रूपों को जन्म दे सकती है? भारत अपनी तकनीकी संप्रभुता की रक्षा कैसे कर सकता है? (10 अंक, 150 शब्द) |
<div class="new-fform">
</div>

Latest Comments