//php print_r(get_the_ID()); ?>
Lokesh Pal
February 14, 2026 05:15
6
0
“द ग्रेट इंडियन रिटेल डिलेम्मा” 1991 के LPG (उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण) सुधारों के बाद से चली आ रही नीति-संबंधी असमंजस को दर्शाती है। एक ओर विकास और आधुनिकीकरण के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आकर्षित करने की आवश्यकता है, तो दूसरी ओर छोटे घरेलू खुदरा व्यापारियों को बड़ी वैश्विक कंपनियों से बचाना भी जरूरी है।
भारत की रिटेल नीति को संरक्षणवाद से आगे बढ़कर प्रतिस्पर्धात्मकता की दिशा में विकसित होना चाहिए। स्थायी सुधार छोटे खुदरा विक्रेताओं को प्रभावी रूप से प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाकर ही संभव है, साथ ही यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि नीति निर्माण में उपभोक्ता के हित केंद्रीय रहें।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्नप्रश्न: भारत के मल्टी-ब्रांड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के प्रति सतर्क दृष्टिकोण के पीछे तर्क क्या है? क्या संरक्षणवाद ने छोटे खुदरा विक्रेताओं को मजबूत किया है या इसने इस क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकरण को सीमित किया है? (15 अंक, 250 शब्द) |
<div class="new-fform">
</div>

Latest Comments