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मातृत्व लाभ अधिनियम प्रगतिशील है, लेकिन केवल कानून पर्याप्त नहीं हैं

Lokesh Pal February 17, 2026 05:00 4 0

संदर्भ

मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 (2017 में संशोधित) ने सवेतन अवकाश की अवधि बढ़ाकर और शिशु देखभाल प्रावधानों को शामिल कर भारत की मातृत्व सुरक्षा रूपरेखा को मजबूत किया है।

  • वैश्विक स्तर पर प्रगतिशील होने के बावजूद, विधि के उद्देश्य और कामकाजी माताओं के वास्तविक जीवन के अनुभवों के बीच अभी भी अंतर विद्यमान है।

अधिनियम को प्रगतिशील माने जाने के कारण

  • वैश्विक स्तर पर अग्रणी स्थान: यह अधिनियम 26 सप्ताह का सवेतन मातृत्व अवकाश प्रदान करता है, जिससे भारत के मातृत्व लाभ विश्व में तीसरे स्थान पर आते हैं; इससे अधिक लाभ केवल कनाडा और नॉर्वे में प्रदान किए जाते हैं।
  • प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से तुलना: भारत के विपरीत, संयुक्त राज्य अमेरिका में संघीय स्तर पर सवेतन मातृत्व अवकाश अनिवार्य नहीं है।
  • सिविल सेवा प्रावधान: औपचारिक सरकारी क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं को सेवा के दौरान 730 दिनों तक बाल देखभाल अवकाश (CCL) मिलता है, जिसमें पहले वर्ष में पूर्ण वेतन और दूसरे वर्ष में 80% वेतन प्रदान किया जाता है।

“लीकी पाइपलाइन” और “मदरहुड पेनल्टी”

  • लीकी पाइपलाइन: महिलाएँ बड़ी संख्या में कार्यबल में प्रवेश करती हैं, लेकिन नेतृत्व पदों तक पहुँचने से पहले धीरे-धीरे बाहर हो जाती हैं।
  • मदरहुड पेनल्टी: प्रसव के कारण करियर में आने वाला विराम पदोन्नति की गति को धीमा कर देता है, वेतन वृद्धि को रोकता है और पेशेवर अवसरों को सीमित कर देता है।
  • भूमिका संघर्ष: महिलाओं को आदर्श देखभालकर्ता और समर्पित पेशेवर होने की अपेक्षाओं के बीच संघर्ष का सामना करना पड़ता है।

भावनात्मक और कार्यस्थल की वास्तविकताएँ

  • आंतरिक अपराधबोध: कई महिलाएँ पेशेवर और मातृत्व भूमिकाओं के संतुलन संबंधित चिंता और अपराधबोध के साथ कार्य पर लौटती हैं।
  • अप्रभावी माने जाने की धारणा: कार्यस्थल पर पूर्वाग्रह यह मान लिया जाता हैं कि अवकाश से लौटने वाली माताएँ कम उत्पादक या कम प्रतिबद्ध होती हैं।
  • करियर ठहराव: मातृत्व अवकाश के दौरान महत्वपूर्ण कार्य अक्सर अन्य कर्मचारियों को सौंप दिए जाते हैं, जिससे दीर्घकालिक विकास और नेतृत्व की संभावनाएँ प्रभावित होती हैं।

क्षेत्रीय अंतर और अनपेक्षित परिणाम

  • असंगठित क्षेत्र की उपेक्षा: भारत के लगभग 90% कार्यबल का संबंध असंगठित क्षेत्र से है, जहाँ मातृत्व लाभ या तो उपलब्ध नहीं हैं या उनका सही रूप से क्रियान्वयन नहीं होता है।
  • नियुक्ति संबंधी पूर्वाग्रह: नियोक्ता, विशेषकर छोटे व्यवसाय, अनिवार्य सवेतन अवकाश के वित्तीय बोझ के कारण युवा महिलाओं को नियुक्त करने से बचते हैं।

अवसंरचना और आर्थिक अवसर

  • क्रेच अनिवार्यता: 50 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम, 2017 के तहत क्रेच सुविधाएँ प्रदान करनी होती हैं, लेकिन अनुपालन अभी भी कमजोर बना हुआ है।
  • केयर इकोनॉमी की संभावनाएँ: अकुशल या अर्ध-कुशल महिलाओं को पेशेवर नैनी और देखभालकर्ता के रूप में प्रशिक्षित करने का अवसर निर्मित होता है। जिससे एक “विन-विन” की स्थिति निर्मित होती है—माताएँ कार्य कर सकती हैं और अन्य महिलाओं को रोजगार मिलता है।

सामाजिक अपेक्षाएँ और उभरते रुझान

  • “सब कुछ संभालने” का बोझ: सामाजिक मानदंड महिलाओं से अपेक्षा करते हैं कि वे करियर, घरेलू जिम्मेदारियाँ और बाल देखभाल को एक साथ संभालें।
  • DINK प्रवृत्ति का उदय: करियर और मातृत्व के संतुलन की कठिनाइयों के कारण अधिकांश दंपति अब “डबल इनकम, नो किड्स” (DINK) जीवनशैली को अपना रहे हैं।

आगे की राह

  • “मातृत्व दंड” से “मातृत्व बोनस” की ओर बदलाव: मातृत्व को उत्पादकता में कमी नहीं, बल्कि सामाजिक निवेश के रूप में देखा जाना चाहिए।
  • बाल देखभाल अवसंरचना को मजबूत करना: कड़े कानूनी क्रियान्वयन और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के माध्यम से सस्ती और कार्यात्मक क्रेच सुविधाएँ सुनिश्चित की जानी चाहिए।
  • प्रबंधकीय संवेदनशीलता: संगठनों को लचीली कार्य नीतियाँ और संवेदनशीलता कार्यक्रम लागू करने चाहिए ताकि करियर संबंधी ठहराव को रोका जा सके।
  • साझा पालन-पोषण: समान देखभाल जिम्मेदारियों को प्रोत्साहित करने के लिए पितृत्व अवकाश का विस्तार किया जाना चाहिए।
  • कवरेज का विस्तार: असंगठित क्षेत्र की महिलाओं को सामाजिक बीमा और मातृत्व समर्थन तंत्र में शामिल करने के प्रयास किए जाने चाहिए।

निष्कर्ष

मातृत्व लाभ अधिनियम तभी सार्थक प्रभाव डाल सकता है जब इसे कार्यस्थल सुधारों, प्रगतिशील सामाजिक मानदंडों और सुलभ बाल देखभाल अवसंरचना का समर्थन प्राप्त हो। कानूनी अधिकार को कामकाजी माताओं के लिए वास्तविक समानता में परिवर्तित किया जाना चाहिए।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न: वैश्विक स्तर पर सबसे उदार मातृत्व लाभ कानूनों में से एक होने के बावजूद, भारत में ‘मदरहुड पेनल्टी’ महिलाओं के करियर उन्नति में बाधा बनी हुई है। इसमें शामिल संरचनात्मक और व्यवहारगत अवरोधों का विश्लेषण कीजिए और इस संकट के समाधान में ‘केयर इकोनॉमी’ की संभावनाओं पर चर्चा कीजिए।

 (15 अंक, 250 शब्द)

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