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व्यापकता तथा एकीकरण के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की आवश्यकता

Lokesh Pal January 26, 2026 05:15 18 0

संदर्भ:

भारत में शिक्षा की चुनौती अब बच्चों को स्कूलों में लाने की नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की है, जिसके लिए खंडित और अल्प-संसाधन युक्त स्कूलों की बजाय बड़े और एकीकृत स्कूलों की आवश्यकता है।

वैश्विक और तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य:

  • चीन का व्यापकता लाभ: बड़े और एकीकृत स्कूल समग्र शिक्षा का समर्थन करते हैं।
  • स्कूल का आकार: कक्षा 1-9 में औसतन लगभग 1,200 विद्यार्थी; K-12 स्कूलों में लगभग 2,800 विद्यार्थी।
  • प्रणालीगत दक्षता: विशाल भूगोल के बावजूद, चीन भारत की तुलना में लगभग एक-तिहाई स्कूलों के साथ कार्य करता है।
  • गुणवत्तापूर्ण परिणाम: व्यापक स्तर विशेषज्ञ शिक्षकों, परामर्श सेवाओं, व्यावसायिक प्रयोगशालाओं, खेल सुविधाओं, आईसीटी (ICT) अवसंरचना तथा पाठ्येतर गतिविधियों को सक्षम बनाता है।
  • नीतिगत प्रासंगिकता: यह एकीकृत और सुसज्जित स्कूलों के लिए भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020 के दृष्टिकोण के साथ निकटता से संरेखित है।

भारत का वर्तमान स्कूली परिदृश्य:

  • पहुँच प्राप्त, गुणवत्ता बाधित: प्रारंभिक शिक्षा में नामांकन लगभग सार्वभौमिक है, लेकिन प्रणाली अत्यधिक खंडित है।
  • कम नामांकन: लगभग 5.6 लाख स्कूलों में से प्रत्येक में 50 से कम विद्यार्थी नामांकित हैं।
  • शिक्षकों की कमी: 1 लाख से अधिक एकल-शिक्षक स्कूल 33 लाख विद्यार्थियों को सेवा दे रहे हैं, जिससे बहु-ग्रेड शिक्षण (multi-grade teaching) की बाध्यता उत्पन्न होती है।
  • माध्यमिक स्तर की कमजोरी: लगभग 40% सरकारी माध्यमिक स्कूलों (कक्षा 9-12) में 100 से कम विद्यार्थी हैं।
  • अवसंरचनात्मक अंतराल:
    • केवल 19% स्कूलों में कार्यात्मक आईसीटी (ICT) लैब हैं।
    • 51% में एकीकृत विज्ञान प्रयोगशालाएँ हैं।
    • 10% उच्च माध्यमिक शिक्षा प्रदान करते हैं।
    • मात्र 6% व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करते हैं।
  • अधिगम प्रभाव: ये कमियाँ विषय की गहराई, व्यावहारिक शिक्षा और करियर विकल्पों को कमजोर करती हैं।

राज्य स्तरीय प्रयोग और नवाचार:

  • समेकन की ओर बदलाव: कई राज्य कंपोजिट और समेकित स्कूल मॉडल अपना रहे हैं।
    • राजस्थान: आदर्श विद्यालय—प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक उन्नत और सुसज्जित स्कूल।
    • उत्तर प्रदेश: मॉडल कंपोजिट स्कूल (कक्षा 1-12), जिनमें स्मार्ट क्लासरूम और वाई-फाई की सुविधा है।
    • मध्य प्रदेश: 36,000 कम नामांकन वाले स्कूलों का समेकन; सीएम राइज (महर्षि सांदीपनि स्कूल) जो गाँवों के समूहों (clusters) को सेवा प्रदान करते हैं।
  • व्यापक अंगीकरण: ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, तेलंगाना और गुजरात भी इसी तरह के सुधार कर रहे हैं।
  • मूल उद्देश्य: केवल दक्षता ही नहीं, बल्कि प्रति कक्षा एक शिक्षक और पर्याप्त विषय विशेषज्ञों के साथ गुणवत्तापूर्ण सीखने का वातावरण सुनिश्चित करना।

क्षमता, पहुँच और परिवर्तन प्रबंधन:

  • समता-प्रथम दृष्टिकोण: स्कूल समेकन को यह सुनिश्चित करना चाहिए, कि किसी भी बच्चे की पहुँच बाधित न हो।
  • परिवहन सहायता: दूरी में कमी और नामांकन बनाए रखने के लिए परिवहन सुविधाएँ।
  • स्थानीय लचीलापन: स्थानीय संदर्भों के अनुरूप विकेंद्रीकृत निर्णय लेना।
  • हितधारक का विश्वास: सुचारू और विश्वसनीय बदलाव के लिए शिक्षकों, अभिभावकों और समुदायों के साथ प्रारंभिक जुड़ाव।

रोड मैप-2035: दो रणनीतिक लक्ष्य

  1. एकीकृत K-8 स्कूल:
    • डिफ़ॉल्ट मॉडल के रूप में प्रति ग्राम पंचायत एक K-8 स्कूल।
    • प्रति स्कूल 300 छात्र, जिससे प्रति कक्षा एक शिक्षक संभव हो सके।
    • लाभ: बेहतर बुनियादी ढाँचा, शिक्षक और अधिगम गुणवत्ता।
  2. कंपोजिट माध्यमिक स्कूल (कक्षा 9-12):
    • निम्न संक्रमण दर: माध्यमिक में 87%, उच्च माध्यमिक में 75%।
    • 2035 का पैमाना: कक्षा 9-12 में लगभग 8 करोड़ विद्यार्थी।
    • लाभ: विषय विशेषज्ञ, प्रयोगशालाएँ, करियर मार्गदर्शन और व्यावसायिक मार्ग।
    • समता (Equity): पहुँच सुनिश्चित करने के लिए परिवहन सहायता।

कार्यान्वयन के साधन:

  • शिक्षक तैनाती: प्रति कक्षा एक शिक्षक और विषय विशेषज्ञ।
  • स्थानीयकृत योजना: भूगोल और जनसांख्यिकी के अनुरूप राज्य-विशिष्ट रोड मैप।
  • परिवहन समाधान: विद्यार्थियों के लिए संदर्भ-विशिष्ट गतिशीलता मॉडल।
  • वित्तपोषण: समग्र शिक्षा के माध्यम से वित्तपोषण, जिसे राज्य निधियों और योजनाओं के अभिसरण द्वारा समर्थन प्राप्त हो।

निष्कर्ष

भारत को अब ‘पहुँच’ से ‘उत्कृष्टता’ की ओर बढ़ना चाहिए। इसके लिए बड़े और एकीकृत स्कूलों का निर्माण करना होगा, जो न्यायसंगत और भविष्य आधारित शिक्षा प्रदान करें, जिससे 2035 तक बेहतर शिक्षण परिणाम प्राप्त करना संभव हो सके।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: स्कूली शिक्षा में भारत की चुनौती ‘पहुँच सुनिश्चित करने’ से हटकर ‘व्यापकता और एकीकरण के माध्यम से गुणवत्ता सुनिश्चित करने’ पर स्थानांतरित हो गई है। खंडित स्कूली बुनियादी ढाँचे के संदर्भ में इस कथन का परीक्षण कीजिए और चर्चा कीजिए, कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के तहत परिकल्पित कंपोजिट और समेकित स्कूल किस प्रकार समता एवं अधिगम परिणामों को आगे बढ़ा सकते हैं।

(15 अंक, 250 शब्द)

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