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Lokesh Pal
February 18, 2026 05:15
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रूस–यूक्रेन युद्ध और अमेरिका–चीन प्रतिद्वंद्विता के तेज होने के बीच, 1945 के बाद स्थापित संयुक्त राष्ट्र आधारित विश्व व्यवस्था कमजोर होती दिखाई दे रही है।
वास्तविक खतरा मानकों के क्रमिक क्षरण में निहित है, जहाँ शक्ति कानून पर हावी हो जाती है और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की नींव कमजोर पड़ जाती है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:प्रश्न: 1945 के बाद स्थापित नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था अस्तित्व संकट का सामना कर रही है, जो ‘शक्ति पर कानून’ से बदलकर ‘शक्ति ही अधिकार है’ की ओर बढ़ रही है। इस ‘नई विश्व अव्यवस्था’ में योगदान देने वाले कारकों का विश्लेषण करें और भारत जैसी मध्य शक्तियों के रणनीतिक हितों पर इसके प्रभाव की चर्चा करें। (250 शब्द, 15 अंक) |
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