100% तक छात्रवृत्ति जीतें

रजिस्टर करें

भारत में स्वच्छ जल की उपलब्धता संबंधी समस्या

Lokesh Pal January 02, 2026 05:15 23 0

सन्दर्भ:

हाल ही में, मध्य प्रदेश के इंदौर में नगर निगम द्वारा आपूर्त पीने के पानी से एक शिशु सहित चार लोगों की आधिकारिक तौर पर मौत हो गई। अनौपचारिक अनुमानों के अनुसार मृतकों की संख्या 14 है।

  • 2,000 से अधिक लोग बीमार पड़ गए, 200 से अधिक लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया

विद्यमान संकट

  • भारत का सर्वाधिक स्वच्छ शहर: यह त्रासदी बेहद दुखद है क्योंकि इंदौर लगातार कई वर्षों से भारत का सबसे स्वच्छ शहर रहा है। यह शहर अपशिष्ट पृथक्करण और स्वच्छता के उत्कृष्ट मानकों के लिए जाना जाता है।

शासन की विफलता और दोषारोपण

  • प्रतिक्रिया: अधिकारियों ने स्वच्छ जल की आपूर्ति लाइन बिछाने में हुई देरी को संकट का कारण बताया है। घटना की जाँच के लिए एक समिति का गठन किया गया है।
  • रोकी जा सकने वाली विफलता का पैमाना: स्थिति को एक घातक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट में तब्दील नहीं होना चाहिए था। मध्य प्रदेश में पिछले दो महीनों में जल-संबंधी यह दूसरी घटना है।
    • भोपाल के पास स्थित वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के परिसर में विद्यार्थियों ने दूषित जल आपूर्ति के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। 
    • असुरक्षित पेयजल के कारण कई विद्यार्थी पीलिया से पीड़ित हो गए।
    • पीलिया हेपेटाइटिस A/E वायरस के कारण होता है, जो सीवेज से दूषित जल में पाया जाता है।

जल आपूर्ति से संबंधित मुद्दे

  • योजनाओं का विरोधाभास: स्वच्छ भारत मिशन और जल जीवन मिशन के तहत हुई प्रगति के बावजूद जल समस्याएँ बनी हुई हैं।
    • स्वच्छ भारत मिशन (SBM): सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने के लिए स्वच्छता और सफाई में सुधार पर ध्यान केंद्रित करता है।
    • जल जीवन मिशन (JJM): इसका उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रतिदिन 55 लीटर सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराकर ‘हर घर जल’ प्रदान करना है।
  • गुणवत्ता बनाम उपलब्धता: इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य जल आपूर्ति की उपलब्धता और मात्रा पर ध्यान केंद्रित करना है।
    • हालाँकि, पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित किए बिना पानी तक पहुँच प्रदान करना व्यर्थ है
  • जल उपलब्धता पर राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आँकड़े: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण से पता चलता है, कि 96% परिवार पीने के पानी के बेहतर स्रोत का उपयोग करते हैं।
    • बेहतर स्रोतों से तात्पर्य पाइप द्वारा जल आपूर्ति या बोरवेल जैसी अवसंरचना से है।
    • हालाँकि, बेहतर स्रोत होने से सुरक्षित पेयजल की गारंटी नहीं मिलती
    • यह वर्गीकरण केवल बुनियादी ढाँचे की उपलब्धता पर केंद्रित है, न कि पानी की जीवाणु या रासायनिक गुणवत्ता पर
    • इससे एक ऐसी नीतिगत समस्या उत्पन्न होती है, जिसमें पाइप बिछाने को पानी की समस्या का समाधान मान लिया जाता हैभले ही सुरक्षा की गारंटी न हो।
  • निगरानी में विफलता: यदि उचित जाँच और संतुलन व्यवस्था लागू होती, तो इंदौर में प्रदूषण का पता पहले ही चल जाता। 

स्वास्थ्य और आर्थिक बोझ

  • जनसंख्या संबंधी संदर्भ: भारत की अनुमानित जनसंख्या 147 करोड़ है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी विफलताओं के प्रभाव को और बढ़ा देती है।
  • जलजनित रोग: असुरक्षित पेयजल हैजा, टाइफाइड, पेचिश और पीलिया जैसी बीमारियों का कारण बनता है
  • आर्थिक लागत: पानी से होने वाली बीमारियों के कारण गरीबों की मजदूरी में कमी आती है तथा स्वास्थ्य संबंधी व्यय में वृद्धि होती है
  • संवैधानिक दृष्टिकोण: सुरक्षित पेयजल तक पहुँच का अभाव अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है, जो जीवन के अधिकार की गारंटी देता है।
  • सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय: सर्वोच्च न्यायालय ने यह मान्यता दी है, कि स्वच्छ पेयजल का अधिकार संविधान के अंतर्गत एक मूल अधिकार है।

आगे की राह:

  • वितरण बिंदु जाँच: पानी की गुणवत्ता की जाँच उपभोक्ताओं के नलों पर की जानी चाहिए, और यह केवल उपचार संयंत्रों तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
  • स्मार्ट टेक्नोलॉजी का उपयोग: जल आपूर्ति प्रणालियों में दबाव में गिरावट और रिसाव का वास्तविक समय में पता लगाने के लिए आईओटी सेंसर तैनात किए जाने चाहिए।
  • बुनियादी ढाँचे का पुनरुद्धार: प्रदूषण को रोकने के लिए पुरानी और जर्जर पाइपलाइनों को बदलना आवश्यक है
  • कठोर प्रवर्तन और जवाबदेही: लापरवाही को सख्ती से दंडित किया जाना चाहिए, क्योंकि जवाबदेही प्रभावी जल प्रशासन के लिए प्रमुख है

निष्कर्ष:

मध्य प्रदेश की हालिया घटना भारत की जल प्रबंधन प्रणालियों के लिए एक चेतावनी होनी चाहिए। शहरों को जल गुणवत्ता प्रबंधन में तत्काल सुधार करना होगा। कार्रवाई में विफलता से बार-बार सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदाएँ और अनावश्यक जानमाल की हानि हो सकती है, जिसका निपटान अनिवार्य है।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न: जन स्वास्थ्य का सूचक गरीब वर्गों का कल्याण है, हालाँकि हालिया इंदौर की घटना ने जल प्रबंधन संबंधी चुनौतियों को उजागर किया है। जन स्वास्थ्य पर इस घटना के प्रभावों का विश्लेषण कीजिए तथा देश में सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा कीजिए।

(15 अंक, 250 शब्द)

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

THE MOST
LEARNING PLATFORM

Learn From India's Best Faculty

      

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.