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Lokesh Pal
January 07, 2026 05:00
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डिजिटल ‘ऑलवेज-ऑन’ (हमेशा सक्रिय) अर्थव्यवस्था ने 24×7 उपलब्धता को सामान्य बना दिया है, जिससे कार्य-जीवन (वर्क-लाइफ) के बीच की सीमाएँ समाप्त हो गई हैं, और भारत में ‘बर्नआउट’ (अत्यधिक थकान और तनाव) की समस्या बढ़ी है। यह स्थिति कानूनी रूप से लागू करने योग्य ‘राइट टू डिस्कनेक्ट’ (काम से अलग होने का अधिकार) के पक्ष में एक मजबूत आधार तैयार करती है।
भारत को अपने जनसांख्यिकीय लाभांश को अत्यधिक कार्य या सतत विकास को अपनाने में से एक को चुनना होगा। कानूनी रूप से लागू करने योग्य ‘राइट टू डिस्कनेक्ट’ उत्पादकता को गरिमा, स्वास्थ्य और मानवीय कल्याण से जोड़ेगा, जो यह सिद्ध करेगा कि विश्राम कोई विलासिता नहीं, बल्कि एक आर्थिक निवेश है।
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