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Lokesh Pal
March 16, 2026 05:30
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मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरिया) अधिनियम, 1937 के तहत भेदभावपूर्ण विरासत प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने घोषणा की, कि पूरे भारत में महिलाओं के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करने का एकमात्र उपाय ‘समान नागरिक संहिता’ (UCC) है।
UCC के लिए बी. आर. अंबेडकर के दृष्टिकोण को लागू करना कानूनी एकरूपता, लैंगिक न्याय और एक सामान्य नागरिक पहचान की ओर एक कदम के रूप में देखा जाता है, जो राजनीतिक तथा धार्मिक विभाजनों से ऊपर है।
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