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अमेरिका के साथ व्यापार समझौता: आर्थिक कूटनीति से होने वाले लाभ

Lokesh Pal February 05, 2026 05:30 5 0

संदर्भ:

भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच 5 फ़रवरी 2026 को हस्ताक्षरित व्यापार समझौता एक परिवर्तनकारी “ट्रेड एक्सप्रेसवे” का प्रतिनिधित्व करता है तथा भारत की नई आर्थिक रणनीति की आधारशिला का निर्माण करता है।

रक्षात्मक से आक्रामक रणनीति की ओर बदलाव

  • आक्रामक व्यापार रणनीति की ओर संक्रमण: भारत ने रक्षात्मक व्यापार रुख से आगे बढ़कर व्यापार समझौतों के वार्ता में अधिक सक्रिय और आक्रामक दृष्टिकोण अपनाया है।
  • व्यापार ढाँचे का विस्तार: यह समझौता भारत की व्यापक व्यापार संरचना में योगदान देता है, जिसमें यूरोपीय संघ (EU), ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के साथ हाल ही में किए गए समझौते भी शामिल हैं।
  • नियम-निर्धारण, न कि मात्र प्रतीकवाद: यह समझौता केवल प्रतीकात्मक न होकर सीमा शुल्क और बाज़ार पहुँच (Market Access) पर स्पष्ट नियम स्थापित करता है।
  • सतत कूटनीति का परिणाम: यह समझौता लगभग एक वर्ष तक चली निरंतर वार्ताओं और रणनीतिक कूटनीतिक संलग्नता का परिणाम है।

महत्वपूर्ण शुल्क कटौती और बाज़ार पहुँच

  • तीव्र शुल्क कटौती: इस समझौते के तहत भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी शुल्क 50% से घटाकर 18% कर दिया गया है, जिससे मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
  • निर्यात प्रतिस्पर्धा की पुनर्बहाली: कम शुल्क भारतीय उत्पादों पर पड़ने वाली लागत-हानि को समाप्त करता है, जिससे वे वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों के निर्यातों के साथ अधिक प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा कर सकते है।
  • भारत के निर्यात इंजन को बढ़ावा: चूँकि अमेरिका भारत के कुल निर्यात का लगभग पाँचवाँ हिस्सा है, इसलिए यह शुल्क कटौती निर्यात वृद्धि के संदर्भ में एक महत्त्वपूर्ण लाभ साबित हो सकता है।
  • निर्यातकों के लिए नीतिगत निश्चितता: यह समझौता व्यापार नीति में पूर्वानुमेयता प्रदान करता है, जिससे भारतीय निर्यातक अचानक कर वृद्धि के भय के बिना दीर्घकालिक निवेश और बाज़ार रणनीतियाँ अपना सकते हैं।

क्षेत्र-विशिष्ट लाभ और “लैंडेड कॉस्ट (Landed Cost)”

  • वस्त्र: भारत अब उन देशों के साथ प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा कर सकता है जिन्हें पहले कम शुल्क का लाभ प्राप्त था।
  • रत्न एवं आभूषण: सूरत का मूल्य-संवेदनशील हीरा-पॉलिशिंग केंद्र अधिक कार्य प्राप्त करेगा, क्योंकि उच्च करों के कारण मार्जिन पर पड़ने वाला प्रभाव कम हो गया है।
  • चमड़ा और समुद्री उत्पाद: कानपुर और चेन्नई का चमड़ा उद्योग तथा आंध्र प्रदेश का झींगा और समुद्री उत्पाद क्षेत्र कम लागत से लाभान्वित होंगे।
  • लैंडेड कॉस्ट: “लैंडेड कॉस्ट” (उत्पाद लागत + परिवहन + कर) में कर घटक कम होने से भारत को चीन, श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे प्रतिस्पर्धियों पर तुलनात्मक बढ़त प्राप्त होगी।
    • प्रतिस्पर्धात्मक लाभ का अर्थ है किसी देश की वस्तुओं को अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में अधिक कुशलता से या कम लागत में उत्पादन और बिक्री करने की क्षमता, जिससे वह बाज़ार में अधिक मजबूत स्थिति प्राप्त कर सके।
    • कम अमेरिकी शुल्क भारतीय निर्यात को चीन, बांग्लादेश और आसियान (ASEAN) देशों जैसे प्रमुख प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले लाभ प्रदान करते हैं, जिससे वैश्विक प्रमुख बाज़ारों में भारत की स्थिति मजबूत होती है।

रणनीतिक और प्रौद्योगिकीय संरेखण

  • मेक इन इंडिया को बढ़ावा: यह समझौता अमेरिकी बाज़ार तक बेहतर पहुँच प्रदान कर “मेक इन इंडिया” दृष्टिकोण को आगे बढ़ाता है और भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में मजबूत करता है।
  • चीन प्लस वन रणनीति के अनुरूप: यह अमेरिका की “चीन प्लस वन” रणनीति का समर्थन करता है, जिसमें विविधीकृत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलओं के लिए भारत को एक प्रमुख वैकल्पिक गंतव्य के रूप में स्थापित किया जा रहा है।
  • iCET ढाँचे को मजबूत करना: यह समझौता क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी (iCET) पहल को सुदृढ़ करता है, जिससे रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग और गहरा होता है।
  • नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के लिए उत्प्रेरक: व्यापार विस्तार से भारत में अमेरिकी R&D केंद्रों और संयुक्त उपक्रमों के आकर्षित होने की संभावना है, जिससे घरेलू नवाचार और प्रौद्योगिकी का प्रसार बढ़ेगा।

भारतीय उद्योग की भूमिका

  • नीतिगत ढाँचा तैयार करना: सरकार ने बाज़ार पहुँच और निर्यात के लिए आवश्यक व्यापार संरचना—अर्थात “एक्सप्रेसवे”—तैयार कर दिया है।
  • उद्योग-नेतृत्व वाले क्रियान्वयन की आवश्यकता: अब जिम्मेदारी भारतीय उद्योग पर है कि वह निवेश करे, उत्पादन क्षमता बढ़ाए और उत्पाद गुणवत्ता में सुधार करे, ताकि समझौते का पूरा लाभ उठाया जा सके और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा की जा सके।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, भारत–अमेरिका व्यापार समझौता भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाता है, रणनीतिक विश्वास को गहरा करता है और भारत के वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने के दीर्घकालिक लक्ष्य को समर्थन प्रदान करता है।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न: भारत–अमेरिका के हालिया व्यापार समझौते के महत्व का परीक्षण कीजिए, जो भारत की सक्रिय (proactive ) आर्थिक कूटनीति की ओर बदलाव को दर्शाता है। यह समझौता रोजगार सृजन और भारत के विनिर्माण आधार के विस्तार में किस प्रकार योगदान देता है?

(15 अंक, 250 शब्द)

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