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Lokesh Pal
March 18, 2026 05:30
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ट्रांसजेंडर संरक्षण (संशोधन) विधेयक 2026, वर्ष 2019 के अधिनियम द्वारा स्थापित कानूनी ढाँचे में महत्त्वपूर्ण बदलाव करने का प्रयास करता है, जिसमें आत्म-पहचान (Self-Identification) के सिद्धांत से हटकर पहचान के जैविक और चिकित्सीय मॉडल की ओर रुख किया गया है।
जहाँ सरकार इसे कानूनी स्पष्टता और धोखाधड़ी रोकने का उपाय मानती है, वहीं सामाजिक कार्यकर्ता इसे एक प्रतिगमन (Regression) मानते हैं, जो सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आत्म-निर्णय के संवैधानिक अधिकार को कमजोर करता है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्नप्रश्न: ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026 में प्रस्तावित प्रमुख बदलावों की चर्चा कीजिए। समावेशन और कल्याण पर इनके क्या प्रभाव होंगे? (15 अंक, 250 शब्द) |
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