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फसल अपशिष्ट को ग्रामीण स्वर्ण में बदलना: बायोमास को-फायरिंग के लिए नीतिगत प्रोत्साहन की आवश्यकता

Lokesh Pal August 28, 2025 05:15 16 0

संदर्भ:

भारत ने ग्रामीण संकट, वायु प्रदूषण और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास पैलेट के को-फायरिंग की शुरुआत की है।

बायोमास को-फायरिंग के बारे में:

  • बायोमास पैलेट एक लोकप्रिय प्रकार का बायोमास ईंधन है, जो आमतौर पर लकड़ी के अवशेष, कृषि बायोमास, वाणिज्यिक घास और वानिकी अवशेषों से बनाया जाता है।
  • यह परस्पर जुड़े मुद्दों को हल करने के लिए एक स्थायी मार्ग प्रदान करता है, तथा कृषि अपशिष्ट को ग्रामीण भारत के लिए एक मूल्यवान संसाधन में परिवर्तित करता है।

SAMARTH मिशन:

  • विद्युत मंत्रालय ने समर्थ मिशन (थर्मल पावर प्लांट में कृषि अवशेषों के उपयोग पर सतत कृषि मिशन) शुरू किया है।
  • इस पहल का उद्देश्य सभी कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले के साथ 5% बायोमास आधारित पैलेट को मिश्रित करना है, तथा 2025 के अंत तक इसे बढ़ाकर 7% करने का लक्ष्य है।
  • इस मिशन का उद्देश्य व्यवस्थित एवं विनियमित बायोमास दहन के माध्यम से पर्यावरणीय क्षति को रोकना तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है।

कृषि अवशेषों की अप्रयुक्त क्षमता:

  • कृषि अवशेष का पैमाना: भारत में प्रतिवर्ष 500 मिलियन टन कृषि अवशेष उत्पन्न होता है।
  • अवशेष संबंधी चुनौती: हालांकि इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा चारे, ईंधन की लकड़ी या कम्पोस्ट के लिए उपयोग किया जाता है, फिर भी 140 मिलियन टन अवशेष अधिशेष के रूप में बच जाता है।
    • इस अधिशेष को अक्सर खेतों में ही जला दिया जाता है, विशेष रूप से सिंधु-गंगा के मैदानों में, जिससे गंभीर वायु प्रदूषण (पंजाब और हरियाणा में सर्दियों के वायु प्रदूषण का 40% तक) और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में योगदान होता है
  • अवशेषों का उत्पादक उपयोग: चावल के भूसे, कपास के डंठल, सरसों की भूसी या गन्ने की खोई जैसी सामग्रियों का उपयोग करके इस अवशेष को पैलेट में परिवर्तित करने से यह आसानी से पोर्टेबल/वहनीय हो जाता है और ताप विद्युत संयंत्रों में उपयोग योग्य हो जाता है, जिससे कोयले पर निर्भरता कम हो जाती है।

बायोमास को-फायरिंग के लाभ:

  • पर्यावरणीय लाभ: बायोमास को-फायरिंग से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में 15% से 20% तक की कमी आ सकती है, जो भारत की स्वच्छ ऊर्जा प्रतिबद्धताओं और 2070 तक शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन प्राप्त करने के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
    • इससे पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है।
  • ग्रामीण भारत के लिए आर्थिक उत्थान:
    • किसान आय: किसान अपने कृषि अवशेष बेचकर प्रति एकड़ 3,000 से 6,000 रुपये कमा सकते हैं।
      • इससे 10 से 20 मिलियन किसानों को सीधे लाभ होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में प्रतिवर्ष 6,000 से 24,000 करोड़ रुपये का निवेश हो सकता है।
    • रोजगार सृजन: पैलेट विनिर्माण इकाइयां पहले से ही उत्तरी और मध्य भारत में रोजगार सृजन कर रही हैं, तथा लघु उद्यमियों के माध्यम से इसमें और अधिक वृद्धि की संभावना है।
      • राष्ट्रीय जैव ऊर्जा मिशन का लक्ष्य ग्रामीण और अर्ध-ग्रामीण क्षेत्रों में 500,000 से अधिक रोजगार सृजित करना है।
    • प्रवासन से निपटना: स्थानीय रोजगार सृजन से ग्रामीण-शहरी प्रवासन को कम करने में मदद मिलती है।
    • कृषि विविधीकरण: बायोमास उत्पादन को प्रोत्साहित करने से किसानों को फसलों में विविधता लाने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है, जिससे वे समस्याग्रस्त एकल-फसल पद्धतियों से बाहर निकल सकते हैं।
  • ऊर्जा सुरक्षा: कोयले पर निर्भरता को कम करके उसके स्थान पर बायोमास का उपयोग करने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।

बायोमास को-फायरिंग का सफल कार्यान्वयन:

  • स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम द्वारा इस पद्धति को लागु किया गया है। यूनाइटेड किंगडम का ड्रेक्स पावर स्टेशन अपने 80% तक बिजली उत्पादन के लिए बायोमास पर निर्भर है।
  • जापान और दक्षिण कोरिया ने अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के 20% तक के लिए को-फायरिंग पर निर्भर रहना शुरू कर दिया है, जिसे अक्सर दीर्घकालिक खरीद समझौतों के माध्यम से पूरा किया जाता है।
  • इंडोनेशिया में लगभग 52 कोयला विद्युत संयंत्र हैं जिनमें लगभग 10% बायोमास का उपयोग होता है।

आगे की राह:

  • स्पष्ट और सुसंगत खरीद मानदंड: बायोमास छर्रों के लिए पारदर्शी, ऑनलाइन और डिजिटल खरीद प्रक्रिया स्थापित करें।
    • पैलेट की गुणवत्ता और मूल्य तंत्र को मानकीकृत करना, अनुबंध-आधारित समझौतों को बढ़ावा देना, तथा विश्वास निर्माण के लिए हितधारकों के बीच मुद्दों पर मध्यस्थता करना।
  • क्षमता निर्माण सहायता: गुणवत्ता मानकों को पूरा करने के लिए सब्सिडी, आसान ऋण सुविधाएं और तकनीकी सहायता प्रदान करना।
    • खेतों से लेकर बिजली संयंत्रों तक आपूर्ति श्रृंखला को सुव्यवस्थित करने के लिए रसद सहायता को मजबूत करना।
  • बेहतर निगरानी और रिपोर्टिंग: को-फायरिंग गतिविधियों के डेटा प्रबंधन और उत्सर्जन की निगरानी के लिए मजबूत प्रणालियों को लागू करना।
    • व्यापक स्तर पर अपनाने और जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं और केस स्टडीज़ को साझा करना।
  • कार्बन बाजारों का लाभ उठाना: चूंकि बायोमास को-फायरिंग से कार्बन उत्सर्जन कम होता है, इसलिए यह कार्बन क्रेडिट उत्पन्न करता है, जिसका मुद्रीकरण आगे की हरित परियोजनाओं को वित्तपोषित करने और शुद्ध-शून्य लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद के लिए किया जा सकता है।

निष्कर्ष

बायोमास को-फायरिंग को बढ़ावा देने से अपशिष्ट, ऊर्जा और ग्रामीण समृद्धि को एकीकृत करने का एक आशाजनक मार्ग निर्मित होता है।

  • भारत ने समर्थ मिशन के माध्यम से इस दिशा में पहला कदम पहले ही उठा लिया है।
  • इस प्रयास को मजबूत करने से समावेशी और संतुलित विकास में मदद मिल सकती है।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न: कृषि फसल अपशिष्ट/बायोमास के उपयोग के महत्व का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। फसल बायोमास अवशेषों के बेहतर उपयोग के लिए कौन-सी रणनीतियाँ अपनाई जा सकती हैं?

(15 अंक, 250 शब्द)

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