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यूजीसी (UGC) 2026 विनियम: समानता की रूपरेखा

Lokesh Pal January 27, 2026 05:15 51 0

संदर्भ:

हाल ही में, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने 2012 के ढाँचे को प्रतिस्थापित करते हुए, यूजीसी (उच्च शिक्षण संस्थानों में समता को बढ़ावा देना) विनियम, 2026 [UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026] को अधिसूचित किया है।

यूजीसी (UGC) समता विनियम 2026 के बारे में:

  • विनियमों की आवश्यकता (Need for Regulations): भारतीय उच्च शिक्षा में जाति-आधारित भेदभाव एक सतत चुनौती बना हुआ है।
    • रोहित वेमुला (2016) और पायल तडवी (2019) जैसी हाई-प्रोफाइल त्रासदियों ने संस्थागत विफलताओं को उजागर किया, जिसने यूजीसी (उच्च शिक्षण संस्थानों में समता को बढ़ावा देना) विनियम, 2026 को प्रेरित किया ताकि समता (Equity) को एक विनियामक दायित्व (Regulatory Obligation) के रूप में लागू किया जा सके।

  • संरचना का प्रतिस्थापन: यह 2012 के भेदभाव-विरोधी संरचना का स्थान लेता है, जिसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जाति-आधारित भेदभाव पर अंकुश लगाना है।
  • उद्देश्य: उच्च शिक्षा में, विशेष रूप से SCs, STs, OBCs और महिलाओं के विरुद्ध जाति-आधारित भेदभाव पर अंकुश लगाना, और समता (Equity) को विवेकाधीन नैतिक मार्गदर्शन (Discretionary Moral Guidance) के बजाय एक विनियामक दायित्व में बदलना।
  • प्रवर्तनीय दायित्व (Enforceable Obligation): यह समता को एक संस्थागत जिम्मेदारी मानता है, जो रोकथाम और निवारण तंत्र को सीधे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के विनियमों के अनुपालन से जोड़ता है।
  • कानूनी परिप्रेक्ष्य: इसे सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और जाति-आधारित उत्पीड़न को संबोधित करने में बार-बार की विफलताओं को उजागर करने वाली याचिकाओं के बाद लागू किया गया है।

यूजीसी (UGC) समता विनियम 2026 के प्रमुख प्रावधान:

  • संस्थागत तंत्र: सभी उच्च शिक्षण संस्थानों (HEIs) में अनिवार्य रूप से समान अवसर केंद्र (EOCs), समता समितियाँ (Equity Committees), निगरानी सेल और शिकायत निवारण मार्ग स्थापित करना।
  • निवारण और सहायता: शिकायतों को संभालने, समावेशन को बढ़ावा देने और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), स्थानीय प्रशासन और मीडिया के साथ समन्वय करने के लिए 24/7 हेल्पलाइन, इक्विटी स्क्वॉड (Equity Squads) और इक्विटी एंबेसडर की स्थापना करना।
  • नेतृत्व की जवाबदेही: संस्थागत प्रमुख समता नीतियों के कार्यान्वयन और निगरानी के लिए जिम्मेदार होंगे।
  • समावेशन जनादेश: अनुसूचित जाति (SCs), अनुसूचित जनजाति (STs), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBCs), दिव्यांगजन (PwDs) और महिलाओं के लिए प्रतिनिधित्व और समर्थन सुनिश्चित करना।
  • प्रवर्तन (Enforcement): विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को गैर-अनुपालन को प्रलेखित परिणामों के साथ एक विनियामक उल्लंघन मानने का अधिकार है।

यूजीसी (UGC) समता विनियम 2026 का महत्त्व:

  • परिसर अनुभव पर केंद्रित: यह केवल प्रवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर ध्यान देता है कि छात्र कैसे रहते, अध्ययन करते और कार्य करते हैं, जिससे दैनिक परिसर जीवन में समानता सुनिश्चित होती है।
  • जवाबदेही और समयसीमा: इसमें स्पष्ट परिभाषाएँ, रिपोर्टिंग संरचनाएँ और समयसीमाएँ प्रदान की गई हैं, जो शिकायत निपटान में होने वाली ऐतिहासिक अनदेखी, देरी और जिम्मेदारी टालने की समस्याओं को संबोधित करती हैं।
  • नैतिक से विनियामक कर्तव्य की ओर बदलाव: यह संस्थागत जिम्मेदारी को मजबूत करता है, समता को नैतिक आग्रह से प्रवर्तनीय शासन (Enforceable Governance) में बदलता है।

उभरती चुनौतियाँ:

  • प्रशासनिक बोझ: समितियों पर भारी निर्भरता सीमित संसाधनों वाले राज्य विश्वविद्यालयों और संबद्ध कॉलेजों पर अत्यधिक दबाव डाल सकती है।
  • प्रक्रियात्मक अंतराल: इसमें जांच के तरीकों, साक्ष्य मानकों, गवाहों के प्रबंधन, प्रतिशोध-रोकथाम उपायों और गोपनीयता प्रोटोकॉल पर स्पष्टता का अभाव है।
  • संस्थागत स्वतंत्रता: समान अवसर केंद्र (EOCs) संस्था के नेतृत्व में होते हैं, जिससे पदानुक्रमित परिसर पारिस्थितिकी तंत्र में हितों के संभावित टकराव उत्पन्न होते हैं।
  • परिभाषा में अस्पष्टता: संकीर्ण जाति परिभाषाएँ हाशिए पर रहने वाले या सामान्य श्रेणी की शिकायतों को अनसुलझा छोड़ सकती हैं, जिससे संस्थानों को अत्यधिक व्याख्यात्मक विवेक प्राप्त होता है।
  • सामाजिक विवाद: सवर्ण सेना जैसे समूहों द्वारा विरोध प्रदर्शन सामान्य श्रेणी के छात्रों के कथित बहिष्कार को उजागर करते हैं, हालाँकि सरकार सुधारात्मक प्रावधानों की योजना बना रही है।

आगे की राह:

  • परिचालन स्पष्टता को मजबूत करना: जांच प्रक्रियाओं, साक्ष्य मानकों और शिकायतकर्ताओं तथा गवाहों के लिए सुरक्षा उपायों को निर्दिष्ट करना।
  • क्षमता निर्माण: प्रभावी समान अवसर केंद्र (EOC) के कामकाज के लिए संस्थागत कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना और प्रशासनिक सहायता में निवेश करना।
  • समावेशी दृष्टिकोण: ऐतिहासिक रूप से वंचित समूहों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, सामान्य श्रेणी की शिकायतों सहित सभी छात्रों के लिए प्रावधान सुनिश्चित करना।
  • सतत निगरानी: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को आंशिक प्रवर्तन के बजाय निरंतर और पारदर्शी निगरानी करनी चाहिए।
  • संस्कृति परिवर्तन: कागजी प्रक्रिया से परे समानता और समावेशिता की भावना को बढ़ावा देना, तथा न्यायपूर्णता को परिसर जीवन में अंतर्निहित करना

निष्कर्ष:

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) समता विनियम 2026 उच्च शिक्षा में समता को संस्थागत बनाने के लिए एक ऐतिहासिक पहल है। इसकी सफलता प्रशासनिक स्पष्टता, निरंतर निगरानी, समावेशी कार्यान्वयन और निष्पक्षता, गरिमा तथा विश्वास की परिसर संस्कृति को विकसित करने पर निर्भर करती है।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न: हालिया विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षण संस्थानों में समता को बढ़ावा देना) विनियम, 2026 ने जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा और प्राकृतिक न्याय तथा कानून के समान संरक्षण के सिद्धांतों पर बहस को जन्म दिया  है। इस संदर्भ में, उच्च शिक्षा में समता विनियमों को तैयार करने में शामिल संवैधानिक और शासन संबंधी चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।

(15 अंक, 250 शब्द)

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