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विषाणुजनित बीमारियों का प्रकोप तथा राज्य की प्रतिक्रिया

Lokesh Pal August 13, 2024 05:30 60 0

संदर्भ :

20 जून को जीका वायरस प्रकोप शुरू होने के बाद, पहला मामला पुणे (महाराष्ट्र) में देखा गया, तब से प्रभावित मामलों की संख्या धीरे-धीरे लेकिन निरंतर बढ़ रही है। 

 

प्रारंभिक परीक्षा हेतु विषय : जीका वायरस, विषाणुजनित या वायरल रोग आदि।

मुख्य परीक्षा हेतु विषय : वायरस परीक्षण के लिए विकेन्द्रीकृत प्रणाली विकसित करने में चुनौतियाँ, प्रभावी प्रबंधन आदि।

प्रमुख बिंदु 

  • अगस्त के पहले सप्ताह तक महाराष्ट्र में जीका वायरस के 88 सत्यापित मामले  सामने आए हैं।
  • अकेले पुणे शहर में 73 मामले हैं, जबकि छह मामले पुणे ग्रामीण से हैं। 
  • अब तक रिपोर्ट की गई कुल संख्या (37) में से, अकेले गर्भवती महिलाओं में पुष्ट किए गए संक्रमणों की संख्या का आधा हिस्सा है।

संक्रमण से संबंधित प्रमुख समस्याएँ 

  • जीका वायरस से संक्रमित लोगों में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (Guillain-Barré Syndrome) से पीड़ित होने का खतरा रहता है, जो एक तंत्रिका संबंधी विकार है; जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली परिधीय तंत्रिका तंत्र (Peripheral Nervous Syste) के एक हिस्से पर प्रभाव डालती है।
  • गर्भवती महिलाओं में इसका अधिक हानिकारक प्रभाव देखा जाता है| जीका वायरस के प्रभावस्वरूप गर्भवती महिलाएँ ऐसे शिशुओं को जन्म दे सकती हैं, जिनका सिर औसत से छोटा होता है, जिसे ‘माइक्रोसेफली’ (Microcephaly) कहा जाता है |
  • जनवरी 2023 में प्रकाशित शोध-पत्र ‘द लैंसेट रीजनल हेल्थ – अमेरिकाज’ के अध्ययन के मुताबिक, 2015 से 2017 के बीच ब्राज़ील में जीका वायरस से संक्रमित 1,548 गर्भवती महिलाओं से जन्मे शिशुओं में जन्म के समय या अनुवर्ती कार्रवाई के दौरान माइक्रोसेफली होने की संभावना 6.6% है। 
  • शिशुओं में कार्यात्मक तंत्रिका संबंधी असामान्यताओं से पीड़ित होने का जोखिम 18.7% तथा न्यूरोइमेजिंग, नेत्र संबंधी और श्रवण संबंधी असामान्यताओं का जोखिम अपेक्षाकृत कम था।
  • इसके अलावा समय से पहले जन्म (10.5%) और जन्म के समय कम वजन  का खतरा भी था।
  • संक्रमित पुरुषों के वीर्य में कम-से-कम दो महीने तक संक्रामक वायरस मौजूद रहता है इसलिए यौन संबंधों के माध्यम से भी कोई व्यक्ति संक्रमित हो सकता है |

समाधान

  • पहला संदिग्ध मामला सामने आने के समय से ही परीक्षण के परिणाम आने में लगने वाले समय को कम करना, समय पर सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया शुरू करने की कुंजी है|
  • अभी तक कोई वैक्सीन या दवा उपलब्ध न होने के कारण, वायरस के प्रसार को सीमित कर इसके प्रकोप को रोका जा सकता है। 

निष्कर्ष

विषाणुजनित प्रकोपों ​​के प्रबंधन के लिए प्रभावी निगरानी और समय पर जाँच महत्त्वपूर्ण है। केंद्र तथा राज्य सरकारों द्वारा भविष्य के संकट को रोकने और नियंत्रित करने हेतु परीक्षण क्षमताओं को बढ़ाने के साथ वायरस संक्रमण के पिछले उदाहरणों से भी सीखने की आवश्यकता है | 

मुख्य परीक्षा पर आधारित प्रश्न

प्रश्न : भारत में विषाणुजनित बीमारियों के परीक्षण तथा अनुक्रमण के लिए एक विकेन्द्रीकृत प्रणाली विकसित करने में आने वाली बहुआयामी चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए। साथ ही यह भी बताइए कि ऐसे रोगों का प्रभावी प्रबंधन कैसे किया जा सकता है?

(15 अंक, 250 शब्द)

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