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प्रश्न की मुख्य माँग
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यूथेनेशिया (Euthanasia) का अर्थ है, कष्ट को दूर करने के लिए जानबूझकर जीवन का अंत करना। यह आत्मनिर्णय और गरिमा से मृत्यु से संबंधित नैतिक, सामाजिक और कानूनी प्रश्नों को जन्म देता है। भारत में, सर्वोच्च न्यायालय ने अरुणा शानबाग (2011) और कॉमन कॉज (2018) मामलों में निष्क्रिय इच्छा मृत्यु को सख्त शर्तों के साथ मान्यता दी, और अनुच्छेद-21 के अंतर्गत “गरिमापूर्ण मृत्यु का अधिकार” को शामिल किया। तथापि, इसकी रूपरेखा अभी भी जटिल और अधिकांश लोगों के लिए अप्राप्य है।
| पहलू | सक्रिय इच्छा मृत्यु | निष्क्रिय इच्छा मृत्यु |
| अर्थ | जानबूझकर किसी क्रिया द्वारा मृत्यु लाना (जैसे — विषाक्त इंजेक्शन देना)। | जीवन को लंबा करने वाले उपचार यंत्रों को रोकना या हटाना (जैसे — वेंटिलेटर हटाना)। |
| कार्य की प्रकृति | मृत्यु के लिए प्रत्यक्ष हस्तक्षेप। | प्राकृतिक मृत्यु को होने देना, बिना हस्तक्षेप के। |
| भारत में वैधता | अवैध — भारतीय दंड संहिता (IPC) के अंतर्गत दंडनीय अपराध। | कानूनी — सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय (वर्ष 2011, वर्ष 2018) द्वारा मान्यता प्राप्त। |
| नैतिक दृष्टिकोण | नैतिक रूप से हत्या के समान माना जाता है। | प्रकृति को अपना कार्य करने देने के समान माना जाता है। |
| उदाहरण | हृदय गति रोकने हेतु पोटैशियम क्लोराइड इंजेक्शन देना। | बेहोश रोगी के जीवन समर्थन उपकरण को हटाना जब सुधार की कोई संभावना न हो। |
निष्क्रिय इच्छा मृत्यु में गरिमा के संवैधानिक वादे को साकार करता है। परंतु जटिल प्रक्रिया, अस्पष्ट कानून और जागरूकता की कमी इसकी मानवीय भावना को सीमित करती है। यदि संपूर्ण कानून, डिजिटल संरचना, नैतिक प्रशिक्षण और उपशामक देखभाल को सुदृढ़ किया जाए, तो यह व्यवस्था करुणामय, प्रभावी और सभी के लिए सुलभ बन सकती है — जिससे भारत में गरिमा का अधिकार केवल जीवन तक सीमित नहीं, बल्कि मृत्यु तक विस्तारित हो सके।
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