प्रश्न की मुख्य माँग
- खाद्य असुरक्षा का समाधान
- प्रदूषण का निवारण
- बाढ़ शमन
- शहरी ऊष्मा तनाव में कमी।
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उत्तर
शहरी मृदा, जो अक्सर डामर और कंक्रीट के नीचे छिपी रहती है, सतत् शहरी नियोजन के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। विश्व मृदा दिवस 2025 (प्रत्येक वर्ष 5 दिसंबर) “स्वस्थ शहरों के लिए स्वस्थ मृदा” पर जोर देता है, जो तीव्र शहरीकरण के बीच खाद्य सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण, बाढ़ शमन और ऊष्मा तनाव में कमी में मृदा की भूमिका को रेखांकित करता है।
खाद्य असुरक्षा का समाधान
- शहरी कृषि आधार: स्वस्थ शहरी मिट्टी छत बागानों, सामुदायिक खेतों और परिधीय कृषि को सक्षम बनाती है, जिससे स्थानीय खाद्य आपूर्ति बढ़ती है।
- पोषक तत्त्व-समृद्ध फसलें: जैविक पदार्थ से समृद्ध मृदा पोषक-तत्त्वों से भरपूर कृषि-उत्पाद प्रदान करती है, जिससे शहरी पोषण स्तर में वृद्धि होती है और भुखमरी की समस्या में कमी आती है।
- खाद्य-प्रणाली लचीलापन: स्थानीय मिट्टी आधारित खेती आपूर्ति-शृंखला अवरोधों के विरुद्ध शहरों को संरक्षण देती है, दूरस्थ खेतों पर निर्भरता घटाती है।
- उदाहरण: UN/FAO बताता है कि मृदा शहरी संदर्भों में भी खाद्य उत्पादन का समर्थन करती है।
प्रदूषण का निवारण
- प्राकृतिक परिशोधक: शहरी मृदा पानी को छानकर प्रदूषकों को अवरोधित करती है, जिससे संदूषक भूजल और जलमार्गों तक पहुँचने से रुकते हैं। समृद्ध और स्वस्थ मृदा न केवल शहरी जल-गुणवत्ता में सुधार लाती है, बल्कि वायु-गुणवत्ता को भी बेहतर बनाती है।
- जैव विविधता समर्थन: मिट्टी शहरी जैव विविधता को बनाए रखती है, ऐसे पौधों और सूक्ष्मजीवों को सक्षम बनाती है, जो प्रदूषकों को विघटित करते हैं और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को सुधारते हैं।
- कार्बन सिंक और वायु गुणवत्ता: वनस्पति युक्त मृदा कार्बन संगृहीत करती है और वायु को स्वच्छ बनाने में मदद करती है, कम प्रदूषित और अधिक स्वस्थ शहरी वातावरण में योगदान देती है।
बाढ़ शमन
- जल अवशोषण: पारगम्य एवं वनस्पति-युक्त मृदा वर्षा जल का अवशोषण बढ़ाती है और सतही बहाव को कम करती है, जिससे शहरी क्षेत्रों में बाढ़-जोखिम प्रभावी रूप से घटता है।
- उदाहरण: FAO शहरी जल अवशोषण में मृदा की स्पंज जैसी भूमिका को रेखांकित करता है।
- मूसलाधार वर्षा जल संचयन : मृदा वर्षाजल को अवशोषित और धारण करती है, सतही बहाव को अवरोधित करती है तथा अत्यधिक वर्षा के दौरान नालों एवं जलमार्गों पर दबाव को कम करती है।
- हरित अवसंरचना आधार: मिट्टी आधारित पार्क, हरित पट्टियाँ और बायोस्वेल प्राकृतिक निकासी और बाढ़ शमन प्रदान करते हैं।
शहरी ताप में कमी
- तापमान विनियमन: वनस्पति युक्त मृदा और मृदा-आधारित हरित क्षेत्र छायांकन तथा वाष्पोत्सर्जन के माध्यम से शहरी तापमान को नियंत्रित करते हैं, जिससे हीट-आइलैंड प्रभाव में कमी आती है।
- कार्बन भंडारण: मृदा में उपस्थित जैविक कार्बन CO₂ अवशोषित करने में मदद करता है, जलवायु शमन में योगदान देता है और स्थानीय ऊष्मीकरण को नियंत्रित करता है।
- जीवन योग्य सूक्ष्म-जलवायु: मृदा-आधारित हरित आवरण सूक्ष्म-जलवायु को अनुकूल बनाता है और शीतलन के लिए ऊर्जा खपत को कम करता है।
निष्कर्ष
शहरी नियोजन में मृदा संरक्षण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जिसमें पारगम्य सतहें, शहरी हरित क्षेत्र, कंपोस्टिंग और मृदा-स्वास्थ्य निगरानी शामिल हों। नगरपालिकीय नीतियाँ मृदा-आधारित हरित अवसंरचना को एकीकृत करें, शहरी कृषि को प्रोत्साहित करें और मृदा सीलिंग की प्रवृत्ति को परिवर्तित करने की दिशा में कार्य करें। इससे ‘स्वस्थ शहरों के लिए स्वस्थ मृदा’ सुनिश्चित होती है, जो भविष्य की शहरी पीढ़ियों के लिए खाद्य सुरक्षा, जल प्रबंधन, जलवायु और सार्वजनिक स्वास्थ्य लचीलापन प्रदान करती है।
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