Q. गिग-आधारित अर्थव्यवस्था में संकट को दर्शाते हुए प्लेटफॉर्म श्रमिकों द्वारा नव वर्ष की पूर्व संध्या पर की गई हड़ताल के संदर्भ में, भारत में प्लेटफॉर्म श्रमिकों के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा कीजिए और उचित वेतन और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक नियामक उपायों का सुझाव दीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • गिग प्लेटफॉर्म कर्मचारियों के सामने प्रमुख चुनौतियाँ
  • उचित वेतन और सामाजिक सुरक्षा के लिए विनियामक उपाय

उत्तर

वर्ष 2025 की नव वर्ष की पूर्व संध्या पर दो लाख से अधिक गिग वर्कर्स की राष्ट्रव्यापी हड़ताल ने एक गंभीर ढाँचागत संकट को उजागर किया है। जहाँ एक ओर प्लेटफॉर्म्स ने रिकॉर्ड ऑर्डर मिलने का जश्न मनाया, वहीं सामूहिक “लॉग-आउट” ने इस बात को रेखांकित किया कि गिग अर्थव्यवस्था की “सुविधा” तेजी से अस्थिर कामकाजी परिस्थितियों और श्रमिकों को बुनियादी श्रम अधिकारों से व्यवस्थित रूप से वंचित करने पर आधारित है।

गिग प्लेटफॉर्म कर्मचारियों द्वारा सामना की जाने वाली प्रमुख चुनौतियाँ

  • आय में अस्थिरता: श्रमिकों को अनिश्चित भुगतान और लंबे समय से चले आ रहे प्रोत्साहनों के समाप्त होने का सामना करना पड़ता है, जिससे बुनियादी जीवनयापन के खर्चों को पूरा करना मुश्किल हो जाता है।
    • उदाहरण: सर्वेक्षण में शामिल 80% से अधिक श्रमिकों ने बताया कि वे प्रतिदिन 10 घंटे से अधिक काम करते हैं और डिलीवरी कर्मचारियों का सबसे बड़ा हिस्सा ₹10,000 से कम कमाता है। (PAIGAM  (पीपुल्स एसोसिएशन इन ग्रासरूट्स एक्शन एंड मूवमेंट) द्वारा किए गए सर्वेक्षण के अनुसार)
  • एल्गोरिदम आधारित प्रबंधन: अपारदर्शी “ब्लैक बॉक्स” एल्गोरिदम कार्य आवंटन और दंड निर्धारित करते हैं, जिससे अक्सर मानवीय अपील के बिना मनमाने ढंग से खाते निष्क्रिय कर दिए जाते हैं।
  • व्यावसायिक खतरे: “10 मिनट डिलीवरी” मॉडल राइडर्स को लापरवाही से गाड़ी चलाने के लिए मजबूर करते हैं, जिससे दुर्घटनाओं और शारीरिक थकावट का खतरा बढ़ जाता है।
    • उदाहरण: वर्ष 2025 में कई रिपोर्टों ने अल्ट्रा-फास्ट डिलीवरी के अनिवार्य नियम को डिलीवरी पार्टनर्स के बीच बढ़ते आघात के मामलों से जोड़ा।
  • सामाजिक असुरक्षा: कर्मचारियों के बजाय “स्वतंत्र साझेदार” के रूप में वर्गीकृत होने के कारण श्रमिकों को स्वास्थ्य बीमा, भविष्य निधि या दुर्घटना बीमा जैसी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता है।
    • उदाहरण: तेलंगाना में क्रिसमस की पूर्व संध्या पर 40,000 श्रमिकों की हड़ताल ने मातृत्व और आपातकालीन अवकाश की पूर्ण अनुपस्थिति को उजागर किया।

उचित वेतन और सामाजिक सुरक्षा के लिए नियामक उपाय

  • वैधानिक न्यूनतम मजदूरी: “कम कीमत” की होड़ को रोकने के लिए प्रति किलोमीटर न्यूनतम दर और मासिक आय का आधार निर्धारित करना।
    • उदाहरण: यूनियनों ने ₹20/किमी. की न्यूनतम दर और ₹40,000 की मासिक न्यूनतम आय की माँग की है।
  • अनिवार्य कल्याण कोष: बीमा और पेंशन के लिए एक समर्पित सामाजिक सुरक्षा कोष के वित्तपोषण हेतु एग्रीगेटरों पर लेनदेन-आधारित उपकर लागू करना।
    • उदाहरण: राजस्थान प्लेटफॉर्म आधारित गिग वर्कर्स अधिनियम (वर्ष 2023) प्रत्येक लेन-देन पर 1-2% कल्याण उपकर अनिवार्य करता है।
  • एल्गोरिथम पारदर्शिता: ऐसे कानून बनाना, जो प्लेटफॉर्मों को यह खुलासा करने के लिए बाध्य करें कि काम कैसे आवंटित किया जाता है और मानव-आधारित शिकायत निवारण तंत्र प्रदान करें।
    • उदाहरण: तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स एक्ट, 2025 में विशिष्ट आईडी और पारदर्शी निगरानी प्रणालियों का प्रस्ताव है।
  • सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज: तत्काल राहत प्रदान करने के लिए गिग वर्कर्स को मौजूदा राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाओं में एकीकृत करने की प्रक्रिया को तेज करना।
    • उदाहरण: केंद्रीय बजट 2025-26 में, सरकार ने गिग प्लेटफॉर्म वर्कर्स को आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के लाभ देने की योजना की घोषणा की।

निष्कर्ष

गिग इकोनॉमी की दीर्घायु के लिए “साझेदारी” से “संरक्षण” की ओर परिवर्तन आवश्यक है। सामाजिक सुरक्षा संहिता (वर्ष 2020) को अधिसूचित करके और देश भर में राज्य स्तरीय कल्याणकारी मॉडल अपनाकर, भारत यह सुनिश्चित कर सकता है कि उसका डिजिटल विकास समावेशी हो और अर्थव्यवस्था को शोषण तथा आधुनिक समय की अनिश्चितता से बचाया जा सके।

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