प्रश्न की मुख्य माँग
- भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम पर प्रभाव
- वाणिज्यिक उपग्रह संबंधी महत्त्वाकांक्षाओं पर प्रभाव।
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उत्तर
12 जनवरी, 2026 को, श्रीहरिकोटा से उड़ान भरने के तुरंत बाद, PSLV-C62 मिशन के तीसरे चरण में एक बड़ी तकनीकी खराबी आ गई, जिसके परिणामस्वरूप DRDO के रणनीतिक उपग्रह EOS-N1 (अन्वेषा) सहित 16 उपग्रह नष्ट हो गए। यह घटना, मई 2025 में PSLV-C61 की विफलता के समान है, और इसके 30 वर्षों के इतिहास में पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल की पहली लगातार विफलता है।
भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम पर प्रभाव
- संस्थागत विश्वसनीयता संकट: परिपक्व PS3 सॉलिड स्टेज में लगातार विफलताओं से महज डिजाइन की खामियों के बजाय गुणवत्ता नियंत्रण और आपूर्ति शृंखला की अखंडता को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं।
- उदाहरण: विफलता विश्लेषण समिति (FAC) वर्ष 2025 के C61 मिशन से चली आ रही समस्या, चैंबर के दबाव में गिरावट की जाँच कर रही है।
- रणनीतिक क्षमता में विलंब: EOS-N1 हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग उपग्रह के नष्ट होने से भारत की समुद्री और सीमा निगरानी क्षमताओं में वृद्धि में अत्यधिक विलंब हुआ है।
- उदाहरण: सैन्य आधुनिकीकरण के प्रयास बाधित हुए हैं क्योंकि अंतरिक्ष में रणनीतिक निगरानी के लिए अब प्रतिस्थापन प्रक्षेपण की प्रतीक्षा करनी होगी।
- प्रक्षेपण चक्र में व्यवधान: सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, ISRO को PSLV बेड़े को प्रक्षेपित करने से रोकना पड़ सकता है, जिससे वर्ष 2026 के गगनयान के मानवरहित मिशनों सहित अन्य महत्त्वाकांक्षी लक्ष्यों में संभावित रूप से विलंब हो सकता है।
- उदाहरण: NavIC विस्तार जैसे उच्च-स्तरीय मिशनों को संपूर्ण प्रणालीगत ऑडिट की आवश्यकता के कारण पुनर्निर्धारण का सामना करना पड़ रहा है।
- पारदर्शिता का क्षरण: पूर्व विफलता रिपोर्टों के अप्रकाशित रहने के कारण ISRO की आंतरिक जवाबदेही व्यवस्थाओं पर संसदीय और सार्वजनिक स्तर पर गहन जाँच पड़ताल हो रही है।
वाणिज्यिक उपग्रह संबंधी महत्त्वाकांक्षाओं पर प्रभाव
- NISL के लिए विश्वास की कमी: न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NISL) के एक समर्पित वाणिज्यिक मिशन के रूप में, इस विफलता ने एक विश्वसनीय, लागत प्रभावी वैश्विक ‘लॉन्च हब’ के रूप में भारत की प्रतिष्ठा को कम कर दिया है।
- उदाहरण: ब्रिटेन और ब्राजील के विदेशी ग्राहकों को महत्त्वपूर्ण पेलोड की हानि हुई है, जिससे स्पेसएक्स या रॉकेट लैब जैसी प्रतिस्पर्द्धी कंपनियों की ओर उनके आकर्षित होने की संभावना बढ़ जाती है।
- अंतरिक्ष स्टार्ट-अप्स को झटका: ध्रुव स्पेस और OrbitAID जैसे उभरते भारतीय स्टार्ट-अप्स का अपने अग्रणी प्रौद्योगिकी प्रदर्शकों पर विश्वास कमजोर हुआ है , जिससे उनकी वाणिज्यिक समय-सीमा महीनों पीछे चली गई।
- उदाहरण: OrbitAID का इन-ऑर्बिट रिफ्यूलिंग परीक्षण और TakeMe2Space का ‘ऑर्बिटल डेटा सेंटर” मिशन, दोनों ही C62 मिसाइल के दुर्घटनाग्रस्त होने से बाधित हो गए।
- बीमा प्रीमियम में वृद्धि: बार-बार होने वाली विफलताओं के कारण भविष्य के PSLV लॉन्च के लिए बीमा प्रीमियम में वृद्धि होना तय है, जिससे भारत की पारंपरिक प्रतिस्पर्द्धी मूल्य निर्धारण बढ़त, कमजोर हो रही है।
- निवेशकों के आत्मविश्वास पर नकारात्मक प्रभाव: घरेलू अंतरिक्ष यानों से जुड़े ‘लॉन्च जोखिम’ का निवेशकों द्वारा पुनर्मूल्यांकन किए जाने के कारण भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में वेंचर कैपिटल का प्रवाह धीमा हो सकता है।
- उदाहरण: स्टार्ट-अप्स को तत्काल पुनः उड़ान के अवसर प्राप्त करने में कठिनाई होने के कारण वर्ष 2020 के अंतरिक्ष सुधारों की सबसे कठिन परीक्षा का सामना करना पड़ रहा है।
निष्कर्ष
PSLV-C62 की विफलता एक “चिंताजनक पुनरावृत्ति” है, जो “मिशन-केंद्रित” संस्कृति से “गुणवत्ता-प्रथम” संस्कृति की ओर परिवर्तन की आवश्यकता को दर्शाती है। विफलता रिपोर्टों को सार्वजनिक करके और “जीरो डिफेक्ट” आपूर्ति शृंखला को संस्थागत रूप देकर, इसरो इस महत्त्वपूर्ण परियोजना की विरासत को पुनर्स्थापित कर सकता है। वर्ष 2047 तक भारत की 13 अरब डॉलर की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को बनाए रखने के लिए न केवल शानदार सफलताओं की आवश्यकता है, बल्कि प्रणालीगत त्रुटियों को पारदर्शी रूप से ठीक करने की दृढ़ता भी आवश्यक है।
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