Q. परमाणु प्रसार को रोकने के उद्देश्य से किए गए निवारक युद्ध इसे और भी तीव्र कर सकते हैं। पश्चिम एशिया में समकालीन घटनाक्रमों के आलोक में इस तर्क की जाँच कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • बताइए कि कैसे परमाणु प्रसार को रोकने हेतु किए गए निवारक युद्धों का उल्टा प्रभाव पड़ सकता है।
  • ऐसे निवारक युद्धों का महत्त्व और प्रभावों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर

निवारक युद्ध वे होते हैं, जिनका उद्देश्य किसी राज्य को परमाणु हथियार प्राप्त करने से पूर्व ही रोकना होता है। हालाँकि, पश्चिम एशिया के हालिया संघर्षों ने एक विरोधाभास को उजागर किया है—जहाँ परमाणु प्रसार को रोकने के लिए किए गए सैन्य हमले, इसके विपरीत परमाणु प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने की प्रेरणा को बढ़ा सकते हैं। इस संदर्भ में केनेथ वाल्ट्ज और स्कॉट सागन जैसे विद्वानों के विचार विशेष रूप से प्रासंगिक हैं।

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परमाणु प्रसार रोकने हेतु निवारक युद्ध: कैसे यह प्रसार को तेज कर सकते हैं

  • सुरक्षा खतरे में वृद्धि: सैन्य हमले किसी राज्य की असुरक्षा को बढ़ा देते हैं, जिससे वह अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए परमाणु प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने की ओर अग्रसर होता है।
    • उदाहरण: अमेरिका–इजरायल और ईरान से जुड़े तनाव, ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को तीव्र करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
  • प्रतिरोधक सिद्धांत को मजबूती: निवारक हमले यह धारणा मजबूत करते हैं कि परमाणु हथियार शासन परिवर्तन को रोकने का प्रभावी साधन हैं।
    • उदाहरण: उत्तर कोरिया ने लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता विकसित करने के बाद अपने परमाणु शस्त्रागार का विस्तार किया।
  • गैर-परमाणु सुरक्षा आश्वासनों की कमजोरी: जिन देशों के पास परमाणु हथियार नहीं हैं, वे बाहरी सुरक्षा गारंटियों के बावजूद असुरक्षित रह सकते हैं।
    • उदाहरण: यूक्रेन ने वर्ष 1994 में अपने परमाणु हथियार त्याग दिए, लेकिन बाद में उसे रूसी आक्रामकता का सामना करना पड़ा।
  • परमाणुकरण की रणनीतिक तात्कालिकता: बाहरी दबाव और खतरे देशों को तेजी से परमाणु क्षमता विकसित करने के लिए प्रेरित करते हैं, ताकि वे अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।
  • घरेलू राजनीतिक एकजुटता: बाहरी खतरे राष्ट्रवादी भावनाओं को मजबूत करते हैं, जिससे परमाणु हथियारों को संप्रभुता और सुरक्षा के प्रतीक के रूप में व्यापक जन समर्थन मिलता है।

परमाणु प्रसार को रोकने हेतु निवारक युद्धों का महत्त्व

  • क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना: निवारक हमलों का उद्देश्य किसी देश की परमाणु क्षमता को विकसित होने से पहले रोककर क्षेत्रीय सुरक्षा को अस्थिर होने से बचाना होता है।
    • उदाहरण: इजरायल द्वारा इराक (1981) और सीरिया (2007) पर किए गए हमले।
  • परमाणु संघर्ष के जोखिम को कम करना: परमाणु हथियारों के प्रसार को सीमित करने से आकस्मिक या जानबूझकर होने वाले परमाणु युद्ध की संभावना घटती है।
  • अप्रसार मानदंडों की रक्षा: ऐसी कार्रवाइयाँ वैश्विक स्तर पर परमाणु अप्रसार व्यवस्था को बनाए रखने का प्रयास करती हैं।
    • उदाहरण: परमाणु अप्रसार संधि से जुड़े प्रवर्तन प्रयास।
  • क्षेत्रीय हथियार दौड़ को रोकना: एक देश के परमाणु कार्यक्रम को रोकने से अन्य देशों को भी परमाणु हथियार विकसित करने से हतोत्साहित किया जा सकता है।
    • उदाहरण: यदि ईरान परमाणु क्षमता हासिल करता है, तो पश्चिम एशिया में अन्य देशों के भी ऐसा करने की आशंका।
  • वैश्विक सामरिक संतुलन बनाए रखना: महाशक्तियाँ निवारक कार्रवाइयों को अंतरराष्ट्रीय स्थिरता बनाए रखने के साधन के रूप में प्रस्तुत करती हैं।
    • उदाहरण: ईरान के परमाणु कार्यक्रम के प्रति अमेरिका का विरोध।

निष्कर्ष

निवारक युद्ध परमाणु अप्रसार के लक्ष्यों और सुरक्षा आवश्यकताओं के बीच मौजूद द्वंद्व को उजागर करते हैं, जहाँ सैन्य उपाय कभी-कभी परमाणु हथियारों की आवश्यकता को और बढ़ा देते हैं। पश्चिम एशिया में स्थायी स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए नवीन कूटनीतिक प्रयास, क्षेत्रीय सुरक्षा ढाँचे और विश्वसनीय अप्रसार आश्वासन आवश्यक हैं, जिन्हें परमाणु अप्रसार संधि जैसे तंत्रों के माध्यम से मजबूत किया जाना चाहिए, न कि केवल बलपूर्वक सैन्य रणनीतियों के माध्यम से।

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