Q. भारत में सिविल सेवाओं के नैतिक मानकों और स्वतंत्रता में गिरावट के लिए जिम्मेदार कारकों पर चर्चा कीजिए। सुधारात्मक उपायों का सुझाव दीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • गिरावट के लिए उत्तरदायी कारकों की चर्चा कीजिए।
  • सुधारात्मक उपाय सुझाइए।

उत्तर

भारत की नागरिक सेवाएँ, जिन्हें कभी शासन का “स्टील फ्रेम” कहा जाता था, आज नैतिक मानकों में गिरावट और स्वतंत्रता के कमजोर होने की समस्या का सामना कर रही हैं। बढ़ता भ्रष्टाचार, राजनीतिक हस्तक्षेप और प्रणालीगत विकृतियों ने जन विश्वास और प्रशासनिक निष्पक्षता को कमजोर किया है।

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गिरावट के लिए उत्तरदायी कारक

  • वित्तीय ईमानदारी में क्षरण: भ्रष्टाचार के बढ़ते मामले, विशेषकर वरिष्ठ और कनिष्ठ अधिकारियों में, नैतिक मानकों को कमजोर कर रहे हैं।
    • उदाहरण: प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी में विभिन्न अधिकारियों से बड़ी मात्रा में नकद और आभूषण की बरामदगी।
  • प्रशासन में राजनीतिक हस्तक्षेप: राजनीतिक कार्यपालिका का दबाव प्रशासनिक निष्पक्षता और निर्णय-निर्माण को प्रभावित करता है।
    • उदाहरण: मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) का मुख्यमंत्री के प्रति अत्यधिक अधीन होना।
  • राजनेता–नौकरशाह गठजोड़: आपसी लाभ के कारण जवाबदेही और संस्थागत ईमानदारी कमजोर होती है।
    • उदाहरण: निर्वाचित प्रतिनिधियों में भ्रष्टाचार का प्रभाव नौकरशाही के आचरण पर पड़ता है।
  • भय, दबाव और कॅरियर जोखिम: अधिकारी धमकियों, दंडात्मक तबादलों या अन्य दबावों के कारण नैतिक रुख अपनाने से बचते हैं।
    • उदाहरण: पहले तबादले सजा के रूप में होते थे, अब धमकी और दबाव के आरोप अधिक सामने आते हैं।
  • कमजोर जवाबदेही तंत्र: न्यायिक प्रक्रियाओं में देरी और अप्रभावी निगरानी के कारण अनुचित आचरण पर अंकुश नहीं लग पाता है।

सुधारात्मक उपाय

  • संस्थागत सुरक्षा को सुदृढ़ करना: अधिकारियों के लिए निश्चित कार्यकाल और मनमाने तबादलों से संरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
    • उदाहरण: द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (IInd ARC) द्वारा सिविल सेवा स्थिरता की सिफारिश।
  • पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना: संपत्ति का खुलासा और सतर्कता तंत्र को मजबूत किया जाए।
    • उदाहरण: ऑल इंडिया सर्विसेज अधिकारियों के लिए वार्षिक संपत्ति विवरण अनिवार्य है।
  • नैतिकता आधारित प्रशिक्षण और मूल्यांकन: सेवा के दौरान ईमानदारी और लोक सेवा मूल्यों को प्रशिक्षण और पदोन्नति प्रक्रिया में शामिल किया जाए।
    • उदाहरण: सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में नैतिक पुलिसिंग पर जोर।
  • नौकरशाही को राजनीतिक दबाव से मुक्त करना: पदस्थापन और स्थानांतरण के लिए स्वतंत्र सिविल सेवा बोर्ड स्थापित किए जाएँ।
    • उदाहरण: टी.एस.आर. सुब्रमण्यम बनाम भारत संघ (2013) में सिविल सेवा बोर्ड के गठन का निर्देश।
  • नागरिक और सिविल सोसायटी की निगरानी: पारदर्शिता कानूनों और जनभागीदारी के माध्यम से सार्वजनिक जवाबदेही को सुदृढ़ किया जाए।
    • उदाहरण: सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 नागरिकों को भ्रष्टाचार उजागर करने में सक्षम बनाता है।

निष्कर्ष 

नागरिक सेवाओं में नैतिक मानकों को पुनर्स्थापित करने के लिए संस्थागत सुधार, राजनीतिक इच्छाशक्ति और सामाजिक सतर्कता अत्यंत आवश्यक है। केवल ईमानदारी और स्वायत्तता को पुनः स्थापित करके ही नौकरशाही प्रभावी रूप से नागरिकों की सेवा कर सकती है और भारत में लोकतांत्रिक शासन को सुदृढ़ बनाए रख सकती है।

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