Q. भारत में अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था व्यवस्थागत शासन की विफलताओं को दर्शाती है। अस्पतालों में बार-बार होने वाली अग्नि घटनाओं के कारणों का विश्लेषण कीजिए और रोगी सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपाय सुझाइए। (10 अंक, 150 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • अस्पतालों में बार-बार होने वाली आग की घटनाओं के कारणों की चर्चा कीजिए।
  • रोगी सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपाय सुझाइए।

उत्तर

हाल ही में एससीबी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल सहित आईसीयू में हुई अग्नि त्रासदियों ने अस्पताल सुरक्षा में गहरी प्रशासनिक विफलताओं को उजागर किया है। नियमों के बावजूद, बार-बार होने वाली घटनाएँ अनुपालन, बुनियादी ढाँचे और जवाबदेही में कमियों को दर्शाती हैं, जिससे रोगियों का जीवन खतरे में पड़ जाता है।

अस्पतालों में बार-बार आग लगने की घटनाओं के कारण 

  • सुरक्षा मानकों के कमजोर क्रियान्वयन: अनिवार्य अग्नि सुरक्षा स्वीकृति और ऑडिट होने के बावजूद उनका प्रभावी पालन नहीं किया जाता।
    • उदाहरण: वर्ष 2016 भुवनेश्वर आईसीयू आग की घटना बिना अग्नि सुरक्षा अनुमति के हुई।
  • विद्युत अवसंरचना की कमियाँ: खराब वायरिंग, अत्यधिक लोड और उपकरणों के अनुरूप बिजली आपूर्ति का अभाव आग के जोखिम को बढ़ाता है।
  • कर्मचारियों का अपर्याप्त प्रशिक्षण और तैयारी: अस्पताल कर्मियों में आपात स्थिति से निपटने और उपकरणों के उपयोग की पर्याप्त क्षमता नहीं होती।
    • उदाहरण: कटक आईसीयू में अग्निशमन दल को सूचना देने में 30 मिनट से अधिक की देरी हुई।
  • आईसीयू में तकनीकी जोखिम: ऑक्सीजन-समृद्ध वातावरण और उन्नत उपकरण आग के प्रति अधिक संवेदनशील बनाते हैं।
    • उदाहरण: कटक घटना में वेंटिलेटर से जुड़े शॉर्ट सर्किट और हार्मोनिक करंट से अधिक गर्मी की आशंका जताई गई।
  • अनुपालन को औपचारिकता के रूप में देखना: सुरक्षा उपायों को जवाबदेही के बजाय केवल कागजी प्रक्रिया के रूप में लिया जाता है।
    • उदाहरण: ओडिशा सरकार द्वारा ₹320 करोड़ आवंटित करने के बावजूद कमजोर क्रियान्वयन के कारण घटनाएँ जारी रहीं।

रोगी सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपाय 

  • कड़े क्रियान्वयन के साथ आपराधिक जवाबदेही: सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी तय की जाए और इसे केवल प्रक्रियात्मक नहीं बल्कि आपराधिक श्रेणी में रखा जाए।
    • उदाहरण: अग्नि सुरक्षा में लापरवाही को आपराधिक कृत्य के रूप में दर्ज करना।
  • विद्युत अवसंरचना का उन्नयन: नियमित ऑडिट, लोड आकलन और आधुनिक सर्किट सुरक्षा प्रणालियों का उपयोग आवश्यक है।
    उदाहरण: हर नए आईसीयू उपकरण के साथ वायरिंग का अनिवार्य पुनर्मूल्यांकन।
  • कर्मचारियों का प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण: अस्पताल कर्मियों के लिए नियमित अभ्यास (ड्रिल) और अग्नि प्रतिक्रिया प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जाए।
    • उदाहरण: विद्युत प्रेरित आग के लिए CO₂ अग्निशामक के उपयोग हेतु प्रशिक्षित कर्मी आवश्यक हैं।
  • आपात प्रतिक्रिया तंत्र को सुदृढ़ करना: त्वरित सूचना प्रणाली, कार्यशील अग्निशमन उपकरण और बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाए।
    • उदाहरण: कटक में कार्यशील हाइड्रेंट और तत्काल अलर्ट प्रणाली से प्रतिक्रिया में देरी कम हो सकती थी।
  • निरंतर सुरक्षा ऑडिट का संस्थानीकरण: एक बार के अनुपालन के बजाय नियमित और तकनीक-सक्षम निगरानी अपनाई जाए।
    उदाहरण: वर्ष 2016 के बाद ऑडिट अनिवार्य किए गए, लेकिन कठोर आवधिक अनुपालन और स्वतंत्र सत्यापन की आवश्यकता है।

निष्कर्ष 

अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केवल प्रक्रियात्मक अनुपालन से आगे बढ़कर जवाबदेही आधारित शासन की आवश्यकता है। अवसंरचना, प्रशिक्षण और कठोर प्रवर्तन को सुदृढ़ कर ही संवेदनशील रोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है तथा गरिमा और सुरक्षा के साथ स्वास्थ्य के अधिकार को बनाए रखा जा सकता है।

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