Q. समावेशी विकास की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं? क्या भारत इस तरह की विकास प्रक्रिया का अनुभव कर रहा है? विश्लेषण कीजिए और समावेशी विकास के उपाय सुझाएँ। (15 अंक, 250 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • समावेशी विकास की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। 
  • इस कथन के पक्ष और विपक्ष में तर्क दीजिए कि भारत ने इस प्रकार की विकास प्रक्रिया का अनुभव किया है।
  • समावेशी विकास को बढ़ावा देने के उपाय सुझाइए।

उत्तर

OECD के अनुसार, समावेशी विकास यह सुनिश्चित करता है कि आर्थिक विकास सभी के लिए अवसर उत्पन्न करे और इसके लाभों का समान वितरण हो। भारत के संदर्भ में, इस प्रकार की विकास प्रक्रिया प्राप्त हुई है या नहीं, इसका आकलन करना एक प्रमुख विकासात्मक चिंता का विषय बना हुआ है।

समावेशी विकास की प्रमुख विशेषताएँ

  • व्यापक और समानतापूर्ण विकास: विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों और क्षेत्रों तक पहुँचना चाहिए, ताकि आय और अवसर कुछ लोगों तक सीमित न रहकर व्यापक रूप से वितरित हों।
  • गरीबी उन्मूलन और सामाजिक सुरक्षा: समावेशी विकास का लक्ष्य लक्षित कल्याणकारी योजनाओं, आय सहायता और कमजोर वर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा उपायों के माध्यम से गरीबी को कम करना है।
  • रोजगार सृजन: यह उत्पादक और सुरक्षित रोजगार के सृजन पर बल देता है, जिससे लोग आर्थिक विकास में भागीदारी कर सकें और केवल कल्याणकारी योजनाओं पर निर्भर न रहें।
  • मूलभूत सेवाओं तक पहुँच: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, स्वच्छता, आवास और वित्तीय सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित करना, जो मानव क्षमताओं के विकास के लिए आवश्यक हैं।
  • सशक्तीकरण और भागीदारी: महिलाओं, अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) और ग्रामीण आबादी जैसे वंचित समूहों की आर्थिक और निर्णय-निर्माण प्रक्रियाओं में भागीदारी को प्रोत्साहित करना।

क्या भारत वास्तव में समावेशी विकास का अनुभव किया है?
समर्थन में तर्क विरोध में तर्क
चरम गरीबी में कमी: भारत में बहुआयामी गरीबी 2005–06 में 55.3% से घटकर 2022–23 में 11.28% हो गई है, जो दर्शाता है कि आर्थिक विकास ने लाखों लोगों के जीवन स्तर में सुधार किया है। अनौपचारिकता और रोजगार की निम्न गुणवत्ता: भारत की कार्यबल का बड़ा हिस्सा अनौपचारिक क्षेत्र में है, लगभग 82% अनौपचारिक क्षेत्र में और 90% अनौपचारिक रोजगार में संलग्न हैं, जो असुरक्षित और कम आय वाले होते हैं।
सामाजिक सुरक्षा का विस्तार: सरकारी योजनाओं के माध्यम से 64% से अधिक आबादी को कवर किया गया है, जिससे खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और आय सहायता तक पहुँच में सुधार हुआ है। स्व-रोजगार और छिपी बेरोजगारी: आर्थिक सर्वेक्षण 2024 के अनुसार 57.3% कार्यबल स्व-रोजगार में है, जो अक्सर कम उत्पादकता वाली गतिविधियों में होता है और वास्तविक रोजगार सृजन की कमी को दर्शाता है।
वित्तीय समावेशन में प्रगति: 55 करोड़ से अधिक जन धन खातों के माध्यम से बैंकिंग, ऋण और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) की पहुँच बढ़ी है, जिससे पहले वंचित वर्ग औपचारिक अर्थव्यवस्था से जुड़ पाए हैं। कम बेरोजगारी के बावजूद रोजगार की गुणवत्ता में असमानता: बेरोजगारी दर 2023–24 में लगभग 3.2% तक घट गई है, किंतु यह कम वेतन, अनौपचारिक रोजगार और अल्प-रोजगार जैसी समस्याओं को छिपाती है, जिससे स्पष्ट होता है कि विकास गुणवत्तापूर्ण रोजगार में पूर्णतः परिवर्तित नहीं हुआ है।
निरंतर आर्थिक वृद्धि: भारत की 7–8% की सतत GDP वृद्धि ने रोजगार और आय सृजन के अवसर प्रदान किए हैं, जो समावेशी विकास की आधारशिला बनती है। कम महिला श्रम बल भागीदारी: महिला श्रम बल भागीदारी दर लगभग 37% है, जो आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की सीमित भागीदारी को दर्शाती है और समावेशी विकास में बाधा उत्पन्न करती है।

समावेशी विकास को बढ़ावा देने के उपाय

  • रोजगार-आधारित विकास को सुदृढ़ करना: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSMEs), कृषि और विनिर्माण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को प्रोत्साहित कर बड़े पैमाने पर सतत रोजगार सृजन सुनिश्चित करना।
  • मानव पूँजी का सुदृढ़ीकरण: शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास में निवेश बढ़ाकर उत्पादकता तथा दीर्घकालिक आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा देना।
  • क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना: पिछड़े क्षेत्रों के विकास के लिए लक्षित अवसंरचना, बेहतर संपर्क और निवेश प्रोत्साहन पर ध्यान केंद्रित करना।
  • वित्तीय और डिजिटल समावेशन को गहरा करना: बैंकिंग, ऋण, बीमा और डिजिटल सेवाओं तक पहुँच का विस्तार कर अधिक लोगों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ना।

निष्कर्ष

भारत ने समावेशी विकास की दिशा में, विशेषकर गरीबी उन्मूलन और वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में, उल्लेखनीय प्रगति की है। तथापि, निरंतर बनी असमानताओं और संरचनात्मक चुनौतियों को दूर करने के लिए लक्षित नीतिगत हस्तक्षेप आवश्यक हैं, ताकि भविष्य की वृद्धि न केवल तीव्र हो, बल्कि समानतापूर्ण और सतत भी हो।

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