प्रश्न की मुख्य माँग
- कल्याणकारी योजनाओं की सीमाओं का उल्लेख कीजिए।
- उत्तरदायी कारकों की चर्चा कीजिए।
- आगे की राह सुझाइए।
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उत्तर
2026 के एलपीजी संकट ने यह उजागर किया है कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत कल्याणकारी विस्तार ने पहुँच तो सुनिश्चित की, परंतु लचीलापन नहीं। इससे अधिकार, वितरण प्रणाली और बाहरी झटकों के दौरान कमजोर वर्गों की सुरक्षा में राज्य की क्षमता के बीच अंतर स्पष्ट होता है।
मुख्य भाग
कल्याणकारी योजनाओं की सीमाएँ
- पहुँच–उपयोग अंतर: बड़े स्तर पर कनेक्शन दिए गए, लेकिन उच्च पुनर्भरण (रीफिल) लागत के कारण गरीब परिवारों में निरंतर उपयोग संभव नहीं हो पाता है।
- उदाहरण: प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लगभग एक-चौथाई लाभार्थियों ने केवल एक बार या कोई पुनर्भरण नहीं कराया।
- बाजार पर निर्भरता: कल्याण वितरण वैश्विक एलपीजी आपूर्ति शृंखलाओं पर अत्यधिक निर्भर है, जिससे यह राज्य के नियंत्रण से बाहर बाहरी व्यवधानों के प्रति संवेदनशील हो जाता है।
- उदाहरण: 60% एलपीजी आयातित है, जिसमें से 90% होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है।
- कमजोर राज्य नियंत्रण: सार्वजनिक वितरण प्रणाली आधारित केरोसिन से एलपीजी की ओर परिवर्तन ने संकट के समय भौतिक आपूर्ति सुनिश्चित करने में राज्य की प्रत्यक्ष भूमिका को कम कर दिया है।
- असमान वितरण: सामाजिक और भौगोलिक असमानताएँ अंतिम स्तर तक पहुँच को प्रभावित करती हैं, जिससे कल्याण कवरेज के भीतर भी बहिष्करण होता है।
- उदाहरण: अनुसूचित जाति/जनजाति परिवारों को वितरक पक्षपात के कारण 10–30% कम एलपीजी पहुँच मिलती है।
- लैंगिक बोझ: महिलाएँ नाममात्र की लाभार्थी हैं, परंतु वह वहन क्षमता और आपूर्ति पर नियंत्रण नहीं रखतीं, जिससे वैकल्पिक साधनों का बोझ उन्हीं पर आता है।
- उदाहरण: कीमत बढ़ने पर 14% परिवार पुनः बायोमास पर निर्भर हो गए।
उत्तरदायी कारक
- डिजाइन पर केंद्रित दृष्टिकोण: कल्याणकारी योजनाओं ने कवरेज बढ़ाने पर अधिक ध्यान दिया, जबकि संकट की स्थितियों में निरंतरता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने पर पर्याप्त जोर नहीं दिया गया।
- अपर्याप्त भंडारण व्यवस्था: एलपीजी के लिए रणनीतिक भंडार का अभाव आपूर्ति संकट के समय राज्य की प्रतिक्रिया क्षमता को सीमित करता है।
- उदाहरण: भारत के पास कच्चे तेल का लगभग 9.5 दिनों का भंडार है, परंतु एलपीजी का कोई समर्पित भंडार नहीं है।
- मूल्य संबंधी बाधाएँ: सब्सिडी व्यवस्था एलपीजी कीमतों में उतार-चढ़ाव से गरीब वर्गों को पर्याप्त सुरक्षा नहीं दे पाती।
- उदाहरण: मार्च 2026 में 60 रुपये प्रति सिलेंडर की वृद्धि से रीफिल की संख्या में कमी आई।
- अवसंरचना की कमी: ग्रामीण वितरण तंत्र की कमजोरी और लंबा बुकिंग अंतराल कमजोर वर्गों की पहुँच में देरी करता है।
- उदाहरण: ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 45 दिनों का बुकिंग अंतराल।
- नीतिगत असंगति: योजनाएँ राज्य की जवाबदेही का संकेत देती हैं, परंतु वास्तविक वितरण उन बाजार तंत्रों पर निर्भर है, जो राज्य के प्रत्यक्ष नियंत्रण में नहीं हैं।
आगे की राह
- रणनीतिक भंडार: वैश्विक आपूर्ति व्यवधानों के दौरान निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एलपीजी का लगभग दो माह का समर्पित भंडार बनाया जाए।
- आपूर्ति का विविधीकरण: एक ही भू-राजनीतिक मार्ग पर निर्भरता कम कर ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया जाए।
- लक्षित सब्सिडी: बेहतर डिजाइन की गई सब्सिडी के माध्यम से मूल्य वृद्धि के समय गरीब परिवारों के लिए वहनीयता सुनिश्चित की जाए।
- उदाहरण: कम आय वाले नियमित उपभोक्ताओं को अधिक सब्सिडी प्रदान करना।
- वैकल्पिक ऊर्जा: विकेंद्रीकृत स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देकर एलपीजी आपूर्ति पर निर्भरता कम की जाए।
- उदाहरण: गोबरधन जैव-गैस संयंत्रों का विस्तार।
- संकट प्रबंधन तंत्र: आपूर्ति संकट के समय कमजोर वर्गों को प्राथमिकता देने के लिए संस्थागत आपातकालीन ढाँचा विकसित किया जाए।
- उदाहरण: सार्वजनिक आवंटन नियम और प्राथमिकता आधारित वितरण प्रणाली।
निष्कर्ष
कल्याणकारी योजनाओं को केवल पहुँच तक सीमित न रहकर लचीलापन सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि संकट के समय भी अधिकार प्रभावी बने रहें। एक सुदृढ़ व्यवस्था तभी संभव है, जब राज्य की जवाबदेही और वितरण क्षमता के बीच समन्वय स्थापित हो, जिससे कमजोर वर्गों के लिए गरिमा तथा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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