संक्षिप्त समाचार

20 Mar 2026

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वीबी-जी राम जी यूथ डिजिटल कैंपेन 

भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने ‘माय भारत (MY Bharat)’ पोर्टल के सहयोग से राष्ट्रव्यापी ‘वीबी-जी राम जी यूथ डिजिटल अभियान (VB-G Ram G Youth Digital Campaign)’ प्रारंभ किया है।

‘वीबी-जी राम जी यूथ डिजिटल अभियान’ के बारे में

  • उद्देश्य
    • ग्रामीण युवाओं की विकास गतिविधियों में भागीदारी को प्रोत्साहित करना।
    • युवाओं की ऊर्जा और रचनात्मकता को ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और स्थानीय आजीविका पहलों की दिशा में उपयोग करना।
  • भागीदारी: 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के सभी इच्छुक युवा ‘माय भारत’ या ‘MyGov’ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं।
  • एक लोगो डिजाइन प्रतियोगिता की घोषणा की गई है, जिसमें विजेता को ₹50,000 का नकद पुरस्कार तथा मान्यता प्रदान की जाएगी।

साउथ पार्स एवं रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी 

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इजरायल द्वारा साउथ पार्स (South Pars) पर किए गए हमले और ईरान द्वारा रास लाफान (Ras Laffan) पर किए गए प्रतिशोधी हमले ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है तथा वैश्विक ऊर्जा संकट को और गंभीर बना दिया है।

ऊर्जा संकट के प्रमुख बिंदु

  • ऊर्जा अवसंरचना का सैन्यीकरण: तेल और गैस सुविधाओं (ईरान, कतर, खाड़ी देशों) पर हमले यह दर्शाते हैं कि ऊर्जा परिसंपत्तियाँ रणनीतिक सैन्य लक्ष्य बनती जा रही हैं।
    • तनाव में वृद्धि से वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में लंबे समय तक व्यवधान का जोखिम बढ़ गया है।
  • वैश्विक बाजार में अस्थिरता: आपूर्ति की अनिश्चितता के कारण ब्रेंट क्रूड आयल (Brent crude oil) की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है।
    • हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास नाकाबंदी/अस्थिरता से वैश्विक तेल व्यापार के लगभग 20% हिस्से पर खतरा मंडरा रहा है।
  • दीर्घकालिक रणनीतिक प्रभाव:- देश ऊर्जा स्रोतों और आपूर्ति मार्गों के विविधीकरण की प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं।
    • नवीकरणीय ऊर्जा तथा रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों को सुदृढ़ करने के प्रयासों में तीव्रता आने की संभावना है।

साउथ पार्स के बारे में

  • परिचय: यह विश्व के सबसे विशाल प्राकृतिक गैस क्षेत्रों में से एक है, जो ईरान और कतर (नॉर्थ डोम) के बीच साझा किया गया है।
    • ईरान का इस क्षेत्र में हिस्सा लगभग 33 प्रतिशत है।
    • यह ईरान की प्राकृतिक गैस आवश्यकताओं का लगभग 80 प्रतिशत पूरा करता है।
  • स्थान: यह फारस की खाड़ी में, ईरान के दक्षिणी तट (बुशेहर प्रांत) के पास स्थित है।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • लगभग 1,800 ट्रिलियन घन फीट गैस तथा बड़े संघनित भंडार मौजूद हैं।
    • ईरान के गैस उत्पादन और ऊर्जा सुरक्षा में इसका प्रमुख योगदान है।
    • घरेलू खपत तथा निर्यात क्षमता के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी (Ras Laffan Industrial City) के बारे में

  • यह विश्व का सबसे बड़ा LNG निर्यात केंद्र है, जो कतर की ऊर्जा अर्थव्यवस्था का केंद्रीय आधार है।
  • स्थान: यह फारस की खाड़ी के किनारे कतर के उत्तर-पूर्वी तट पर स्थित है।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • यह नॉर्थ डोम गैस क्षेत्र (North Dome gas field) से LNG का प्रसंस्करण और निर्यात करता है।
    • यहाँ प्रमुख LNG टर्मिनल, रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल सुविधाएँ स्थित हैं।
    • एशिया और यूरोप के लिए वैश्विक LNG आपूर्ति शृंखलाओं का एक महत्त्वपूर्ण केंद्र है।

यह संकट दर्शाता है कि ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीति आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं, जिसका सीधा प्रभाव भारत की आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

योग 365 

आयुष मंत्रालय ने ‘योग 365 (Yoga 365)’ नामक पहल शुरू की है ताकि वार्षिक उत्सवों से आगे बढ़कर योग को दैनिक जीवनशैली अभ्यास के रूप में बढ़ावा दिया जा सके।

योग 365 के बारे में

  • यह अभियान नई दिल्ली में योग महोत्सव–2026 के दौरान प्रस्तुत किया गया।
  • उद्देश्य: इसका उद्देश्य योग के प्रति उच्च जागरूकता और कम नियमित अभ्यास के बीच की खाई को पाटना है, जिसके लिए निरंतर दैनिक भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाता है।
  • स्वास्थ्य देखभाल: यह पहल योग को शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्पष्टता और भावनात्मक कल्याण के साधन के रूप में बढ़ावा देती है, जो निवारक स्वास्थ्य देखभाल के लक्ष्यों के अनुरूप है।
  • डिजिटल पहुँच: इसमें एमडीएनआईवाई (MDNIY) और वेलनेस प्लेटफॉर्म हैबिल्ड (Habuild) के सहयोग से निःशुल्क दैनिक ऑनलाइन योग सत्रों जैसे डिजिटल माध्यम शामिल हैं।
  • अंब्रेला कार्यक्रम: यह एक समग्र अभियान के रूप में कार्य करता है, जो कई पहलों को एकीकृत करता है, जैसे:
    • कॉमन योगा प्रोटोकॉल (CYP)
    • वाई-ब्रेक [Y-Break] (कार्यस्थल योग)
    • रोगों के लिए चिकित्सीय योग
  • योग महोत्सव–2026: यह आयुष मंत्रालय द्वारा आयोजित एक प्रमुख कार्यक्रम है, जो अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (IDY) 2026 के 100 दिन पूर्व आरंभ होने वाले काउंटडाउन को दर्शाता है।

 अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

  • संयुक्त राष्ट्र की मान्यता: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस प्रतिवर्ष 21 जून को मनाया जाता है, जिसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2014 में भारत के प्रस्ताव के बाद घोषित किया गया।
  • पहला आयोजन: पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस वर्ष 2015 में मनाया गया, जिसमें भारत के नेतृत्व में वैश्विक स्तर पर व्यापक भागीदारी देखी गई।
  • तिथि का महत्त्व: 21 जून ग्रीष्म संक्रांति को दर्शाता है, जो उत्तरी गोलार्द्ध का सबसे लंबा दिन होता है।

सेमाग्लूटाइड दवा (Semaglutide Drug)

भारत में सेमाग्लूटाइड दवा (Semaglutide drug) के पेटेंट की समाप्ति से सस्ती जेनेरिक वजन घटाने वाली दवाओं के प्रवेश का मार्ग खुल गया है, जिससे बढ़ते मोटापा और मधुमेह के बोझ के बीच इसकी उपलब्धता में सुधार हुआ है।

सेमाग्लूटाइड के बारे में

  • सेमाग्लूटाइड एक जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट है, जो रक्त शर्करा और भूख को नियंत्रित करने वाले प्राकृतिक हार्मोन की नकल करता है।
  • विकसितकर्ता: इसे मूल रूप से नोवो नॉर्डिस्क (Novo Nordisk) द्वारा विकसित किया गया और ओजेम्पिक [Ozempic] (मधुमेह के लिए) तथा वेगोवी [Wegovy] (मोटापे के लिए) के रूप में विपणन किया गया।
  • प्राथमिक उपयोग: यह टाइप-2 मधुमेह के प्रबंधन में उपयोगी है, क्योंकि यह इंसुलिन स्राव को बढ़ाता है तथा रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है।
  • वजन घटाने में भूमिका: यह भूख को कम करने और पेट खाली होने की प्रक्रिया को धीमा करने में सहायता करता है, जिससे वजन घटता है।
  • उपयोग की विधि: इसे सामान्यतः सप्ताह में एक बार इंजेक्शन (पेन डिवाइस) के रूप में दिया जाता है।

जीएलपी-1 (GLP-1) दवाएँ क्या हैं?

  • जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट ऐसी दवाएँ हैं, जो रक्त शर्करा और भूख को नियंत्रित करके टाइप-2 मधुमेह और मोटापे के उपचार में उपयोग की जाती हैं।
  • कार्यप्रणाली: ये ग्लूकागन-जैसे पेप्टाइड-1 हार्मोन का अनुकरण करती हैं, जो इंसुलिन स्राव को बढ़ाने, पाचन प्रक्रिया को धीमा करने और भूख को कम करने में सहायक होता है।
  • उदाहरण: जीएलपी-1 वर्ग की दवाओं में सेमाग्लूटाइड (Semaglutide) और टिरजेपाटाइड (Tirzepatide) प्रमुख उदाहरण हैं, जिन्हें क्रमशः ओजेम्पिक (Ozempic) और माउंजारो (Mounjaro) नाम से बाजार में बेचा जाता है।

दवाओं के लिए पेटेंट नियम

  • पेटेंट अवधि: औषधीय पेटेंट पेटेंट अधिनियम, 1970 के तहत दाखिल करने की तिथि से 20 वर्षों के लिए प्रदान किए जाते हैं।
  • जेनेरिक दवाएँ: पेटेंट समाप्त होने के बाद अन्य कंपनियाँ इसके जेनेरिक संस्करणों का निर्माण और बिक्री कर सकती हैं, जिससे प्रतिस्पर्द्धा बढ़ती है और कीमतें कम होती हैं।
  • एवरग्रीनिंग पर प्रतिबंध: भारत में मामूली संशोधनों पर नए पेटेंट देने पर प्रतिबंध है, जिससे दवाओं की “एवरग्रीनिंग (Evergreening)” को रोका जाता है।
    • एवरग्रीनिंग वह प्रक्रिया है, जिसमें औषधि कंपनियाँ किसी मौजूदा दवा में मामूली परिवर्तन करके बिना उपचारात्मक प्रभाव में उल्लेखनीय सुधार किए पेटेंट अवधि बढ़ाने का प्रयास करती हैं।
  • अनिवार्य लाइसेंसिंग प्रावधान: सरकार सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों या अत्यधिक कीमतों के मामलों में बिना पेटेंट धारक की अनुमति के अन्य कंपनियों को पेटेंटेड दवा का उत्पादन करने की अनुमति दे सकती है।

नेशनल डिफेंस इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव 2026

भारत ने बढ़ते भू-राजनीतिक संघर्षों के मध्य नेशनल डिफेंस इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव 2026 (National Defence Industries Conclave 2026) में वैश्विक ड्रोन विनिर्माण केंद्र बनने पर जोर दिया।

नेशनल डिफेंस इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव 2026 के बारे में

  • यह आत्मनिर्भर भारत के अनुरूप स्वदेशी रक्षा विनिर्माण, नवाचार और उद्योग एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर का मंच है।
  • आयोजक: रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित।
  • थीम: ‘एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजीज (Advanced Manufacturing Technologies)’।
  • उद्देश्य
    • सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), स्टार्ट-अप्स, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (DPSUs), सशस्त्र बलों और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को बढ़ावा देकर भारत के रक्षा औद्योगिक पारितंत्र को सुदृढ़ करना।
    • नवाचार-आधारित रक्षा उत्पादन को गति देना तथा निर्यात क्षमता को बढ़ाना।
  • मुख्य लक्षित क्षेत्र
    • ड्रोन पारितंत्र: कॉन्क्लेव रणनीतिक स्वायत्तता और भविष्य के युद्ध की तैयारी सुनिश्चित करने के लिए एंड-टू-एंड स्वदेशी ड्रोन विनिर्माण पर जोर देता है।
    • नवाचार प्रोत्साहन: इनोवेशन्स फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (iDEX) ढाँचे का विस्तार डिफेंस इंडिया स्टार्ट-अप चैलेंज (DISC-14) और एसिंग डेवलपमेंट ऑफ इनोवेटिव टेक्नोलॉजीज विद iDEX (ADITI 4.0) के माध्यम से किया गया है।
    • एमएसएमई एकीकरण: एमएसएमई को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और एडिटिव (additive) मैन्युफैक्चरिंग को क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर एकीकरण के साथ अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
    • उन्नत प्रौद्योगिकी: डिजिटल ट्विन्स, सिमुलेशन टूल्स और स्मार्ट मैटेरियल्स को अपनाने को बढ़ावा दिया जाता है, जिससे दक्षता और डिजाइन क्षमताओं में वृद्धि हो।
    • नीतिगत समर्थन: सरकारी सुधार, डिजिटल प्लेटफॉर्म और वित्तपोषण का उद्देश्य रक्षा निर्यात को बढ़ावा देना और भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

यह कॉन्क्लेव आयात निर्भरता से नवाचार-आधारित आत्मनिर्भरता की ओर परिवर्तन को रेखांकित करता है, जो भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण है।

एडॉप्ट ए हेरिटेज (AAH) 2.0 कार्यक्रम

भारत सरकार ने संरक्षित स्मारकों पर आगंतुक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की भागीदारी के माध्यम से संशोधित ‘एडॉप्ट ए हेरिटेज (AAH) 2.0’ कार्यक्रम शुरू किया।

एडॉप्ट ए हेरिटेज (AAH) 2.0 के बारे में

  • यह कार्यक्रम एक संरचित पहल है, जिसका उद्देश्य निजी/सार्वजनिक संस्थाओं को केंद्रीय रूप से संरक्षित स्मारकों पर आगंतुक सुविधाओं में सुधार हेतु शामिल करना है, साथ ही विरासत की अखंडता को बनाए रखना है।
  • प्रथम चरण: “एडॉप्ट ए हेरिटेज: अपनी धरोहर, अपनी पहचान (Adopt a Heritage: Apni Dharohar, Apni Pehchaan)” कार्यक्रम वर्ष 2017 में (1.0) शुरू किया गया था।
  • नोडल मंत्रालय: यह संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत लागू किया जाता है, जिसका क्रियान्वयन और निगरानी भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा किया जाता है।
  • उद्देश्य: इसका उद्देश्य बुनियादी और उन्नत सुविधाएँ प्रदान करके पर्यटन अनुभव को बेहतर बनाना तथा स्मारकों को पर्यटक-अनुकूल बनाना है।
  • कार्यान्वयन
    • निजी संस्थाएँ, गैर-सरकारी संगठन (NGOs) और ट्रस्ट समझौता ज्ञापन (MoU) के माध्यम से स्मारकों को अपनाकर स्वच्छता, सुविधाएँ और डिजिटल अनुभव जैसी गैर-संरक्षण सेवाएँ प्रदान कर सकते हैं।
    • मुख्य संरक्षण और पुनर्स्थापन कार्य केवल भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI) के विशेषज्ञों के अधीन ही रहता है, जिससे वैज्ञानिक संरक्षण सुनिश्चित होता है।
    • दाता राष्ट्रीय संस्कृति कोष (NCF) के माध्यम से योगदान कर सकते हैं और विशिष्ट परियोजनाओं का सुझाव दे सकते हैं।

महत्त्व

  • यह विरासत प्रबंधन में संरक्षण से समझौता किए बिना सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को बढ़ावा देता है।
  • यह पर्यटन अवसंरचना और पहुँच में सुधार करता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को बढ़ावा मिलता है।
  • यह विरासत भ्रमण और प्रदर्शनी जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता को प्रोत्साहित करता है।
  • यह विरासत संरक्षण और सतत् पर्यटन विकास के बीच संतुलन स्थापित करता है।

एडॉप्ट ए हेरिटेज (AAH) 2.0 एक संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें सुविधाओं का विकास विकेंद्रीकृत किया गया है, जबकि विरासत संरक्षण राज्य के नियंत्रण में रहता है, जिससे संरक्षण और उपयोगिता दोनों सुनिश्चित होते हैं।

बनाना क्लस्टर

भारत सरकार ने बागवानी क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने, मूल्य संवर्द्धन को प्रोत्साहित करने तथा किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से महाराष्ट्र के जलगाँव में ₹200 करोड़ की लागत से बनाना क्लस्टर (Banana Cluster) को स्वीकृति प्रदान की।

बनाना क्लस्टर पहल के बारे में

  • बनाना क्लस्टर एक क्लस्टर-आधारित कृषि विकास परियोजना है, जिसका उद्देश्य केले के उत्पादन, प्रसंस्करण और निर्यात को सुदृढ़ करना है।
  • वित्तपोषण: यह परियोजना ₹200 करोड़ की लागत के साथ स्वीकृत की गई है, जिसे एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) और कृषि अवसंरचना कोष (AIF) जैसी योजनाओं के तहत समर्थन प्राप्त है।
  • अवसंरचना: इसमें कोल्ड स्टोरेज, रिपनिंग चैंबर, रेफ्रिजरेटेड परिवहन, प्रसंस्करण इकाइयाँ और निर्यात अवसंरचना जैसी सुविधाएँ शामिल हैं।
  • उद्देश्य: मूल्य संवर्द्धन को बढ़ाना, कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना तथा बेहतर बाजार संपर्क के माध्यम से किसानों की आय में सुधार करना।

केले के बारे में

  • केला एक उष्णकटिबंधीय फलदार फसल और मुख्य खाद्य है, जिसे इसके पोषण मूल्य और वर्षभर उपलब्धता के कारण विश्वभर में व्यापक रूप से उपभोग किया जाता है।
  • केले की खेती के लिए उपयुक्त परिस्थितियाँ: इसके लिए गर्म जलवायु (20–30°C), अधिक आर्द्रता, अच्छी जल निकासी वाली उपजाऊ मिट्टी तथा पर्याप्त सिंचाई की आवश्यकता होती है।
    • टिशू कल्चर से तैयार पौधों और आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग से केले की उपज में वृद्धि होती है तथा उसकी गुणवत्ता भी बेहतर होती है।
  • वैश्विक उत्पादक: भारत विश्व का सबसे बड़ा उत्पादक है (लगभग 19% वैश्विक हिस्सेदारी), इसके बाद चीन, इंडोनेशिया, ब्राजील और इक्वाडोर का स्थान है।
  • भारत परिदृश्य: प्रमुख उत्पादक राज्यों में आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात शामिल हैं।
    • गुजरात में उन्नत कृषि पद्धतियों के कारण सर्वाधिक उत्पादकता (लगभग 65.91 टन/हेक्टेयर) पाई जाती है।

यह बनाना क्लस्टर मूल्य-शृंखला आधारित कृषि की ओर परिवर्तन को दर्शाता है, जिसमें उत्पादकता, अवसंरचना और निर्यात प्रतिस्पर्द्धा पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

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