संदर्भ
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भारत के तीव्र गति से बढ़ते डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम को सुदृढ़ और विस्तारित करने हेतु ‘ पेमेंट्स विजन, 2028 (Payments Vision 2028)’ की घोषणा की।
पेमेंट्स विजन, 2028 के बारे में
- यह दिसंबर 2028 तक लागू की जाने वाली 15 महत्त्वपूर्ण पहलों के साथ एक रणनीतिक रोडमैप है।
- थीम: ‘शेपिंग इंडियाज पेमेंट फ्रंटियर’ (Shaping India’s Payment Frontier)।
- फोकस क्षेत्र: उपयोगकर्ता सशक्तीकरण, धोखाधड़ी से सुरक्षा, सीमा-पार भुगतान ढाँचे की दक्षता में सुधार, तथा व्यवसाय सुगमता को बढ़ावा देना।
मुख्य विशेषताएँ
- साझा उत्तरदायित्व फ्रेमवर्क: RBI एक ऐसे ढाँचे की संभावना तलाश रहा है, जिसमें अनधिकृत डिजिटल भुगतान लेन-देन से उत्पन्न देयता को ग्राहक के बैंक और लाभार्थी के बैंक द्वारा संयुक्त रूप से वहन किया जाएगा।
- लाभ: इससे दोनों पक्ष मजबूत धोखाधड़ी पहचान और रोकथाम उपाय लागू करने के लिए प्रेरित होंगे तथा समय पर हस्तक्षेप हेतु समन्वय सुदृढ़ होगा।
- ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम्स (TReDS): भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) सभी TReDS प्लेटफॉर्म्स के मध्य पूर्ण इंटरऑपरेबिलिटी का प्रस्ताव करता है, साथ ही ‘फैक्टरिंग विद रिकॉर्स’ को शामिल करने और निर्यात एमएसएमई की प्राप्तियों (Receivables) को जोड़ने की बात करता है, ताकि एमएसएमई के लिए अधिक एकीकृत, कुशल और प्रतिस्पर्द्धी प्राप्ति छूट इकोसिस्टम विकसित किया जा सके।
- इलेक्ट्रॉनिक चेक: चेक के डिजाइन और सुरक्षा विशेषताओं की व्यापक समीक्षा की जाएगी ताकि एकरूपता में वृद्धि, धोखाधड़ी की रोकथाम मजबूत हो और उभरती प्रक्रियाओं के अनुरूप बनाया जा सके।
- पेमेंट्स स्विचिंग सर्विस (PaSS): यह ग्राहकों को बैंक खाते बदलते समय भुगतान निर्देशों को सहजता से स्थानांतरित करने की सुविधा देता है, जिससे असुविधा कम होती है और ग्राहक सुविधा बढ़ती है।
- उन्नत उपयोगकर्ता नियंत्रण: सभी डिजिटल भुगतान माध्यमों (जैसे- UPI, IMPS) के लिए ऑन/ऑफ सुविधा का प्रस्ताव है, जिससे धोखाधड़ी को कम किया जा सके और सुरक्षा बढ़ाई जा सके।
- साइबर लचीलापन और निगरानी: गैर-बैंक भुगतान प्रणाली संचालकों के लिए साइबर की रिस्क इंडिकेटर्स (KRI) फ्रेमवर्क लागू किया जाएगा, जिससे निरंतर निगरानी और जोखिम के प्रारंभिक संकेत मिल सकें।
- सीमा-पार भुगतान पर जोर: सीमा-पार भुगतान प्रणाली की व्यापक समीक्षा की जाएगी ताकि नियामकीय और परिचालन बाधाओं की पहचान कर दक्षता बढ़ाई जा सके।
- RBI लेन-देन लागत, गति और वैश्विक विकास पर नियमित रिपोर्ट भी प्रकाशित करेगा।
- नियामकीय प्रक्रियाओं में सरलता के लिए भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम तथा फेमा (FEMA) के अंतर्गत सिंगल-विंडो अनुमोदन तंत्र पर विचार किया जा रहा है।
- नवाचार और प्रतिस्पर्द्धा को प्रोत्साहन: स्मॉल पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर्स (SPSPs) को स्थायी नियामकीय सैंडबॉक्स के तहत मान्यता देने का प्रस्ताव है।
- ओपन और इंटरऑपरेबल कार्ड भुगतान प्रणाली विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा, जिसमें टोकनाइजेशन, ऑर्केस्ट्रेशन और पारदर्शी मूल्य निर्धारण पर जोर होगा।
- डेटा, AI और अनुसंधान आधारित इकोसिस्टम
- एक एकीकृत, AI-सक्षम भुगतान डेटा रिपॉजिटरी बनाने का प्रस्ताव है।
- अनुसंधान और प्रशिक्षण क्षमता को सुदृढ़ किया जाएगा तथा घरेलू और वैश्विक भागीदारों के साथ सहयोग बढ़ाया जाएगा।
- नियामकीय विस्तार और पहचानकर्ता: जोखिम प्रबंधन और ट्रेसबिलिटी सुधारने हेतु एक समान घरेलू कानूनी इकाई पहचानकर्ता (DLEI) लागू करने की संभावना पर विचार किया जा रहा है।
महत्त्व
- वित्तीय नेतृत्व की ओर संक्रमण: यह वित्तीय समावेशन से आगे बढ़कर वैश्विक भुगतान नेतृत्व प्राप्त करने में सहायक है।
- डिजिटल अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना: यह फिनटेक इकोसिस्टम में नवाचार और विस्तार को बढ़ावा देता है।
- विश्वास और सुरक्षा में वृद्धि: सुरक्षित और लचीले ढाँचे के माध्यम से भुगतान प्रणाली में विश्वास और दक्षता बढ़ती है।
- MSMEs को समर्थन: यह MSMEs को बेहतर और विश्वसनीय डिजिटल भुगतान तंत्र के माध्यम से सशक्त बनाता है।
ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम्स (TReDS) के बारे में
ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम्स (TReDS) एक इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म है, जिसे RBI द्वारा MSMEs के व्यापारिक देयकों के वित्तपोषण को सुगम बनाने हेतु शुरू किया गया है।
TReDS प्लेटफॉर्म के उदाहरण
- रिसीवेबल्स एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (RXIL)
- एम1एक्सचेंज (M1xchange)
- इनवॉइसमार्ट (Invoicemart)।
मुख्य विशेषताएँ
- ऑनलाइन प्लेटफॉर्म: MSMEs को खरीदारों (कॉरपोरेट, PSU, सरकारी संस्थाएँ) के विरुद्ध किए गए चालान अपलोड करने की सुविधा देता है।
- नीलामी-आधारित वित्तपोषण: अनेक वित्तपोषणकर्ता (बैंक/NBFCs) इन चालानों को डिस्काउंट करने हेतु बोली लगाते हैं।
- बेहतर तरलता: MSMEs को भुगतान चक्र की प्रतीक्षा किए बिना शीघ्र धन प्राप्त होता है।
- कम वित्तपोषण लागत: प्रतिस्पर्द्धी बोली से बेहतर दरें सुनिश्चित होती हैं।
- क्रेडिट जोखिम में कमी: वित्तपोषण MSME के बजाय खरीदार की साख पर आधारित होता है।
प्रतिभागी
- MSME विक्रेता
- खरीदार (कॉरपोरेट, PSU, सरकारी विभाग)
- वित्तपोषणकर्ता (बैंक और NBFCs)।
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