संदर्भ
हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट में, फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने रेखांकित किया है कि भारत ने ऑफशोर वर्चुअल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स (oVASPs) के खिलाफ कार्रवाई की है।
संबंधित तथ्य
- ‘ऑफ-शोर वर्चुअल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स के जोखिमों को समझना और कम करना’ (Understanding and Mitigating the Risks of Offshore Virtual Asset Service Providers) पर मार्च 2026 की रिपोर्ट में भारत के नियामक दायरे (Regulatory perimeter), प्रवर्तन कार्रवाइयों (Enforcement actions) और पहचान उपकरणों (Detection tools) पर चर्चा की गई है।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
- वर्चुअल एसेट लैब की स्थापना: भारत एक “वर्चुअल एसेट लैब” स्थापित कर रहा है, जो एनालिटिक्स, ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) और स्वचालित वेब निगरानी का उपयोग करके अपंजीकृत और उच्च जोखिम वाले क्रिप्टो प्लेटफॉर्मों का पता लगाएगी।
- डिजिटल प्रवर्तन के लिए ‘सहयोग पोर्टल’ का शुभारंभ: गृह मंत्रालय ने ‘सहयोग पोर्टल’ लॉन्च किया है ताकि सोशल मीडिया मध्यस्थों के साथ समन्वय बढ़ाया जा सके। यह पोर्टल विभिन्न प्लेटफॉर्मों, वेब होस्ट और सेवा प्रदाताओं पर अवैध सामग्री को स्वचालित और सुव्यवस्थित तरीके से हटाने (Takedown) में सक्षम बनाता है।
- वर्चुअल एसेट जोखिमों पर अंतर-एजेंसी समन्वय: वित्त मंत्रालय के तहत राजस्व विभाग ने वर्चुअल एसेट संपर्क उप-समूह (जुलाई 2023) का गठन किया है। यह प्रवर्तन, खुफिया और नियामक एजेंसियों के बीच समन्वय की सुविधा प्रदान करता है, जिससे उभरते जोखिमों से निपटने के लिए रुझानों और रणनीतियों को साझा किया जा सके।
- ऑफशोर साइबर अपराध की जांच: NIA, CBI और ED जैसी एजेंसियाँ म्याँमार-थाईलैंड सीमा, कंबोडिया और लाओस जैसे क्षेत्रों में स्थित ‘ऑफशोर स्कैम कंपाउंड्स’ की जाँच कर रही हैं, जहाँ तस्करी कर ले जाए गए भारतीयों को साइबर अपराध करने के लिए मजबूर किया गया था।
- oVASPs (ऑफशोर वर्चुअल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स) के विरुद्ध सहयोगी ढाँचा: भारतीय वित्तीय खुफिया इकाई (FIU-India) ने वर्चुअल एसेट सेवा प्रदाताओं, बैंकों और भुगतान मध्यस्थों के साथ एक समर्पित कार्य समूह बनाया है। इसका उद्देश्य भारतीय उपयोगकर्ताओं को लक्षित करने वाले ऑफशोर प्लेटफॉर्म्स का पता लगाने के लिए ‘रेड-फ्लैग’ (संदेह के संकेत) और रणनीतियाँ विकसित करना है।
- भारत-स्थित प्रधान अधिकारियों (Principal Officers) की अनिवार्य नियुक्ति: FIU-India ने सभी VASPs के लिए भारत में स्थित प्रधान अधिकारियों (POs) की नियुक्ति अनिवार्य कर दी है। ये अधिकारी नियामक संपर्क, लेन-देन की निगरानी, संदिग्ध लेन-देन रिपोर्ट (STR) दाखिल करने और PMLA (धन शोधन निवारण अधिनियम) का पालन सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार हैं।
- ऑफशोर प्लेटफॉर्म्स पर क्रिप्टो ट्रेडिंग का स्थानांतरण: विश्लेषण से पता चलता है कि भारत के वर्ष 2022 के वर्चुअल एसेट टैक्स शासन (Tax regime) के बाद, ट्रेडिंग गतिविधियों का एक बड़ा हिस्सा घरेलू प्लेटफॉर्म्स से हटकर विदेशी अपंजीकृत प्लेटफॉर्म्स (offshore unregistered VASPs) पर स्थानांतरित हो गया है।
वर्चुअल एसेट सर्विस प्रोवाइडर के बारे में
- फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के अनुसार, वर्चुअल एसेट सर्विस प्रोवाइडर (VASP) को एक ऐसे व्यवसाय के रूप में परिभाषित किया गया है, जो अपने ग्राहकों की ओर से निम्नलिखित में से एक या अधिक गतिविधियाँ संचालित करता है:
- आभासी परिसंपत्तियों और फिएट मुद्राओं के बीच विनिमय
- एक या अधिक प्रकार की आभासी परिसंपत्तियों के बीच विनिमय
- आभासी परिसंपत्तियों का हस्तांतरण
- आभासी परिसंपत्तियों या आभासी परिसंपत्तियों पर नियंत्रण सक्षम करने वाले उपकरणों की सुरक्षा और/या प्रबंधन
- जारीकर्ता द्वारा आभासी परिसंपत्ति की पेशकश और/या बिक्री से संबंधित वित्तीय सेवाओं में भाग लेना और उनका प्रावधान करना।
- इस परिभाषा में क्रिप्टो व्यवसायों की एक विस्तृत शृंखला शामिल है, जिसमें एक्सचेंज, एटीएम ऑपरेटर, वॉलेट संरक्षक और हेज फंड शामिल हैं।
|
ऑफशोर वर्चुअल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स (Offshore Virtual Asset Service Providers- oVASPs) के बारे में
- ऑफशोर वर्चुअल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स (oVASPs) वे संस्थाएँ हैं, जो किसी देश के नियामक ढाँचे से बाहर के अधिकार क्षेत्र से वर्चुअल एसेट से संबंधित सेवाएँ प्रदान करती हैं।
- वे क्रिप्टोकरेंसी, टोकन और एनएफटी जैसी वर्चुअल/डिजिटल संपत्तियों का लेन-देन करती हैं।
- ये संस्थाएँ भारतीय रिजर्व बैंक या भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड जैसे घरेलू नियामकों के प्रत्यक्ष कानूनी और पर्यवेक्षी नियंत्रण से बाहर कार्य करती हैं।
मुख्य विशेषताएँ
- क्षेत्राधिकार संबंधी मध्यस्थता: ऑफशोर वर्चुअल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स (oVASPs) ऐसे क्षेत्राधिकारों से संचालित होते हैं, जहाँ नियामक ढाँचे शिथिल या कमजोर होते हैं, जिससे वे सख्त अनुपालन आवश्यकताओं से बच जाते हैं।
- पंजीकरण का अभाव: oVASPs अक्सर घरेलू नियामक प्राधिकरणों के साथ पंजीकृत नहीं होते हैं, जिससे वे राष्ट्रीय नियामकों के प्रत्यक्ष पर्यवेक्षी नियंत्रण से बाहर रहते हैं।
- सीमा पार प्रकृति: वे डिजिटल और ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों के माध्यम से कार्य करते हैं, जिससे वे भौतिक उपस्थिति के बिना कई देशों में निर्बाध रूप से सेवाएँ प्रदान कर सकते हैं।
- अनामता और छद्मनाम: oVASPs के माध्यम से किए गए लेन-देन में अक्सर प्रभावी ‘नो योर कस्टमर’ (KYC) तंत्र का अभाव होता है, जिससे उपयोगकर्ताओं की अनामता या छद्मनामता बनी रहती है।
- नियामक नियमों से बचना: oVASPs में मनी लॉण्ड्रिंग विरोधी (AML) और आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करने (CFT) संबंधी नियमों को दरकिनार करने की क्षमता होती है, जिससे वित्तीय अखंडता और सुरक्षा के लिए जोखिम उत्पन्न होता है।
चुनौतियाँ
- वित्तीय अखंडता के जोखिम (Financial Integrity Risks): विदेशी वर्चुअल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स (oVASPs) कमजोर नियामक निरीक्षण (Regulatory oversight) के कारण मनी लॉण्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण को बढ़ावा दे सकते हैं।
- लेन-देन की छद्म नाम (Pseudonymous) प्रकृति अधिकारियों के लिए संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों का पता लगाना और उनकी निगरानी करना कठिन बना देती है।
उपभोक्ता संरक्षण के मुद्दे (Consumer Protection Issues): oVASPs का उपयोग करने वाले उपयोगकर्ताओं के पास धोखाधड़ी, हैकिंग या प्लेटफॉर्म के दिवालिया होने के मामलों में अक्सर कोई कानूनी विकल्प नहीं होता है, क्योंकि ये संस्थाएँ घरेलू अधिकार क्षेत्र से बाहर काम करती हैं।
- निवेशक उच्च मूल्य अस्थिरता (Price volatility), भ्रामक योजनाओं और धोखाधड़ी वाली गतिविधियों के संपर्क में रहते हैं, जिससे वित्तीय जोखिम बढ़ जाते हैं।
- पूँजी का पलायन और कर चोरी (Capital Flight and Tax Evasion): oVASPs धन के अनियंत्रित सीमा-पार हस्तांतरण को सक्षम बनाते हैं, जिससे घरेलू अर्थव्यवस्थाओं से पूँजी का पलायन (Capital flight) होता है।
- उनका संचालन, कर अनुपालन (Tax compliance) में कमी और सरकारी राजस्व की हानि में योगदान देता है।
- राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताएँ (National Security Concerns): oVASPs का दुरुपयोग अवैध व्यापार, डार्कनेट लेन-देन और अन्य अवैध गतिविधियों के लिए किया जा सकता है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करते हैं।
आगे की राह
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग (International Cooperation): वर्चुअल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स के समन्वित नियमन को सुनिश्चित करने के लिए ‘फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स’ (FATF) और G20 जैसे बहुपक्षीय ढाँचे के माध्यम से वैश्विक सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता है।
- नियामक सामंजस्य (Regulatory Harmonisation): देशों को वर्चुअल एसेट्स के नियमन के लिए समान और सामंजस्यपूर्ण वैश्विक मानक विकसित करने की दिशा में काम करना चाहिए, ताकि नियामक अंतर (Regulatory arbitrage) को कम किया जा सके और विदेशी प्लेटफॉर्म्स के दुरुपयोग को रोका जा सके।
- घरेलू कानूनों का सुदृढ़ीकरण (Strengthening Domestic Laws): भारतीय उपयोगकर्ताओं को सेवा प्रदान करने वाली विदेशी संस्थाओं पर अधिकार क्षेत्र का विस्तार करने के लिए घरेलू कानूनी ढाँचे को मजबूत किया जाना चाहिए, जिससे राष्ट्रीय नियमों के साथ उनकी जवाबदेही और अनुपालन सुनिश्चित हो सके।
- तकनीकी समाधान (Technological Solutions): वर्चुअल एसेट लेन-देन की ट्रैकिंग को बेहतर बनाने और संदिग्ध गतिविधियों का प्रभावी ढंग से पता लगाने के लिए अधिकारियों को उन्नत ब्लॉकचेन एनालिटिक्स और निगरानी उपकरणों को अपनाना चाहिए।