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जब राजधानियाँ डूबती हैं: वैश्विक जल संकट और शहरों का पतन

Lokesh Pal February 10, 2026 05:30 7 0

संदर्भ:

तेज़ शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन, और भूजल के अत्यधिक दोहन के कारण विश्व और भारत के प्रमुख शहर गंभीर शहरी जल संकट की ओर बढ़ रहे हैं।

  •  उभरता हुआ खतरा केवल जल की कमी नहीं है, बल्कि जल प्रणालियों के विफल होने पर संपूर्ण शहरी तंत्र के ध्वस्त हो जाने का है।

ज़ीरो डे के बारे में

  • अवधारणा: “ज़ीरो डे” शब्द दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन जल संकट के बाद विख्यात हुआ था।
  • परिभाषा: यह वह विशेष दिन है जब शहर में नलों से जल आना बंद हो जाता है।
  • नवीन वास्तविकता: ज़ीरो डे अब दूर की आशंका नहीं, बल्कि कई वैश्विक राजधानियों और बड़े शहरों में उभरती हुई सच्चाई बन चुकी है।

शहरी जल पतन के वैश्विक उदाहरण

  • तेहरान – एक विवश राजधानी
    • संकट: ईरान की राजधानी तेहरान अत्यधिक जल तनाव का सामना कर रही है।
    • अनिवार्य स्थानांतरण: ईरानी राष्ट्रपति ने कहा है कि राजधानी को स्थानांतरित करना अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन गया है।
    • जलवायु परिवर्तन संबंधी कारण: तेहरान अल्बोर्ज पर्वतों से प्राप्त हिमपात और ग्लेशियरों के पिघले जल पर निर्भर करता है। वैश्विक तापवृद्धि के कारण हिमपात कम हुआ है और ग्लेशियर अनियमित एवं तेज़ी से पिघल रहे हैं, जिससे प्राकृतिक जल चक्र बाधित हो रहा है।
    • भूमि धंसाव: जैसे-जैसे भूजल समाप्त होता है, भूमि खोखली होती जाती है, जिससे भूमि धंसती है और इमारतों में दरारें पड़ती हैं; इस प्रक्रिया को भूमि धंसाव (Land Subsidence) कहा जाता है।
    • बैंड-एड” समाधान: स्मार्ट मीटर और जल के दबाव में कमी जैसे उपायों को “कैंसर के ट्यूमर पर पट्टी लगाने” के समान बताया गया है।
  • जकार्ता – एक डूबता हुआ शहर
    • स्थानांतरण जारी: इंडोनेशिया अपनी राजधानी को नुसंतरा स्थानांतरित कर रहा है।
    • भूजल पर निर्भरता: जकार्ता की केवल 40% आबादी को पाइप जल उपलब्ध है, जबकि 60% लोग भूजल पर निर्भर हैं।
    • तीव्र धंसाव: अत्यधिक भूजल दोहन और समुद्र-स्तर वृद्धि के कारण जकार्ता प्रत्येक वर्ष लगभग 15 सेमी धंस रहा है; कुछ क्षेत्रों में यह 28 सेमी तक है।
    • समय सीमा: अनुमान है कि अगले 25 वर्षों में जकार्ता का बड़ा हिस्सा जलमग्न हो सकता है।

भारत में संकट

  • नीति आयोग की चेतावनी: नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, दिल्ली, चेन्नई और शिमला सहित 21 प्रमुख भारतीय शहर गंभीर जल तनाव का सामना कर रहे हैं।
  • चेन्नई में ज़ीरो डे (2019): 2019 में चेन्नई को लगभग ज़ीरो डे जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा, जब जल को ट्रेनों के माध्यम से शहर में लाया गया।
  • टैंकर माफिया” का उदय: दिल्ली जैसे शहरों में 24×7 जल आपूर्ति की विफलता के कारण टैंकर माफिया कई क्षेत्रों में जल वितरण को नियंत्रित कर रहे हैं।

दिल्ली और यमुना का प्रदूषण

  • अमोनिया समस्या: छठ पूजा जैसे त्योहारों के दौरान, यमुना अक्सर सफेद झाग से ढक जाती है, जो बिना उपचारित औद्योगिक अपशिष्ट और सीवेज से निकलने वाले अमोनिया के कारण होता है।
  • शोधन विफलता: उच्च अमोनिया स्तर के कारण आधुनिक जल शोधन संयंत्र भी जल को शुद्ध नहीं कर पाते, जिससे वह मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त हो जाता है।
  • अंतर-राज्यीय निर्भरता: दिल्ली अपने जल आपूर्ति का 90% हरियाणा और उत्तर प्रदेश से प्राप्त करती है, किसी भी सहयोग विफलता की स्थिति में राजधानी “प्यासी” हो सकती है।

पर्यावरणीय कारण – “द डेथ ऑफ स्प्रिंग (The Death of Spring)”

  • मौसमी असंतुलन: जलवायु परिवर्तन के कारण “द डेथ ऑफ स्प्रिंग(The Death of Spring)” हुई है, जिससे पारंपरिक मौसम अत्यधिक मौसम घटनाओं के कारण अस्पष्ट हो गए हैं।
  • ग्लेशियर का पिघलना: जैसे तेहरान अल्बोर्ज पर्वतों पर निर्भर है, वैसे ही भारत की बारहमासी नदियाँ, जैसे गंगा, यमुना और सतलुज, हिमालयी ग्लेशियरों पर निर्भर हैं, जो तेजी से पिघल रहे हैं, जबकि हिमपात घट रहा है।

वर्तमान निवारण उपाय और प्रौद्योगिकी

  • अटल भूजल योजना: यह योजना सामुदायिक भागीदारी पर केंद्रित है और नागरिकों को भूजल को साझा संसाधन के रूप में प्रबंधित करने के लिए “जल बजटिंग” सिखाती है।
  • पाइजोमीटर: यह तकनीक भूजल के दबाव और गहराई को वास्तविक समय में मापने के लिए उपयोग की जाती है, जिससे वैज्ञानिक प्रबंधन में सहायता मिलती है।
  • दक्षता संबंधी उपाय: कृषि में जल अपव्यय कम करने के लिए ड्रिप सिंचाई को बढ़ावा देना।
    • नदी जोड़ परियोजनाओं पर बल, जैसे कि केन–बेतवा परियोजना, हालाँकि इसके साथ पारिस्थितिक जोखिम जुड़े हुए हैं।

निष्कर्ष

तेहरान और जकार्ता के अनुभव यह स्पष्ट करते हैं कि यदि तत्काल, पारिस्थितिक और सुशासन-आधारित जल सुधार नहीं किए गए, तो भारतीय शहर अपरिवर्तनीय ज़ीरो डे की सीमा पार करने के जोखिम में खड़े हैं।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न: 

प्रश्न: तेहरान और जकार्ता के उदाहरणों का उल्लेख करते हुए भारतीय महानगरों में बढ़ते ‘ज़ीरो-डे’ जल संकट के खतरे पर चर्चा कीजिए। ऐसी स्थिति से बचने के लिए किन तात्कालिक नीतिगत हस्तक्षेपों की आवश्यकता है?

(15 अंक, 250 शब्द)

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