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फ्लोरोसेंट प्रोटीन्स

Lokesh Pal February 24, 2026 03:14 6 0

संदर्भ

फरवरी 2026 में ‘नेचर’ पत्रिका में प्रकाशित दो प्रमुख अध्ययन बताते हैं कि फ्लोरोसेंट प्रोटीन जीवित कोशिकाओं के भीतर चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों का पता लगा सकते हैं और क्वांटम सेंसर के रूप में कार्य कर सकते हैं।

संबंधित तथ्य

  • वैज्ञानिकों ने एन्हांस्ड येलो फ्लोरोसेंट प्रोटीन (EYFP) जैसे प्रोटीन का सफलतापूर्वक संशोधन किया और एक नया चुंबकीय रूप से संवेदनशील प्रोटीन ‘मैगएलओवी’ (MagLOV) विकसित किया।

एन्हांस्ड येलो फ्लोरोसेंट प्रोटीन (EYFP) क्या है

यह ग्रीन फ्लोरोसेंट प्रोटीन का आनुवंशिक रूप से संशोधित संस्करण है, जो पीली रोशनी उत्सर्जित करता है और जीवित कोशिकाओं में कोशिकीय प्रक्रियाओं की निगरानी के लिए व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।

‘मैगएलओवी’ (MagLOV) क्या है

यह आनुवंशिक रूप से संशोधित चुंबक-संवेदनशील फ्लोरोसेंट प्रोटीन है, जो इलेक्ट्रॉन स्पिन में परिवर्तनों को फ्लोरोसेंस में परिवर्तनों से जोड़कर जीवित कोशिकाओं के भीतर चुंबकीय क्षेत्रों का पता लगा सकता है।

अध्ययन की प्रमुख विशेषताएँ

  • नए निष्कर्ष आनुवंशिक रूप से एन्कोडेड क्वांटम सेंसर और हाइब्रिड क्वांटम-जैविक तकनीकों की नई श्रेणी के लिए मार्ग खोलते हैं।
  • वैज्ञानिकों ने पाया कि संशोधित प्रोटीन ई. कोलाई बैक्टीरिया में भी कमरे के तापमान पर सेंसर के रूप में कार्य कर सकते हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उनका क्वांटम व्यवहार शोरयुक्त वातावरण में भी स्थायी रह सकता है।
  • ऐसे सेंसर प्रोटीन के आकार में परिवर्तनों की निगरानी कर सकते हैं, रासायनिक अभिक्रियाओं की वास्तविक समय निगरानी कर सकते हैं या दवाओं के लक्ष्य पर बंधन को अभूतपूर्व सटीकता से दर्शा सकते हैं।

‘क्वांटम सेंसर’ के बारे में

  • परिभाषा: क्वांटम सेंसर ऐसे उपकरण हैं, जो कणों के क्वांटम गुणों (जैसे- इलेक्ट्रॉन स्पिन या सुपरपोजीशन) का उपयोग करके अत्यंत सूक्ष्म भौतिक परिवर्तनों को मापते हैं।
  • सक्रियता: ये अत्यंत कमजोर चुंबकीय क्षेत्र, विद्युत क्षेत्र, तापमान परिवर्तन और गुरुत्वाकर्षण में परिवर्तन का पता लगा सकते हैं।
  • अनुप्रयोग
    • चिकित्सा इमेजिंग
    • नेविगेशन प्रणाली
    • भू-वैज्ञानिक अन्वेषण
    • क्वांटम कंप्यूटिंग अनुसंधान

फ्लोरोसेंट प्रोटीन के बारे में

  • फ्लोरोसेंट प्रोटीन ऐसे प्रकाश-उत्सर्जक प्रोटीन होते हैं, जो एक तरंगदैर्ध्य पर प्रकाश को अवशोषित करते हैं और उसे दूसरे (अधिक लंबी) तरंगदैर्ध्य पर उत्सर्जित करते हैं।
    • उदाहरण: ग्रीन फ्लोरोसेंट प्रोटीन की सर्वप्रथम खोज जेलीफिश में हुआ था और यह जैविक अनुसंधान में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
  • अनुप्रयोग
    • कोशिका जीव विज्ञान: फ्लोरोसेंट प्रोटीन का उपयोग कोशिकाओं के भीतर प्रोटीन की गति की निगरानी करने, कोशिका विभाजन की प्रक्रिया का अध्ययन करने और जीवित ऊतकों में कैंसर की प्रगति को दृष्टिगोचर करने के लिए किया जाता है।
    • तंत्रिका विज्ञान: इनका उपयोग तंत्रिका परिपथों का मानचित्रण करने और मस्तिष्क के भीतर सिनेप्टिक संयोजनों का अध्ययन करने के लिए किया जाता है।
    • चिकित्सा अनुसंधान: इनका उपयोग औषधि खोज तथा विभिन्न विकारों की प्रगति और उपचार को समझने के लिए रोग मॉडल विकसित करने में किया जाता है।
    • पादप विज्ञान: पादप विज्ञान में इनका उपयोग तनाव प्रतिक्रियाओं, रोगजनक अंतःक्रियाओं और प्रकाश संश्लेषण प्रक्रियाओं के अध्ययन के लिए किया जाता है।
    • संश्लेषित जीव विज्ञान: संश्लेषित जीव विज्ञान में फ्लोरोसेंट प्रोटीन अभियंत्रित जीन परिपथों के डिजाइन और निगरानी में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • फ्लोरोसेंट प्रोटीन के विकास और जैविक अनुप्रयोगों के लिए वर्ष 2008 में रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।

फ्लोरोसेंट प्रोटीन कैसे कार्य करते हैं?

  • फ्लोरोसेंट प्रोटीन में एक विशेष प्रकाश-संवेदनशील भाग होता है, जिसे क्रोमोफोर कहा जाता है।
  • जब प्रकाश (आमतौर पर नीला या पराबैंगनी) प्रोटीन पर पड़ता है, तो वह ऊर्जा को अवशोषित करता है।
  • यह ऊर्जा क्रोमोफोर के भीतर एक इलेक्ट्रॉन को उत्तेजित करती है।
  • उत्तेजित इलेक्ट्रॉन शीघ्र ही अपनी सामान्य अवस्था में लौट आता है।
  • वापस लौटते समय वह ऊर्जा को दृश्य प्रकाश (हरा, पीला, लाल आदि) के रूप में उत्सर्जित करता है।
  • इस उत्सर्जित प्रकाश को फ्लोरोसेंस कहा जाता है।

फ्लोरोसेंट प्रोटीन की सीमाएँ

  • प्रकाश-स्थायित्व संबंधी समस्याएँ: फ्लोरोसेंट प्रोटीन प्रकाश-क्षीणन के प्रति संवेदनशील होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप लंबे समय तक प्रकाश के संपर्क में रहने पर उनकी फ्लोरोसेंस धीरे-धीरे कम हो जाती है।
  • जैविक हस्तक्षेप: लक्षित प्रोटीन के साथ फ्लोरोसेंट प्रोटीन का संलयन उचित वलन, स्थान निर्धारण या जैविक कार्य में हस्तक्षेप कर सकता है।
  • पर्यावरणीय निर्भरता: फ्लोरोसेंस की तीव्रता और स्थिरता कोशिका के भीतर की परिस्थितियों जैसे- pH मान, तापमान और आयनिक सांद्रता से प्रभावित हो सकती है।
  • उन्नत अनुप्रयोगों हेतु सीमित क्वांटम दक्षता
    • पारंपरिक फ्लोरोसेंट प्रोटीन स्वभावतः क्वांटम संवेदन अनुप्रयोगों के लिए अनुकूलित नहीं होते।
    • इंजीनियर्ड प्रकार (जैसे-MagLOV प्रकार के प्रोटीन) इन सीमाओं में से कुछ को दूर करने का प्रयास करते हैं।

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