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संक्षिप्त समाचार

Lokesh Pal April 17, 2026 05:55 4 0

दक्षिण चीन सागर में  स्कारबोरो शोल तनाव

दक्षिण चीन सागर में स्कारबोरो शोल के प्रवेश द्वार पर चीन द्वारा मत्स्यन नौकाएँ, तटरक्षक जहाज तैनात किए गए हैं, जिससे फिलीपींस के साथ तनाव बढ़ गया है। 

  • उपग्रह द्वारा प्राप्त चित्रों से संकेत मिलता है कि चीन इस क्षेत्र में स्थित ‘स्कारबोरो शोल’ तक पहुँच को सीमित करने का प्रयास कर रहा है, जो पारंपरिक रूप से एक समृद्ध मत्स्य क्षेत्र रहा है।

स्कारबोरो शोल के बारे में

  • स्कारबोरो शोल दक्षिण चीन सागर में स्थित एक विवादित एटॉल (Atoll) है, जिस पर चीन और फिलीपींस दोनों दावा करते हैं।
  • भौगोलिक स्थिति: यह फिलीपींस के मुख्य द्वीप लुजोन से लगभग 220 किमी. पश्चिम और हांगकांग से 800 किमी. दक्षिण-पूर्व में स्थित है।
  • स्थानीय नाम (Local Names)
    • फिलीपींस: बाजो दे मसीनलोक (Bajo de Masinloc)
    • चीन: हुआंगयान द्वीप (Huangyan Island)

स्कारबोरो शोल का रणनीतिक महत्त्व 

  • समृद्ध मत्स्य क्षेत्र: यह क्षेत्र लंबे समय से फिलीपींस, चीन और वियतनाम के मछुआरों के लिए एक महत्त्वपूर्ण मत्स्य स्थल रहा है।
  • समुद्री स्थिति: यह फिलीपींस के तट से लगभग 120 समुद्री मील की दूरी पर स्थित है, जिससे यह संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) के तहत फिलीपींस के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के अंतर्गत आता है।
  • समुद्री मार्गों पर नियंत्रण: यह क्षेत्र दक्षिण चीन सागर में स्थित है, जो वैश्विक समुद्री व्यापार का लगभग एक-तिहाई वहन करता है।
  • संभावित सैन्य महत्त्व: इस क्षेत्र पर नियंत्रण से समुद्री गतिविधियों की निगरानी और क्षेत्र में नौसैनिक शक्ति प्रक्षेपण की क्षमता बढ़ती है।

कानूनी एवं कूटनीतिक पृष्ठभूमि

  • वर्ष 2012 का गतिरोध: वर्ष 2012 में फिलीपींस के साथ हुए गतिरोध के बाद चीन ने स्कारबोरो शोल पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर लिया।
  • वर्ष 2016 का अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता निर्णय: स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) ने फिलीपींस बनाम चीन मामले में निर्णय दिया कि चीन की नाकाबंदी अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और इस क्षेत्र को पारंपरिक मत्स्य क्षेत्र के रूप में मान्यता दी।
  • अनसुलझा संप्रभुता संबंधी मुद्दा: इस निर्णय ने समुद्री अधिकारों को स्पष्ट किया, लेकिन शोल पर संप्रभुता का निर्धारण नहीं किया।
  • चीन द्वारा निर्णय का अस्वीकारण: चीन ने इस निर्णय को अस्वीकार कर दिया और नाइन-डैश लाइन के आधार पर अपने दावे जारी रखे।
    • नाइन-डैश लाइन: यह एक सीमा रेखा है, जिसका उपयोग चीन, दक्षिण चीन सागर के अधिकांश भाग पर ऐतिहासिक अधिकार जताने के लिए करता है, जो कई दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के दावों पर अतिक्रमण दर्शाता है।

बढ़ते भू-राजनीतिक आयाम

  • फिलीपींस–अमेरिका रक्षा सहयोग: फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर के नेतृत्व में फिलीपींस ने अमेरिका के साथ अपने सैन्य संबंधों को मजबूत किया है।
  • संयुक्त सैन्य अभ्यास: फिलीपींस द्वीपसमूह में हजारों सैनिकों के साथ बड़े पैमाने पर अभ्यास आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें जाम्बालेस (स्कारबोरो शोल से लगभग 120 समुद्री मील दूर) भी शामिल है।

ब्रिक्स स्वास्थ्य कार्य समूह (HWG) बैठक 2026

ब्रिक्स ढाँचे के तहत वर्ष 2026 के लिए स्वास्थ्य कार्य समूह (HWG) की पहली बैठक भारत की अध्यक्षता में आयोजित की गई।

मुख्य बिंदु 

  • भागीदारी: यह वर्चुअल बैठक भारत के स्वास्थ्य सचिव की अध्यक्षता में हुई, जिसमें विभिन्न ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
  • थीम: भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का विषय है- “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण”।
  • भारत द्वारा प्रस्तावित नई प्राथमिकताएँ:
    • स्वस्थ जीवनशैली हेतु ब्रिक्स मिशन: अस्वस्थ आहार, शारीरिक निष्क्रियता, तंबाकू और शराब जैसे जोखिम कारकों को संबोधित करना।
    • मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण: मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना और इससे जुड़े कलंक को कम करना।
  • चर्चित प्रमुख क्षेत्र 
    • ब्रिक्स टीबी अनुसंधान नेटवर्क सहयोग।
    • संक्रामक रोगों के लिए एकीकृत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली
    • स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल प्रणालियों का विकास
    • पारंपरिक और एकीकृत चिकित्सा में सहयोग
    • सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों को सुदृढ़ करना और स्वास्थ्य पर सामाजिक कारकों के प्रभाव को संबोधित करना।

ब्रिक्स के बारे में

  • BRICS उभरती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है, जिसमें ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया शामिल हैं।
  • गठन (2006): BRIC का औपचारिक गठन वर्ष 2006 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान न्यूयॉर्क में विदेश मंत्रियों की बैठक में हुआ।
  • पहला शिखर सम्मेलन (2009): पहला BRIC शिखर सम्मेलन येकातेरिनबर्ग (रूस) में आयोजित हुआ।
  • साझेदार देश (2025): बेलारूस, बोलिविया, कजाखस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज़्बेकिस्तान और वियतनाम BRICS के साझेदार देशों के रूप में जुड़े।

BRICS के प्रमुख घोषणापत्र

  • फोर्टालेज़ा घोषणा (2014): 6वें BRICS शिखर सम्मेलन में अपनाई गई, जिसके तहत न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) की स्थापना हुई।
  • उफा घोषणा (2015): उफा (रूस) में आयोजित 7वें शिखर सम्मेलन में अपनाई गई।
    • इसमें वैश्विक शासन सुधार, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहयोग और आर्थिक सहयोग को सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया।
  • बीजिंग घोषणा (2022): बीजिंग (चीन) में आयोजित 14वें शिखर सम्मेलन में अपनाई गई।
    • इसमें रूस–यूक्रेन संवाद, कोविड-19 प्रतिक्रिया, डिजिटल परिवर्तन, लचीली आपूर्ति शृंखलाएँ और निम्न-कार्बन विकास पर बल दिया गया है।

चक्रवात मायला/मैला (2026)

हाल ही में श्रेणी 5 के भीषण उष्णकटिबंधीय चक्रवात मायला/मैला (Maila) ने पापुआ न्यू गिनी में 23 लोगों की जान ले ली, जिसके बाद बोगेनविल क्षेत्र में आपातकाल घोषित किया गया।

चक्रवात मायला/मैला के बारे में

  • प्रकार: यह सोलोमन सागर के ऊपर निर्मित एक भीषण उष्णकटिबंधीय चक्रवात (श्रेणी 5) है।
  • उत्पत्ति: उत्तर-पूर्वी कोरल सागर / सोलोमन सागर क्षेत्र।
  • पथ: इसने पापुआ न्यू गिनी और सोलोमन द्वीपसमूह के मध्य अनियमित तथा धीमी गति से मार्ग अपनाया, फिर केप यॉर्क प्रायद्वीप की ओर पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम दिशा में बढ़ा।
  • नामकरण: उष्णकटिबंधीय चक्रवात चेतावनी केंद्र, पोर्ट मोरेस्बी (पापुआ न्यू गिनी ) द्वारा नामित।
  • प्रभाव: पापुआ न्यू गिनी में व्यापक भूस्खलन और बाढ़ के कारण 23 लोगों की मौत हो गई, हजारों लोग विस्थापित हो गए और बोगेनविले, पूर्वी न्यू ब्रिटेन और मिल्ने बे प्रांतों में महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढाँचा नष्ट हो गया।

उष्णकटिबंधीय चक्रवात के बारे में 

  • उष्णकटिबंधीय चक्रवात एक शक्तिशाली चक्रीय तूफान होता है, जो गर्म समुद्री जल के ऊपर उत्पन्न होता है और इसकी विशेषताएँ हैं: अत्यंत कम वायुदाब, भारी वर्षा, तेज और विनाशकारी हवाएँ।
  • ये चक्रवात समुद्र की ऊष्मा से ऊर्जा प्राप्त कर तीव्र होते हैं और जब हवाओं की गति 119 किमी./घंटा से अधिक हो जाती है, तो ये हरिकेन या टाइफून जैसे शक्तिशाली तूफानों में विकसित हो जाते हैं।
  • क्षेत्रीय नाम
    • हरिकेन (Hurricanes): उत्तरी अटलांटिक महासागर, उत्तर-पूर्वी प्रशांत महासागर (उत्तरी अमेरिका के तट के पास) और कैरेबियन सागर में।
    • टाइफून (Typhoons): उत्तर-पश्चिमी प्रशांत महासागर (चीन, जापान और फिलीपींस जैसे पूर्वी एशियाई देशों को प्रभावित करते हैं)।
    • चक्रवात (Cyclones): उत्तरी हिंद महासागर (बंगाल की खाड़ी और अरब सागर) तथा दक्षिण प्रशांत महासागर में।
    • विली-विलीज (Willy-Willies): पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के निकट समुद्री क्षेत्रों में।
  • निर्माण की स्थितियाँ
    • समुद्री सतह तापमान: 27°C से अधिक गर्म जल आवश्यक ऊर्जा और नमी प्रदान करता है।
    • कॉरिओलिस बल: चक्रीय मार्ग उत्पन्न करने के लिए पर्याप्त होना चाहिए, इसलिए चक्रवात भूमध्य रेखा पर निर्मित नहीं होते हैं।
    • ऊर्ध्वाधर पवन कर्तन: कम होना चाहिए, ताकि तूफान की संरचना बनी रहे।
    • ऊर्जा स्रोत: कपासी स्तरी मेघों के निर्माण के दौरान निकलने वाली गुप्त ऊष्मा से ऊर्जा प्राप्त होती है।
  • संरचनात्मक विशेषताएँ 
    • आँख: केंद्र का शांत क्षेत्र, जहाँ न्यूनतम दाब और अपेक्षाकृत उच्च तापमान होता है।
    • आईवॉल (The Eyewall): आँख के चारों ओर का क्षेत्र, जहाँ सबसे तीव्र हवाएँ और अधिकतम वर्षा होती है।
  • घूर्णन की दिशा: दक्षिणी गोलार्द्ध में घड़ी की दिशा में तथा उत्तरी गोलार्द्ध में घड़ी की विपरीत दिशा में (कॉरिओलिस प्रभाव के कारण)।
  • पथ: सामान्यत: पूर्वी व्यापारिक पवनों (Easterlies) के कारण पश्चिम की ओर बढ़ते हैं, फिर ध्रुवों की ओर मुड़ते हैं।
  • स्थल से टकराव: स्थल पर पहुँचने के बाद नमी (ऊर्जा) की आपूर्ति रुकने और घर्षण बढ़ने से चक्रवात तेजी से कमजोर हो जाता है।

एज टोकन (Age Tokens)

आंध्र प्रदेश सरकार ने सोशल मीडिया उपयोग के लिए गोपनीयता-संरक्षित आयु प्रमाणीकरण सक्षम करने हेतु “एज टोकन (Age Tokens)” को डिजिलॉकर के साथ एकीकृत करने का प्रस्ताव रखा है।

संबंधित तथ्य

  • विधायी पहल: एक मंत्रियों के समूह (GoM) द्वारा वैश्विक मॉडलों से प्रेरित कानून पर कार्य किया जा रहा है, ताकि 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को विनियमित किया जा सके।
  • आयु-आधारित सोशल मीडिया नीति: 13 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए पूर्ण प्रतिबंध तथा 13–16 वर्ष के लिए सीमित और आयु-उपयुक्त उपयोग।

एज टोकन के बारे में 

  • परिभाषा: एज टोकन एक डिजिटल आयु प्रमाण है, जो व्यक्ति की आयु की पुष्टि करता है, बिना उसकी पूरी पहचान उजागर किए।
  • डिजिटल अवसंरचना से एकीकरण: इसे डिजिलॉकर के माध्यम से जारी करने का प्रस्ताव है, जिससे मौजूदा सरकारी डिजिटल पहचान ढाँचे का उपयोग होगा।
  • गोपनीयता तंत्र: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को केवल आयु पात्रता की जानकारी मिलेगी, न कि नाम या आधार संख्या जैसी संवेदनशील जानकारी।
  • नियामक उपकरण: यह आयु-आधारित प्रतिबंधों को लागू करने में सहायक होगा, जैसे- 13 वर्ष से कम आयु के उपयोगकर्ताओं पर प्रतिबंध एवं 13–16 आयु वर्ग के उपयोग को सीमित करना।
  • कार्यान्वयन संबंधी चिंताएँ: इसमें गोपनीयता जोखिम, डिजिटल विभाजन तथा बड़े पैमाने पर लागू करने में तकनीकी जटिलताएँ शामिल हैं।

अर्बन चैलेंज फंड (UCF)

हाल ही में अर्बन चैलेंज फंड (UCF) के संचालन संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए गए, जिसका उद्देश्य उभरते शहरों में बाजार-आधारित वित्तपोषण के माध्यम से सतत् शहरी अवसंरचना को बढ़ावा देना है।

अर्बन चैलेंज फंड 

  • परिचय : यह एक पहल है, जिसका उद्देश्य बाजार-आधारित वित्तीय तंत्र के माध्यम से बड़े पैमाने पर शहरी अवसंरचना निवेश को प्रोत्साहित करना है।
  • उद्देश्य: सुधार-आधारित और वित्तीय रूप से सतत् शहरी विकास को बढ़ावा देना, ताकि शहर म्युनिसिपल बॉण्ड, ऋण और पीपीपी जैसे विविध वित्त स्रोतों तक पहुँच सकें।
  • नोडल मंत्रालय: आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA)।
  • कार्यान्वयन: यह ‘क्रेडिट रिपेमेंट गारंटी’ उप-योजना द्वारा समर्थित है, जिससे शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) की क्रेडिट योग्यता बढ़े और निजी निवेश आकर्षित हो।
  • बजट प्रावधान: कुल 1 लाख करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता, जिसका उद्देश्य लगभग 4 लाख करोड़ रुपये के समग्र निवेश को आकर्षित करना है; इसमें परियोजनाओं, क्षमता निर्माण और ऋण गारंटी के लिए आवंटन शामिल हैं। 
  • फोकस क्षेत्र: पहाड़ी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों सहित द्वितीय और तृतीय स्तर के शहरों को लक्षित किया गया है; शहरी गतिशीलता, पुनर्विकास, जल और स्वच्छता, अंतिम-मील कनेक्टिविटी और जलवायु-लचीले बुनियादी ढाँचे को प्राथमिकता दी गई है। 
  • महत्त्व: स्थानीय निकायों की वित्तीय स्वायत्तता को मजबूत करता है, निवेश के लिए तैयार शहरी केंद्रों को बढ़ावा देता है और विकसित भारत @2047 और सतत् शहरी परिवर्तन जैसे दीर्घकालिक लक्ष्यों के साथ संरेखित होता है।

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