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30वीं वर्षगाँठ: बहु-क्षेत्रीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग हेतु बंगाल की खाड़ी पहल (बिम्सटेक)

Lokesh Pal July 21, 2026 02:36 9 0

संदर्भ

हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित बिम्सटेक’ (Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation-BIMSTEC) के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुखों की बैठक में सदस्य देशों ने समुद्री कानून प्रवर्तन एवं आपदा प्रबंधन के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत अपनाए हैं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा में बिम्सटेक की बढ़ती भूमिका रेखांकित हुई है।

संबंधित तथ्य

  • वर्ष 2027 में अपनी 30वीं वर्षगाँठ से पूर्व बिम्सटेक आतंकवाद, साइबर अपराध एवं समुद्री सुरक्षा जैसी उभरती चुनौतियों से निपटने हेतु सहयोग को सुदृढ़ कर रहा है।

बिम्सटेक’ के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुखों की बैठक के प्रमुख परिणाम

  • आतंकवाद-रोधी सहयोग: सदस्य देशों ने आतंकवाद, संगठित अपराध एवं हिंसक उग्रवाद के विरुद्ध खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान तथा समन्वित कार्रवाई के माध्यम से सहयोग को सुदृढ़ करने पर सहमति व्यक्त की।
  • साइबर सुरक्षा: क्षेत्र को प्रभावित करने वाले साइबर खतरों, अपराध एवं उभरती डिजिटल सुरक्षा चुनौतियों से निपटने हेतु सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं।
  • समुद्री सुरक्षा: समुद्री कानून प्रवर्तन एजेंसियों के मध्य समन्वय, पूर्वानुमेयता एवं सुरक्षा में सुधार के लिए परस्पर संवाद संबंधी मार्गदर्शक सिद्धांतों का अनुमोदन किया गया।
  • मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR): प्राकृतिक आपदाओं एवं आपात स्थितियों के दौरान त्वरित एवं बेहतर समन्वित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए समुद्री मानवीय सहायता एवं आपदा राहत  (HADR) अभियानों हेतु दिशा-निर्देशों को स्वीकृति प्रदान की गई।
  • ऊर्जा सुरक्षा: सदस्य देशों ने ऊर्जा सुरक्षा संबंधी जोखिमों का प्रभावी समाधान करने, ऊर्जा आपूर्ति शृंखला की निरंतरता सुनिश्चित करने तथा आपूर्ति व्यवधानों के विरुद्ध क्षेत्रीय लचीलेपन (Regional Resilience) को सुदृढ़ करने हेतु घनिष्ठ सहयोग पर सहमति व्यक्त की।
  • बेहतर क्षेत्रीय समन्वय: सीमापार सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए नियमित परामर्श एवं क्षमता निर्माण पहलों के माध्यम से सहयोग को और गहरा करने पर सहमति बनी है।

बिम्सटेक क्या है?

  • बिम्सटेक’ बंगाल की खाड़ी के निकट स्थित सात देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है।
  • यह दक्षिण एशिया एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के मध्य सेतु के रूप में कार्य करते हुए क्षेत्रीय सहयोग, संपर्क, आर्थिक एकीकरण एवं सुरक्षा को प्रोत्साहित करता है।
  • यह लगभग 1.7 अरब लोगों (विश्व की जनसंख्या का 22%) का प्रतिनिधित्व करता है तथा इसका संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद (GDP) लगभग 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है।

विकास

वर्ष विकास
1997 बिस्ट-ईसी (BIST-EC) के रूप में स्थापना हुई, जिसका पूर्ण रूप बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका एवं थाईलैंड आर्थिक सहयोग था।
1997 म्याँमार के शामिल होने के बाद इसका नाम बिम्स्ट-ईसी (BIMST-EC) रखा गया।
2004 नेपाल एवं भूटान के शामिल होने के बाद इसका नाम बिम्सटेक (BIMSTEC) हो गया।

बिम्सटेक का गठन क्यों किया गया?

  • दक्षिण एशिया एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के मध्य सेतु: बिम्सटेक दक्षिण एशिया एवं दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ने वाला एकमात्र क्षेत्रीय संगठन है, जो बंगाल की खाड़ी के माध्यम से आर्थिक, तकनीकी एवं रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देता है तथा भारत की एक्ट ईस्ट नीति एवं पड़ोसी प्रथम नीति का पूरक है।
    • उदाहरण: भारत भारत–म्याँमार–थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग तथा कलादान बहु-माध्यमीय पारगमन परिवहन परियोजना का कार्यान्वयन कर क्षेत्रीय एकीकरण को सुदृढ़ कर रहा है।
  • SAARC के विकल्प के रूप में: भारत–पाकिस्तान तनाव के कारण SAARC लंबे समय से निष्क्रिय बना हुआ है, जिससे बिम्सटेक द्विपक्षीय राजनीतिक गतिरोधों से मुक्त क्षेत्रीय सहयोग के लिए अधिक प्रभावी मंच बनकर उभरा है।
    • उदाहरण: वर्ष 2016 के उरी आतंकवादी हमले के पश्चात् भारत ने BRICS के गोवा शिखर सम्मेलन में बिम्सटेक देशों के नेताओं को आमंत्रित कर इस दिशा में अपनी रणनीतिक प्राथमिकता को स्पष्ट किया था।
  • क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा देना: बिम्सटेक परिवहन, डिजिटल, ऊर्जा तथा जन-से-जन संपर्क को सुदृढ़ कर वस्तुओं, सेवाओं एवं लोगों की निर्बाध आवाजाही तथा क्षेत्रीय मूल्य शृंखलाओं के एकीकरण को प्रोत्साहित करता है।
    • बिम्सटेक परिवहन संपर्क मास्टर प्लान (2022) में 267 परियोजनाओं की पहचान की गई है, जिनके लिए 126 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक निवेश की आवश्यकता है (ADB एवं बिम्सटेक सचिवालय)।
  • आर्थिक एकीकरण में तेजी लाना: यह संगठन व्यापार उदारीकरण, निवेश, लचीली आपूर्ति शृंखलाओं एवं सतत् विकास को बढ़ावा देकर बंगाल की खाड़ी की आर्थिक क्षमता का दोहन तथा क्षेत्रीय समृद्धि को प्रोत्साहित करता है।
    • बिम्सटेक के सदस्य देश संयुक्त रूप से 1.7 अरब लोगों (विश्व की जनसंख्या का 22%) तथा लगभग 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का प्रतिनिधित्व करते हैं (बिम्सटेक सचिवालय)
  • समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ करना: बंगाल की खाड़ी एक महत्त्वपूर्ण समुद्री गलियारा है, इसलिए समुद्री सुरक्षा, डकैती-रोधी प्रयासों, आपदा प्रतिक्रिया तथा समुद्री संचार मार्गों (SLOCs) की सुरक्षा के लिए सहयोग अत्यावश्यक है।
    • उदाहरण: बिम्सटेक ने बेहतर समन्वय के लिए समुद्री HADR दिशा-निर्देश तथा समुद्री कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत अपनाए हैं।
  • आतंकवाद एवं सीमापार अपराध का मुकाबला: बिम्सटेक की स्थापना आतंकवाद, संगठित अपराध, मानव, मादक पदार्थों की तस्करी तथा साइबर अपराध के विरुद्ध समन्वित सुरक्षा तंत्र के माध्यम से क्षेत्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए की गई थी।
    • उदाहरण: अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद, सीमापार संगठित अपराध एवं अवैध मादक पदार्थों की तस्करी से निपटने में सहयोग संबंधी बिम्सटेक अभिसमय (2009) इस सहयोग के लिए कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।
  • चीन के बढ़ते प्रभाव का संतुलन: बिम्सटेक सदस्य देशों को क्षेत्रीय सहयोग एवं संपर्क को सुदृढ़ करने का मंच प्रदान करता है तथा ‘बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव’ (BRI) के अंतर्गत चीन के बढ़ते रणनीतिक एवं अवसंरचनात्मक प्रभाव का एक वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराता है।
    • उदाहरण: भारत अपने इंडो-पैसिफिक’ विजन तथा महासागर पहल के अंतर्गत बिम्सटेक को बढ़ावा देता है।
  • समावेशी क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देना: यह संगठन भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास तथा उन्नत संपर्क एवं व्यापार के माध्यम से स्थलरुद्ध देशों जैसे नेपाल एवं भूटान की बाजार तक पहुँच में सुधार कर क्षेत्रीय असमानताओं को घटाने का प्रयास करता है।
    • उदाहरण: सागरमाला, BBIN संपर्क पहल तथा बिम्सटेक की परिवहन परियोजनाओं से बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स, पर्यटन एवं सीमापार व्यापार को बढ़ावा मिलने की अपेक्षा है।

भारत के लिए ‘बिम्सटेक’ का महत्त्व

  • नेबरहुड फर्स्ट’ नीति: बिम्सटेक बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में भारत के निकटवर्ती पड़ोसी देशों के साथ राजनीतिक, आर्थिक एवं सुरक्षा सहयोग को सुदृढ़ कर, क्षेत्रीय विश्वास, स्थिरता एवं सामूहिक विकास को बढ़ावा देते हुए भारत की पड़ोसी प्रथम नीति को मजबूत करता है।
  • एक्ट ईस्ट’ नीति: बिम्सटेक दक्षिण एशिया एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के मध्य एक महत्त्वपूर्ण सेतु के रूप में कार्य करते हुए बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के माध्यम से आसियान देशों के साथ संपर्क, व्यापार, निवेश एवं रणनीतिक सहभागिता को बढ़ाकर भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को आगे बढ़ाता है।
  • समुद्री सुरक्षा: बिम्सटेक समुद्री क्षेत्र जागरूकता, समुद्री डकैती-रोधी अभियान, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR), खोज एवं बचाव तथा समुद्री कानून प्रवर्तन में संयुक्त प्रयासों के माध्यम से समुद्री सुरक्षा सहयोग को सुदृढ़ करता है, जिससे बंगाल की खाड़ी अधिक सुरक्षित एवं सुदृढ़ बनती है।
  • चीन के प्रभाव का संतुलन: बिम्सटेक भारत को बेल्ट एंड रोड पहल (BRI) से स्वतंत्र एक रणनीतिक क्षेत्रीय मंच प्रदान करता है, जिससे नियम-आधारित सहयोग, क्षेत्रीय साझेदारी तथा स्वतंत्र, खुले, समावेशी एवं सुरक्षित हिंद-प्रशांत को बढ़ावा मिलता है।
  • पूर्वोत्तर भारत का विकास: बिम्सटेक बहु-माध्यमीय संपर्क, सीमापार व्यापार एवं अवसंरचना विकास को बढ़ावा देकर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रवेश-द्वार के रूप में विकसित करता है तथा निवेश, पर्यटन, रोजगार एवं क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण के नए अवसर सृजित करता है।

बिम्सटेक के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ

  • राजनीतिक अस्थिरता: विशेषकर म्याँमार में आंतरिक संघर्ष तथा सदस्य देशों में बार-बार होने वाले राजनीतिक परिवर्तन क्षेत्रीय सहयोग को बाधित करते हैं, सामूहिक पहलों में विलंब उत्पन्न करते हैं तथा बिम्सटेक की दीर्घकालिक रणनीतिक उद्देश्यों को आगे बढ़ाने की क्षमता को कमजोर करते हैं।
  • द्विपक्षीय विवाद: सदस्य देशों के मध्य सीमा विवाद, राजनीतिक मतभेद तथा अन्य अनसुलझे द्विपक्षीय मुद्दे परस्पर विश्वास को कमजोर करते हैं, सर्वसम्मति निर्माण की प्रक्रिया को बाधित करते हैं तथा क्षेत्रीय सहयोग पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन में अवरोध उत्पन्न करते हैं।
    • तीस्ता नदी जल बँटवारा: भारत एवं बांग्लादेश के मध्य तीस्ता नदी जल बँटवारा समझौता अभी तक अंतिम रूप नहीं ले सका है, क्योंकि जल आवंटन को लेकर मतभेद तथा पश्चिम बंगाल द्वारा उठाई गई चिंताएँ बनी हुई हैं। निरंतर कूटनीतिक वार्ताओं के बावजूद यह एक प्रमुख द्विपक्षीय विवाद बना हुआ है।
  • संपर्क अवसंरचना की कमी: अपर्याप्त सड़क, रेल, बंदरगाह, वायु एवं डिजिटल अवसंरचना वस्तुओं, सेवाओं एवं लोगों की निर्बाध आवाजाही को सीमित करती है, जिससे व्यापार एकीकरण एवं क्षेत्रीय आर्थिक विकास प्रभावित होता है।
  • परियोजनाओं का धीमा क्रियान्वयन: प्रक्रियागत विलंब, वित्तीय संसाधनों की कमी तथा सदस्य देशों के मध्य कमजोर समन्वय के कारण प्रमुख संपर्क, ऊर्जा एवं आर्थिक परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी होती है, जिससे बिम्सटेक की समग्र प्रभावशीलता कम होती है।
  • सीमित संस्थागत क्षमता: आसियान की तुलना में बिम्सटेक का सचिवालय अपेक्षाकृत छोटा है, इसके पास सीमित वित्तीय संसाधन एवं कमजोर संस्थागत तंत्र हैं, जिससे क्षेत्रीय कार्यक्रमों की निगरानी, समन्वय एवं कार्यान्वयन की क्षमता प्रभावित होती है।
  • चीन कारक: बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव’ (BRI) तथा अन्य निवेशों के माध्यम से चीन की बढ़ती आर्थिक, रणनीतिक एवं समुद्री उपस्थिति ने भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्द्धा को तीव्र किया है, जिससे बिम्सटेक की क्षेत्रीय एकजुटता तथा भारत के रणनीतिक हितों के समक्ष चुनौतियाँ उत्पन्न हुई हैं।

बिम्सटेक के सदस्य देशों में स्थित क्षेत्रीय केंद्र  (UPSC प्रीलिम्स 2026 )

क्षेत्रीय केंद्र मेजबान देश मुख्य कार्यक्षेत्र
बिम्सटेक ऊर्जा केंद्र (BEC) भारत (बंगलूरू) ऊर्जा सहयोग, विद्युत ग्रिड संपर्क, नवीकरणीय ऊर्जा एवं ऊर्जा सुरक्षा
बिम्सटेक मौसम एवं जलवायु केंद्र भारत (नोएडा) मौसम पूर्वानुमान, जलवायु अनुसंधान एवं आपदा पूर्व चेतावनी
बिम्सटेक सांस्कृतिक उद्योग आयोग (BCIC) भूटान (थिंफू) सांस्कृतिक विरासत, सृजनात्मक उद्योग एवं जन-से-जन संपर्क
बिम्सटेक बंगाल की खाड़ी अध्ययन केंद्र (BCBS) बांग्लादेश (ढाका) नीतिगत अनुसंधान, समुद्री अध्ययन, नीली अर्थव्यवस्था एवं क्षेत्रीय सहयोग
बिम्सटेक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण सुविधा (TTF) श्रीलंका (कोलंबो) प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, नवाचार, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विकास तथा क्षमता निर्माण
उष्णकटिबंधीय चिकित्सा पर बिम्सटेक उत्कृष्टता केंद्र (प्रस्तावित) थाईलैंड जनस्वास्थ्य, उष्णकटिबंधीय रोग, चिकित्सा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण
बिम्सटेक आपदा प्रबंधन केंद्र (प्रस्तावित) म्याँमार आपदा जोखिम न्यूनीकरण, आपातकालीन प्रतिक्रिया एवं आपदा सहनशीलता।

आगे की राह

  • बिम्सटेक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को शीघ्र अंतिम रूप देना: बिम्सटेक FTA का शीघ्र निष्कर्ष एवं क्रियान्वयन अंतर-क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा देगा, निवेश आकर्षित करेगा, व्यापार बाधाओं को कम करेगा तथा सदस्य देशों के मध्य आर्थिक एकीकरण को गहरा करेगा।
  • भौतिक एवं डिजिटल संपर्क को सुदृढ़ करना: सीमापार परिवहन गलियारों, बंदरगाहों, बहु-माध्यमीय अवसंरचना तथा डिजिटल नेटवर्कों के तीव्र विकास से क्षेत्रीय संपर्क में सुधार होगा, व्यापार को सुविधा मिलेगी तथा बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में जन-से-जन संपर्क को बढ़ावा मिलेगा।
  • समुद्री सुरक्षा सहयोग को सुदृढ़ करना: समुद्री क्षेत्र जागरूकता, संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों, सूचना साझा करने, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) तथा समन्वित कानून प्रवर्तन का विस्तार बंगाल की खाड़ी में सुरक्षा एवं स्थिरता को मजबूत करेगा।
  • संस्थागत क्षमता एवं वित्तपोषण में सुधार: बिम्सटेक सचिवालय को अधिक वित्तीय संसाधन, तकनीकी विशेषज्ञता तथा निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करने से क्षेत्रीय पहलों का प्रभावी समन्वय, निगरानी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा।
  • लचीली आपूर्ति शृंखलाओं एवं ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा देना: क्षेत्रीय मूल्य शृंखलाओं, सीमापार ऊर्जा व्यापार, नवीकरणीय ऊर्जा साझेदारियों तथा विद्युत ग्रिड संपर्क को सुदृढ़ करने से आर्थिक लचीलापन बढ़ेगा तथा सतत् क्षेत्रीय विकास को समर्थन मिलेगा।
  • भारत की रणनीतिक दृष्टि के अनुरूप आगे बढ़ना: भारत को बिम्सटेक का उपयोग अपनी नेबरहुड फर्स्ट’ नीति, एक्ट ईस्ट’ नीति, ‘महासागर ‘ पहल तथा इंडो-पैसिफिक’ विजन के प्रमुख स्तंभ के रूप में करते हुए बंगाल की खाड़ी क्षेत्र को सुरक्षित, संपर्क-संपन्न, समृद्ध एवं नियम-आधारित क्षेत्र के रूप में विकसित करना चाहिए।

सार्क–बिम्सटेक–आसियान

मापदंड सार्क बिम्सटेक आसियान (ASEAN)
पूरा नाम दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग पहल दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संगठन
स्थापना 1985 1997 1967
मुख्यालय काठमांडू, नेपाल ढाका, बांग्लादेश जकार्ता, इंडोनेशिया
सदस्य (8) अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका (7) बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्याँमार, नेपाल, श्रीलंका, थाईलैंड (10) ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्याँमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, वियतनाम
उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग, शांति, विकास एवं आर्थिक एकीकरण बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में संपर्क, आर्थिक सहयोग एवं सुरक्षा को बढ़ावा देना आर्थिक एकीकरण, राजनीतिक सहयोग, क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता।

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