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केंद्र ने सरकारी बॉण्ड में FII निवेश पर कर समाप्त किए

Lokesh Pal June 08, 2026 04:13 38 0

संदर्भ

हाल ही में केंद्र सरकार ने भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा किए गए निवेश पर पूँजीगत लाभ कर और स्रोत पर कर कटौती (Withholding tax) को समाप्त कर दिया है।

विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) के बारे में

  • परिभाषा: FIIs ऐसे विदेशी संस्थान होते हैं, जैसे म्यूचुअल फंड, पेंशन फंड, बीमा कंपनियाँ, संप्रभु संपत्ति कोष और परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियाँ, जो किसी देश के वित्तीय बाजारों में निवेश करते हैं।
  • निवेश के क्षेत्र: ये इक्विटी, सरकारी प्रतिभूतियाँ (G-Secs), कॉरपोरेट बॉण्ड और अन्य विपणन योग्य प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं।
  • निवेश की प्रकृति: FIIs मुख्यतः पोर्टफोलियो निवेश करते हैं और जिन संस्थाओं में निवेश करते हैं, उनमें प्रबंधन नियंत्रण प्राप्त करने का उद्देश्य नहीं रखते हैं।
  • आर्थिक महत्त्व: ये पूँजी प्रवाह को बढ़ाते हैं, बाजार में तरलता लाते हैं, वित्तीय बाजारों को गहरा करते हैं तथा आर्थिक विकास को समर्थन प्रदान करते हैं।

मुख्य घोषणाएँ

  • पूंजीगत लाभ कर छूट: सरकारी बॉण्ड में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के निवेश पर दीर्घकालिक (12.5%) तथा अल्पकालिक (30%) पूँजीगत लाभ कर को समाप्त कर दिया गया है।
    • पूँजीगत लाभ कर (CGT) वह कर है जो भूमि, भवन, म्यूचुअल फंड, बॉण्ड आदि पूँजीगत परिसंपत्तियों की बिक्री या हस्तांतरण से प्राप्त लाभ पर लगाया जाता है।
  • ब्याज आय में राहत: सरकारी प्रतिभूतियों से प्राप्त ब्याज आय पर लगभग 20% स्रोत पर कर कटौती (Withholding tax) को हटा दिया गया है।
    • स्रोत पर कर कटौती (withholding tax) एक ऐसी प्रणाली है, जिसमें वेतन या ब्याज जैसे भुगतानों पर कर, लाभार्थी को भुगतान मिलने से पहले ही सरकार द्वारा वसूल लिया जाता है
  • कार्यान्वयन समय-सीमा: ये कर परिवर्तन 1 अप्रैल, 2026 से लागू होंगे, जिन्हें आयकर अधिनियम, 2025 में संशोधन हेतु अध्यादेश के माध्यम से लागू किया गया है।
  • लाभार्थियों का विस्तारित दायरा: यह छूट विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के साथ-साथ बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) पर भी लागू होगी।

निर्णय के कारण

  • भुगतान संतुलन (BoP) संबंधी दबावों का समाधान: वित्त वर्ष 2026–27 में अनुमानित 50–60 अरब डॉलर के भुगतान संतुलन घाटे को कम करने में सहायता हेतु।
  • रुपये को समर्थन: वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय मुद्रा पर अवमूल्यन के दबाव को कम करने के लिए।
  • विदेशी पूँजी को आकर्षित करना: भारत के सरकारी ऋण बाजार में विदेशी भागीदारी बढ़ाने को प्रोत्साहित करने हेतु।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता में सुधार: कर संबंधित बाधाओं को हटाने के लिए, जो भारतीय बॉण्ड्स को प्रतिस्पर्द्धी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कम आकर्षक बनाती थीं।

भुगतान संतुलन (BoP) के बारे में

  • अर्थ: भुगतान संतुलन (BoP) किसी देश के निवासियों और विश्व के शेष भाग के बीच होने वाले सभी आर्थिक लेन-देन का लेखा-जोखा प्रस्तुत करता है।
  • भुगतान संतुलन घाटा: यह तब होता है, जब विदेशी मुद्रा का बहिर्वाह, प्राप्ति से अधिक हो जाता है।
  • आर्थिक प्रभाव: लगातार घाटा होने से घरेलू मुद्रा कमजोर हो सकती है तथा विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आ सकती है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूरक उपाय

  • FAR दायरे का विस्तार: सभी नए 15, 30 और 40 वर्ष की सरकारी बॉण्ड निर्गम को पूर्णतः सुलभ मार्ग (FAR) के अंतर्गत शामिल किया गया है।
    • पूर्णतः सुलभ मार्ग (FAR): इसे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा वर्ष 2020 में शुरू किया गया था।
    • यह गैर-निवासी निवेशकों को भारत सरकार की निर्दिष्ट प्रतिभूतियों में बिना किसी निवेश सीमा या कोटा के निवेश की अनुमति देता है।
    • FAR-नामित प्रतिभूतियाँ सामान्यतः लागू विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) सीमाओं से मुक्त होती हैं।
  • निवेश प्रतिबंधों को हटाना: सामान्य मार्ग के तहत अल्पकालिक निवेश, निवेशक तथा व्यक्तिगत प्रतिभूतियों पर लागू सीमाओं को हटा दिया गया है।

निर्णय के प्रमुख आर्थिक लाभ

  • बड़े विदेशी पूँजी प्रवाह को आकर्षित करना: अगले दो वर्षों में 45–50 अरब डॉलर तक विदेशी निवेश प्रवाह आने की संभावना है।
  • सरकारी बॉण्ड बाजार को सुदृढ़ करना: वैश्विक संप्रभु ऋण बाजारों के साथ भारत का एकीकरण बढ़ेगा तथा सरकारी प्रतिभूतियों की माँग में वृद्धि होगी।
  • उधारी लागत में कमी: बॉण्ड की उच्च माँग से प्रतिफल (यील्ड) घट सकता है, जिससे सरकार की उधारी लागत कम होगी।
  • बाह्य क्षेत्र की स्थिरता को समर्थन: यह चालू खाता घाटा (CAD) के वित्तपोषण में मदद करेगा तथा कमजोर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और इक्विटी प्रवाह के दौरान स्थिर विदेशी पूँजी स्रोत प्रदान करेगा।
  • रुपये की स्थिरता में सुधार: बढ़ते विदेशी मुद्रा प्रवाह से रुपये को समर्थन मिलेगा तथा विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होंगे।
  • समष्टि आर्थिक स्थिरता में वृद्धि: पूँजी स्रोतों का विविधीकरण, इक्विटी प्रवाह पर निर्भरता में कमी तथा बाह्य तनावों और वैश्विक वित्तीय अस्थिरता के विरुद्ध सहनशीलता में वृद्धि होगी।
  • FAR प्रतिभूतियों को अधिक आकर्षक बनाना: कर छूट से पूर्णतः सुलभ मार्ग (FAR) के अंतर्गत आने वाली सरकारी प्रतिभूतियाँ वैश्विक निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनेंगी।

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