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Lokesh Pal
April 11, 2026 02:00
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हाल ही में वर्ष 2026 की रिपोर्ट “अंडर द वेदर: इंडियाज क्लाइमेट-हेल्थ इंटरसेक्शन्स एंड पाथवे टू रेजिलिएंस” जिसे क्लाइमेटराइज एलायंस और दसरा (एक परोपकारी निधि संगठन) द्वारा जारी किया गया, ने यह रेखांकित किया कि भारत के लगभग 40% जिले अत्यधिक संवेदनशील हैं तथा जलवायु परिवर्तन को एक “स्वास्थ्य-जोखिम गुणक” और लोक स्वास्थ्य का उभरता हुआ मुख्य निर्धारक बताया गया है।

रिपोर्ट यह रेखांकित करती है कि जलवायु परिवर्तन एक स्वास्थ्य-जोखिम गुणक और असमानता को बढ़ाने वाला कारक है, जिसके लिए प्रणालीगत, एकीकृत और प्रत्यास्थता-आधारित लोक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया आवश्यक है।




रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि “स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन का जीवंत अनुभव है।” जलवायु परिवर्तन अंततः मानव स्वास्थ्य पर उसके प्रभावों के माध्यम से ही परिलक्षित होता है। भारत की जलवायु नीति को जीवन रक्षा और स्वास्थ्य प्रणाली की लचीलेपन को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि अनुकूलन उपाय, विशेषकर बढ़ते जलवायु जोखिमों के संदर्भ में समानतापूर्ण, सतत् और स्वास्थ्य-केंद्रित विकास को सुनिश्चित कर सकें।
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