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ईज ऑफ लिविंग: भारत की समावेशी प्रगति की यात्रा

Lokesh Pal June 17, 2026 03:07 32 0

संदर्भ

वर्ष 2014 से वर्ष 2026 के बीच भारत की सुशासन यात्रा ने करोड़ों लोगों के दैनिक जीवन में व्यापक परिवर्तन लाया है। आवास, स्वच्छ ईंधन, स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल, विद्युत, परिवहन कनेक्टिविटी और वित्तीय समावेशन जैसी मूलभूत सुविधाओं के विस्तार ने समाज के वंचित वर्गों को सम्मानजनक जीवन, बेहतर अवसर और आत्मनिर्भरता प्रदान की है। इन पहलों ने न केवल जीवन स्तर में सुधार किया, बल्कि सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण को भी नई गति दी।

संबंधित तथ्य 

  • जन धन योजना, मुद्रा योजना, अमृत योजना, डिजिटल इंडिया और MyGov जैसी पहलों ने नागरिकों की भागीदारी को सशक्त बनाया तथा देश में समावेशी विकास, सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण तथा आपदाओं प्रबंधन को बेहतर बनाया है।

ईज ऑफ लिविंग’ का आशय

  • ईज ऑफ लिविंग’  का अर्थ है वह स्तर, जिस पर नागरिक बिना अधिक बाधाओं के बुनियादी सेवाओं, अवसरों और एक सम्मानजनक जीवन स्तर तक आसानी से पहुँच प्राप्त कर सकें।
    • भारतीय संदर्भ में ईज ऑफ लिविंग’ केवल कल्याणकारी सेवाएँ प्रदान करने से आगे बढ़कर एक ऐसे सशक्त, समावेशी और नागरिक-केंद्रित विकास मॉडल को दर्शाती है, जहाँ प्रत्येक व्यक्ति सम्मान, सुविधा और समान अवसरों के साथ जीवन जी सके।
  • यह भारत संविधान से निम्नलिखित दृष्टि से घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है:-
    • अनुच्छेद-21 – गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार।
    • अनुच्छेद-38 – सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देना और असमानताओं को कम करना।
    • अनुच्छेद-39 – पर्याप्त आजीविका के अवसर सुनिश्चित करना।
    • अनुच्छेद-47 – सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार करना।

ईज ऑफ लिविंग’ : विकसित बनाम विकासशील देश

मापदंड विकसित देश (उदाहरण) विकासशील देश (भारत का उदाहरण)
मानव विकास  नॉर्वे, स्विट्जरलैंड और जर्मनी जैसे देशों का मानव विकास सूचकांक (HDI) उच्च है, क्योंकि वहाँ स्वास्थ्य, शिक्षा और आय से संबंधित मजबूत एवं प्रभावी प्रणालियाँ मौजूद हैं। भारत स्वास्थ्य, शिक्षा और गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों के माध्यम से निरंतर प्रगति कर रहा है, लेकिन अभी भी विकसित देशों के समान परिणाम प्राप्त करने की प्रक्रिया में है।
स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच यूनाइटेड किंगडम में नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) के माध्यम से सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध है, जबकि कनाडा में सार्वजनिक रूप से वित्तपोषित स्वास्थ्य सेवा प्रणाली संचालित होती है। भारत ने आयुष्मान भारत  के माध्यम से स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे का विस्तार किया है, लेकिन डॉक्टरों की उपलब्धता और स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों द्वारा आउट-ऑफ-पॉकेट व्यय जैसी चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं।
पेयजल एवं स्वच्छता  जापान और सिंगापुर में उन्नत जल प्रबंधन और स्वच्छता प्रणालियाँ हैं, जो सुरक्षित पेयजल और उच्च स्तर की सार्वजनिक स्वच्छता सुनिश्चित करती हैं। भारत ने जल जीवन अभियान के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार किया है तथा स्वच्छ भारत अभियान के माध्यम से स्वच्छता कवरेज और व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा दिया है।
आवास सुरक्षा  सिंगापुर में हाउसिंग एंड डेवलपमेंट बोर्ड (Housing and Development Board- HDB) के माध्यम से बड़े पैमाने पर सार्वजनिक आवास उपलब्ध कराए जाते हैं। भारत शहरी और ग्रामीण परिवारों की आवास संबंधी आवश्यकताओं को प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के माध्यम से पूरा करने का प्रयास कर रहा है, जिससे पात्र परिवारों को सुरक्षित और पक्के घर उपलब्ध कराए जा सकें।
ऊर्जा तक पहुँच  जर्मनी  और डेनमार्क में विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति के साथ नवीकरणीय ऊर्जा का व्यापक एकीकरण किया गया है। भारत ने सौभाग्य योजना जैसी पहलों के माध्यम से लगभग सार्वभौमिक विद्युत पहुँच हासिल की है, साथ ही सौर, पवन और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देकर स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग का विस्तार किया है।
सार्वजनिक परिवहन एवं गतिशीलता जापान में शिंकान्सेन (Shinkansen) जैसी उच्च गति वाली रेल नेटवर्क प्रणाली है; जबकि यूरोपीय शहरों में एकीकृत सार्वजनिक परिवहन प्रणाली विकसित की गई है। भारत मेट्रो रेल, राजमार्गों, समर्पित माल गलियारों और उड़ान क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी योजना के माध्यम से कनेक्टिविटी एवं परिवहन सुविधाओं का विस्तार कर रहा है।
डिजिटल गवर्नेंस एस्टोनिया डिजिटल सार्वजनिक सेवाओं के साथ ई-गवर्नेंस का एक वैश्विक उदाहरण है। भारत की डिजिटल इंडिया, आधार, यूपीआई और डिजिलॉकर जैसी पहलों ने बड़े पैमाने पर डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का निर्माण किया है।
रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा स्वीडन और जर्मनी अधिक मजबूत बेरोजगारी भत्ता तथा श्रमिक सुरक्षा प्रदान करते हैं। भारत नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अपनाने और जलवायु-अनुकूल अवसंरचना को बढ़ावा दे रहा है, साथ ही विकास संबंधी आवश्यकताओं का भी संतुलन बना रहा है।
पर्यावरणीय संधारणीयता  स्वीडन और नॉर्वे स्वच्छ ऊर्जा, पुनर्चक्रण तथा सतत् शहरी नियोजन का व्यापक उपयोग करते हैं। भारत नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अपनाने और जलवायु-अनुकूल अवसंरचना को बढ़ावा दे रहा है, साथ ही विकास संबंधी आवश्यकताओं का भी संतुलन बना रहा है।
शासन एवं नागरिक सेवाएँ सिंगापुर अपनी कुशल प्रशासनिक व्यवस्था और उत्कृष्ट शहरी प्रबंधन के लिए प्रसिद्ध है। भारत MyGov प्लेटफार्म, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), डिजिटल सेवाओं और सहभागी मंचों के माध्यम से नागरिक-केंद्रित शासन को सुदृढ़ बना रहा है।

ईज ऑफ लिविंग’ के निर्धारक 

  • बुनियादी सेवाएँ और सुविधाएँ: सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता, विद्युत, खाना पकाने का स्वच्छ ईंधन और आवास तक पहुँच गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करती है।
  • स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता: वहनीय स्वास्थ्य सेवाओं, निवारक सेवाओं और स्वास्थ्य बीमा की उपलब्धता कल्याण में सुधार करती है।
  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल विकास: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, डिजिटल लर्निंग और रोजगार योग्य कौशल तक पहुँच विकास के अवसर उत्पन्न करती है।
  • रोजगार और आर्थिक सुरक्षा: स्थिर आजीविका, वित्तीय समावेशन, ऋण तक पहुँच और सामाजिक सुरक्षा आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ाते हैं।
  • अवसंरचना और कनेक्टिविटी: सड़कें, सार्वजनिक परिवहन, रेलवे, डिजिटल कनेक्टिविटी और शहरी अवसंरचना गतिशीलता और पहुँच में सुधार करते हैं।
  • किफायती आवास और शहरी नियोजन: सुरक्षित, किफायती और टिकाऊ आवास की उपलब्धता सामाजिक स्थिरता को समर्थन प्रदान करती है।
  • डिजिटल पहुँच और शासन दक्षता: डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, पारदर्शी सेवाएँ और नागरिक भागीदारी सेवा वितरण में सुधार करते हैं।
  • पर्यावरणीय संधारणीयता: स्वच्छ वायु, हरित क्षेत्र, जलवायु लचीलापन और सतत् संसाधन प्रबंधन दीर्घकालिक जीवन की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हैं।
  • सुरक्षा, संरक्षा और सामाजिक समावेशन: महिलाओं, कमजोर वर्गों और हाशिए पर रहने वाले समुदायों की सुरक्षा समावेशी विकास को बढ़ावा देती है।
  • सुशासन और नागरिक भागीदारी: जवाबदेही, पारदर्शिता और उत्तरदायी संस्थाएँ जन-केंद्रित विकास के लिए आवश्यक हैं।

ईज ऑफ लिविंग’ प्राप्त करने में चुनौतियाँ

  • क्षेत्रीय असमानता: राज्यों, जिलों तथा ग्रामीण–शहरी क्षेत्रों में असमान विकास, अवसरों और सेवाओं तक पहुँच में असमानताएँ उत्पन्न करता है।
  • सेवाओं की गुणवत्ता: स्वास्थ्य, शिक्षा और सार्वजनिक अवसंरचना की गुणवत्ता और दक्षता में सुधार एक प्रमुख चुनौती बनी हुई है।
  • रोजगार सृजन: स्थिर रोजगार, कौशल विकास और आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करना विशेष रूप से बढ़ती युवा जनसंख्या के लिए अत्यंत आवश्यक है।
  • किफायती आवास: तीव्र शहरीकरण और बढ़ती माँग के कारण सुरक्षित, किफायती और संधारणीय आवास उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
  • पर्यावरणीय संधारणीयता: जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और संसाधनों का क्षरण दीर्घकालिक जीवन की गुणवत्ता और सतत विकास को प्रभावित करते हैं।
  • डिजिटल विभाजन: सीमित डिजिटल पहुँच, कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता तकनीक-आधारित शासन के लाभों को सीमित करती है।
  • शहरीकरण की चुनौतियाँ: तीव्र शहरी विकास से यातायात जाम, कचरा प्रबंधन, प्रदूषण और अवसंरचना पर दबाव जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
  • शासन और क्रियान्वयन अंतराल: वंचित वर्गों एवं अंतिम छोर तक सेवाओं की कमजोर पहुँच, समन्वय की समस्याएँ और संस्थागत क्षमता की सीमाएँ प्रभावी सेवा वितरण को प्रभावित करती हैं।

ईज ऑफ लिविंग’ को बढ़ावा देने वाली सरकारी पहलें

  • आवास और बुनियादी सुविधाएँ 
    • प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (PMAY-U):
      • वर्ष 2015 में शहरी क्षेत्रों में पक्के घर उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), निम्न आय वर्ग (LIG) एवं मध्यम आय वर्ग (MIG) को कवर करती है।
      • इसकी शुरुआत से अब तक PMAY-U के तहत 1.25 करोड़ से अधिक घर स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 98 लाख से अधिक घरों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका ह।
    • अटल मिशन फॉर रीजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (AMRUT)
      • वर्ष 2015 में शहरी सेवाओं जैसे जल आपूर्ति, सीवरेज, हरित क्षेत्र और परिवहन के लिए शुरू किया गया।
      • अमृत (AMRUT) 2.0 (2021): इसे 4,800 वैधानिक शहरों तक विस्तारित किया गया, जिसका परिव्यय ₹2.99 लाख करोड़ है।
      • अमृत और अमृत 2.0 के तहत ₹2.79 लाख करोड़ की परियोजनाएँ स्वीकृत की गई हैं।
  • आवश्यक सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुँच
    • प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY): मई 2016 में स्वच्छ LPG कनेक्शन प्रदान करने और ग्रामीण खाना पकाने की परंपराओं में सुधार के लिए शुरू की गई।
      • LPG कवरेज वर्ष 2014 में 55.9% से बढ़कर वर्ष 2026 में 107.2% हो गया।
      • उपभोक्ताओं की संख्या वर्ष 2014 में 14.51 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2026 में 33.39 करोड़ हो गई, साथ ही अवसंरचना का भी विस्तार हुआ।
    • जल जीवन मिशन (JJM)
      • वर्ष 2019 में “हर घर जल” के लक्ष्य के साथ नल जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया गया।
      • ग्रामीण नल जल कनेक्शन वर्ष 2019 में 3.23 करोड़ (16.72%) से बढ़कर वर्ष 2026 तक 15.86 करोड़ (81.94%) हो गए।
  • सभी के लिए बिजली: विश्वसनीय, किफायती और स्वच्छ ऊर्जा 
    • उत्पादन क्षमता और विश्वसनीय, स्वच्छ ग्रिड 
      • कुल स्थापित विद्युत क्षमता पिछले 12 वर्षों में दोगुनी से अधिक हो गई है। यह वित्त वर्ष  2014 में 248 GW से बढ़कर मार्च 2026 तक 532 GW से अधिक हो गई।
      • नवीकरणीय स्रोत अब इस क्षमता का आधे से अधिक हिस्सा बनाते हैं। नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वर्ष 2014 में 76.38 GW से बढ़कर मार्च 2026 में 274.69 GW हो गई।
    • सौभाग्य: हर घर तक बिजली पहुँचाना
      • मार्च 2022 तक लगभग 2.86 करोड़ परिवारों को विद्युत कनेक्शन प्रदान किए गए। इसके साथ ही इस योजना के सभी लक्ष्य पूरे होने पर इसे सफलतापूर्वक समाप्त कर दिया गया।
  • वित्तीय समावेशन और सशक्तीकरण 

परिवहन एवं कनेक्टिविटी 

  • वर्ष 2014 से वर्ष 2026 के मध्य भारत का सड़क नेटवर्क काफी विस्तारित हुआ है, जिसने कनेक्टिविटी और दैनिक गतिशीलता को नया आकार दिया है।
    • 63.73 लाख किमी. के साथ, यह अब विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क है। राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई लगभग 61% बढ़कर वित्त वर्ष 2014 में 91,287 किमी. से मार्च 2026 तक 1,46,572 किमी हो गई है।
      • हाल की परियोजनाओं ने शहरी और क्षेत्रीय गतिशीलता को आगे बढ़ाया है:
        • दिल्ली–देहरादून आर्थिक गलियारा (2026): यात्रा समय छह घंटे से घटकर 2.5 घंटे हो गया है, इसमें एशिया का सबसे लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर शामिल है।
        • अहमदाबाद–धोलेरा एक्सप्रेसवे (2026): यह लॉजिस्टिक्स सुविधाओं को मजबूत करता है और यात्रा समय को कम करता है।
        • गंगा नदी पर पुल NH-31 (2025), बिहार: भारी वाहनों के मार्ग को 100 किमी. से अधिक कम करता है।
        • अर्बन एक्सटेंशन रोड II (2025), दिल्ली: दिल्ली का तीसरा रिंग रोड, माल ढुलाई (फ्रेट मूवमेंट) को तेज करता है।
  • नागरिक-केंद्रित प्लेटफॉर्म
    • केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (CPGRAMS): मंत्रालयों, विभागों, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए उपलब्ध एक समर्पित फीडबैक पोर्टल, जो शिकायत निवारण से संबंधित नागरिक संतुष्टि की निगरानी करता है।
      • जनवरी 2025 से फरवरी 2026 के बीच लगभग 6 लाख शिकायतों का समाधान किया गया, जिनमें से 69.8% को शिकायतकर्ताओं द्वारा संतोषजनक माना गया।
    • MyGov प्लेटफार्म: वर्ष 2014 में शुरू किया गया MyGov शासन में नागरिक भागीदारी को सुदृढ़ करता है। 60 मिलियन से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ताओं के साथ यह नागरिकों और सरकार के बीच एक गतिशील सेतु के रूप में कार्य करता है।
  • शासन सुधार 
    • जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) अधिनियम, 2026 ने इसके दायरे को काफी विस्तार दिया है। इसमें 79 केंद्रीय अधिनियमों के तहत 784 प्रावधान शामिल हैं। इसमें 717 प्रावधानों का अपराधीकरण समाप्त किया गया है तथा 67 प्रावधानों में संशोधन किया गया है, जो सीधे नागरिकों को प्रभावित करते हैं।

आगे की राह 

  • पहुँच से गुणवत्ता की ओर परिवर्तन: केवल कवरेज बढ़ाने के बजाय बेहतर परिणाम, सेवा की गुणवत्ता और नागरिक संतुष्टि को प्राथमिकता देना।
  • स्थानीय शासन को सुदृढ़ बनाना: पंचायतों और नगरपालिकाओं को संसाधन और क्षमता प्रदान करना ताकि अंतिम स्तर तक सेवाओं की प्रभावी डिलीवरी हो सके।
  • हरित और समावेशी विकास को बढ़ावा देना: नवीकरणीय ऊर्जा, सतत् परिवहन और जलवायु-लचीली अवसंरचना को सतत् विकास के साथ जोड़ना।
  • मानव पूँजी प्रथम दृष्टिकोण: स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास में निवेश बढ़ाकर एक उत्पादक कार्यबल तैयार करना।
  • डेटा-आधारित शासन: साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण, डिजिटल उपकरणों और रियल-टाइम निगरानी को बढ़ावा देकर कुशल शासन सुनिश्चित करना।
  • क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना: लक्षित हस्तक्षेपों के माध्यम से राज्यों, ग्रामीण–शहरी क्षेत्रों और कमजोर वर्गों के बीच संतुलित विकास सुनिश्चित करना।
  • डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देना: डिजिटल कनेक्टिविटी, साक्षरता और वहनीय पहुँच का विस्तार करना, ताकि तकनीक का लाभ सभी नागरिकों तक पहुँचे।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी को सुदृढ़ करना: अवसंरचना और सेवा वितरण में सुधार के लिए सहयोग, नवाचार और निवेश को प्रोत्साहित करना।

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