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एल नीनो की स्थिति बनने की संभावना

Lokesh Pal April 13, 2026 05:32 31 0

संदर्भ

मार्च 2026 में समुद्र के सतही तापमान में वृद्धि एल नीनो की बढ़ती संभावना को दर्शाती है, जो संभावित वैश्विक ऊष्मीकरण और मौसम संबंधी व्यवधानों का संकेत देती है।

एल नीनो की संभावना के हालिया प्रभाव

  • वैश्विक तापमान में वृद्धि: लगभग रिकॉर्ड स्तर के समुद्री सतह तापमान, वैश्विक ऊष्मीकरण की तीव्र होती प्रवृत्तियों और एक अधिक गर्म जलवायु चरण की ओर संभावित संक्रमण को दर्शाते हैं।
  • अतिरिक्त-ध्रुवीय महासागरों (दक्षिण 60 डिग्री से उत्तर 60 डिग्री तक) पर औसत समुद्री सतह तापमान मार्च में 20.97 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया, जो इस माह के लिए अब तक का दूसरा उच्चतम स्तर है, केवल मार्च 2024 के बाद।
  • चरम मौसमी घटनाएँ: एल नीनो की बढ़ती संभावना का संबंध हीटवेव, सूखा और असामान्य मौसम पैटर्न से है, विशेषकर यूरोप, उत्तरी अमेरिका और एशिया जैसे क्षेत्रों में।
  • क्रायोस्फीयर पर दबाव: आर्कटिक समुद्री बर्फ के रिकॉर्ड निम्न स्तर गरम होते महासागरों और बदलती वायुमंडलीय स्थितियों से जुड़े तीव्र होते जलवायु दबाव को दर्शाते हैं।

एल नीनो–दक्षिणी दोलन (ENSO) के बारे में

  • एल नीनो–दक्षिणी दोलन भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में एक आवधिक महासागर-वायुमंडल अंतःक्रिया है, जो वैश्विक मौसम और मानसून प्रणालियों को प्रभावित करता है।
  • ENSO के चरण: एल नीनो महासागरीय जल के ऊष्मीकरण को दर्शाता है, ला नीना शीतलन को इंगित करता है, जबकि तटस्थ चरण बिना किसी प्रमुख विसंगति के सामान्य परिस्थितियों को दर्शाता है।

एल नीनो और ला नीना के बीच अंतर

आधार एल नीनो ला नीना
समुद्री सतह तापमान सामान्य से अधिक गर्म सामान्य से अधिक ठंडा
व्यापारिक पवनें कमजोर मजबूत
भारतीय मानसून सामान्यतः कमजोर सामान्यतः मजबूत
भारत पर प्रभाव हीटवेव, सूखा बाढ़, चक्रवात
मत्स्य उद्योग (पेरू तट) अपवेलिंग में कमी के कारण गिरावट प्रबल अपवेलिंग के कारण वृद्धि

ENSO और भारतीय मानसून

  • वर्षा पैटर्न: एल नीनो के कारण वर्षा में कमी आती है, जैसा कि वर्ष 2002 के सूखे के दौरान गया, जबकि ला नीना वर्षा को बढ़ाता है, जैसा कि वर्ष 988 के मानसून में देखा गया।
  • मानसून का आगमन: एल नीनो मानसून के आगमन में देरी करता है, जिससे कृषि चक्र प्रभावित होते हैं, जैसा कि वर्ष 2014 में देखा गया।
  • क्षेत्रीय विविधताएँ: ENSO असमान वर्षा वितरण का कारण बनता है, जिससे एक ही समय में सूखा और बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जैसा कि वर्ष 2006 के एल नीनो के दौरान देखा गया।
  • मानसून अवदाब: ला नीना मानसून अवदाबों को बढ़ाता है, जिससे अधिक वर्षा और कभी-कभी बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है, जैसा कि वर्ष 2010 में देखा गया।
    • दुर्लभ “ट्रिपल-डिप” ला नीना (वर्ष 2020 से 2022) अवधि के दौरान भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून वर्षा लगातार सामान्य से अधिक या सामान्य के आस-पास रही।

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