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Lokesh Pal
April 04, 2026 02:00
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हाल ही में मद्रास उच्च न्यायालय ने अनुच्छेद-161 की व्याख्या करते हुए कहा कि परिहार तथा दोषियों की समय-पूर्व रिहाई से संबंधित मामलों में राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह से बाध्य होता है।


यह निर्णय कार्यकारी शक्ति, लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व और संघीय संतुलन के संवैधानिक सिद्धांतों की दृढ़तापूर्वक पुनः पुष्टि करता है, साथ ही स्थायी अस्पष्टताओं और संस्थागत संघर्षों को भी रेखांकित करता है। राज्यपाल के पद को निर्वाचित कार्यपालिका के साथ सामंजस्य में कार्य करने के लिए स्पष्ट विधिक मानदंड, सुदृढ़ संस्थागत प्रथाएँ और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान आवश्यक है, जिससे संविधान की भावना और अखंडता को बनाए रखा जा सके।
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