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AI युग में नौकरियाँ और कॅरियर

Lokesh Pal April 14, 2026 04:50 39 0

संदर्भ

ओरेकल कॉरपोरेशन की हालिया टिप्पणियाँ वैश्विक रोजगार परिदृश्य में एक परिवर्तनकारी परिवर्तन को उजागर करती हैं, जहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कॅरियर को पुनः परिभाषित कर रही है, मानव और मशीन की भूमिकाओं के बीच के अंतर को कम कर रही है और श्रमिकों एवं संस्थानों को कौशल, अनुकूलनशीलता और दीर्घकालिक रोजगार क्षमता पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर रही है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बारे में

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंप्यूटर विज्ञान की एक शाखा है, जिसका उद्देश्य तर्क (नियमों का उपयोग करके निष्कर्ष निकालना), सीखना (जानकारी प्राप्त करना और उसका उपयोग करने के नियम सीखना) और स्व-सुधार करने में सक्षम प्रणालियाँ विकसित करना है।
  • प्रौद्योगिकी फोकस: AI प्रौद्योगिकी विभिन्न बौद्धिक व्यवहार प्रदर्शित करने वाली प्रणालियों के निर्माण पर केंद्रित है, जिनमें शामिल हैं:-
    • मशीन लर्निंग (ML): AI का एक उपसमूह, जो बिना किसी स्पष्ट प्रोग्रामिंग के ML प्रणालियों को डेटा से सीखने और समय के साथ सुधार करने में सक्षम बनाता है।
    • नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP): इसका उद्देश्य मशीनों को मानव भाषा को समझने, उसकी व्याख्या करने और उस पर प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाना है।
    • कंप्यूटर विजन: मशीनों की छवियों या वीडियो जैसे दृश्य इनपुट के आधार पर व्याख्या करने और निर्णय लेने की क्षमता।
    • रोबोटिक्स: मशीनों को भौतिक दुनिया में कार्यों को करने और उनके साथ संवाद करने में सक्षम बनाने के लिए AI को सेंसर और एक्चुएटर्स के साथ जोड़ता है।
    • डीप लर्निंग: मैजिक लर्निंग की एक विशेष शाखा है, जो बड़ी मात्रा में डेटा को संसाधित करने के लिए कई चरणों वाले न्यूरल नेटवर्क का उपयोग करती है, जिससे अक्सर वाक् और छवि पहचान जैसे क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ प्राप्त होती हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का वर्गीकरण

  • नैरो AI (वीक AI): स्पष्ट कार्यों को करने के लिए डिजाइन की गई विशिष्ट कार्य-आधारित प्रणाली, जैसे- फेस रिकग्निशन, स्पीच प्रोसेसिंग, रिकमेंडेशन इंजन या भाषा अनुवाद (उदाहरण के लिए, भाषिनी)।
    • यह वास्तविक दुनिया में उपयोग में आने वाला AI का वर्तमान और प्रमुख रूप है।
  • जनरल AI (स्ट्रांग AI): AI का एक सैद्धांतिक रूप जो किसी भी क्षेत्र में बुद्धिमत्ता को समझने, सीखने और लागू करने में सक्षम है, जो तर्क, अमूर्तता तथा सामान्य ज्ञान जैसी मानवीय संज्ञानात्मक क्षमताओं के तुलनीय है।
    • अभी तक अस्तित्व में नहीं है; इसको लेकर नैतिक और शासन संबंधी गहन प्रश्न उत्पन्न होते हैं।
  • जेनरेटिव AI: AI का एक विशेष उपसमूह (मुख्य रूप से नैरो AI के अंतर्गत) जो बड़े डेटासेट से सांख्यिकीय पैटर्न सीखकर टेक्स्ट, चित्र, ऑडियो, वीडियो और कोड सहित नई सामग्री उत्पन्न कर सकता है, उदाहरण के लिए, चैटजीपीटी, जेमिनी, DALL·E।
    • रचनात्मकता, उत्पादकता और श्रम बाजारों पर इसके प्रभाव के कारण यह आर्थिक रूप से विघटनकारी है।

भारत में वर्तमान AI इकोसिस्टम

भारत का AI इकोसिस्टम एक बहुआयामी संरचना में विकसित हो गया है, जिसमें सरकारी पहल, स्टार्ट-अप, अकादमिक संस्थान, डिजिटल बुनियादी ढाँचा और वैश्विक निवेश शामिल हैं, जिससे देश एक डेटा-समृद्ध अर्थव्यवस्था से AI-संचालित नवाचार केंद्र में परिवर्तित हो गया है।

  • आर्थिक योगदान और संरचनात्मक परिवर्तन: AI अब सिर्फ एक चर्चा का विषय नहीं, बल्कि एक उच्च-मूल्यवान आर्थिक परिवर्तन का रूप ले रहा है। नीति आयोग का अनुमान है कि वर्ष 2035 तक इससे GDP में 500-600 अरब डॉलर की वृद्धि होगी।
    • भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था (GDP का लगभग 13%) के वर्ष 2030 तक लगभग 20% तक पहुँचने का अनुमान है। यह वृद्धि 250-300 अरब डॉलर के IT क्षेत्र के निम्न-स्तरीय सेवाओं से AI-सक्षम परामर्श और नवाचार की ओर संक्रमण के कारण होगी।
    • यह कोडिंग इकोनॉमी’ से ‘AI-संचालित मूल्य अर्थव्यवस्था’ की ओर परिवर्तन को दर्शाता है।
  • रोजगार, कौशल विकास और श्रम बाजार का पुनर्गठन: भारत ने AI-कुशल पेशेवरों को प्रोत्साहित किया है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2027 तक 12 लाख पेशेवरों को तैयार करना है।
    • कुछ क्षेत्रों में AI भूमिकाओं की माँग लगभग 25% CAGR से बढ़ रही है, जबकि ऑटोमेशन के कारण IT में प्रवेश स्तर की भर्तियों में गिरावट आई है।
    • AI-संबंधित नौकरियों में लगभग 25-30% अधिक वेतन मिलता है, जो कौशल-आधारित मजबूत अंतर को दर्शाता है।
    • यह व्यापक रोजगार से उच्च-कुशल, उच्च-उत्पादकता वाले कार्यबल की ओर बदलाव का संकेत देता है।
  • स्टार्ट-अप इकोसिस्टम-प्रचार से अनुशासन की ओर: भारत में 1,500 से अधिक AI स्टार्ट-अप हैं, लेकिन वर्ष 2025 के बाद ‘फंडिंग विंटर’ के कारण कई स्टार्ट-अप बंद हो गए, जिससे बाजार का समेकन हुआ।
    • किसी भी  कीमत पर आर्थिक वृद्धि’ से हटकर टिकाऊ, प्रतिधारण-केंद्रित मॉडलों की ओर परिवर्तन।
    • कृत्रिम (Krutrim) और सर्वम् AI जैसे डीप-टेक लीडर्स का उदय, जो मूलभूत मॉडलों और भारतीय भाषा के AI पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
    • यह AI रैपर्स से ‘कोर इन्फ्रास्ट्रक्चर इनोवेशन’ की ओर परिपक्वता का संकेत देता है।
  • इन्फ्रास्ट्रक्चर, कंप्यूट पॉवर और डेटा संप्रभुता: इंडियाAIमिशन के तहत, भारत ने AI कंप्यूटरों तक पहुँच को लोकतांत्रिक बनाने के लिए लगभग 38,000 GPU तैनात किए हैं।
    • घरेलू डेटा स्टोरेज और स्वदेशी मॉडल प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करना, विदेशी क्लाउड प्रदाताओं पर निर्भरता को कम करना।
    • यह ‘संप्रभु AI आर्किटेक्चर’ और रणनीतिक स्वायत्तता की ओर बदलाव का प्रतीक है।
  • उद्योग में AI का प्रसार और GCC के नेतृत्व में नवाचार: लगभग 87% भारतीय उद्यम कम-से-कम एक कार्यक्षेत्र में AI को अपना रहे हैं, जो तीव्र प्रसार को दर्शाता है।
    • भारत में 1,600 से अधिक वैश्विक क्षमता केंद्र (GCC) हैं, जिनमें वर्ष 2026 तक 100 से अधिक नए GCC स्थापित किए जाएँगे, जो अब बैक ऑफिस के बजाय AI नवाचार प्रयोगशालाओं के रूप में कार्य कर रहे हैं।
    • मुख्य क्षेत्र एजेंटिक AI, आपूर्ति शृंखला ऑटोमेशन और वैश्विक कंपनियों के लिए वित्तीय प्रणालियाँ हैं।
    • यह वैश्विक AI नवाचार और कार्यान्वयन केंद्र के रूप में भारत के उदय को दर्शाता है।
  • अनुकूलन संबंधी विरोधाभास, शासन और कौशल अंतराल: उच्च स्तर पर AI अपनाने के बावजूद, कुछ ही कंपनियों के पास उन्नत AI विशेषज्ञता है, विशेष रूप से AI नैतिकता, सुरक्षा और शासन में।
    • चिंताओं में शामिल हैं:-
      • कौशल में असंतुलन
      • जिम्मेदार AI की तैनाती
      • भ्रामक सूचना और सामाजिक अस्थिरता का जोखिम।
    • जिम्मेदार AI ढाँचे पर केंद्रित इंडियाAI इंपैक्ट समिट (2026) जैसी पहलों के माध्यम से इन चिंताओं का समाधान किया जा रहा है।
      • यह AI उपयोग और AI निपुणता के बीच के अंतर को उजागर करता है।

रोजगार और अर्थव्यवस्था के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का महत्त्व

  • उत्पादकता वृद्धि और दक्षता में सुधार: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सभी क्षेत्रों में परिचालन दक्षता और उत्पादकता में सुधार कर रही है। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज जैसी कंपनियाँ ऑटोमेटेड कोडिंग, परीक्षण और परियोजना प्रबंधन के लिए AI उपकरणों का उपयोग कर रही हैं, जिससे कार्य पूरा होने में लगने वाला समय कम हो रहा है और सेवा वितरण में वृद्धि हो रही है।
  • रोजगार वृद्धि और कार्य की बदलती प्रकृति: AI मुख्य रूप से केवल नौकरियों को समाप्त करने के बजाय कार्यों में वृद्धि कर रहा है, जिससे कर्मचारी उच्च-मूल्यवान, रचनात्मक और विश्लेषणात्मक कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर पा रहे हैं।
    • यह नियमित निष्पादन से संज्ञानात्मक और पर्यवेक्षी भूमिकाओं की ओर परिवर्तन को दर्शाता है।
  • उच्च-कुशल रोजगार के अवसरों का उदय: मशीन लर्निंग इंजीनियरों, डेटा वैज्ञानिकों, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और क्लाउड पेशेवरों की माँग में तेजी से वृद्धि हो रही है। इन्फोसिस जैसी कंपनियाँ AI-प्रधान कार्यबल की ओर अग्रसर हैं और डिजिटल तथा उन्नत प्रौद्योगिकी कौशल में निवेश कर रही हैं।
  • वेतन वृद्धि और कौशल प्रोत्साहन: भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में कुशल पेशेवर लगभग 50-60% अधिक वेतन कमाते हैं, जो मजबूत कौशल-आधारित तकनीकी परिवर्तन को दर्शाता है और निरंतर कौशल उन्नयन को प्रोत्साहित करता है।
  • नवाचार और डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार: AI स्टार्ट-अप्स, डीप-टेक इकोसिस्टम और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के विकास को गति दे रहा है, जिससे भारत की वैश्विक डिजिटल हब और 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की महत्त्वाकांक्षा को बल मिल रहा है।
  • AI इकोसिस्टम विकास के लिए सरकारी प्रयास: केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय इंडियाAI मिशन और फ्यूचरस्किल्स प्राइम (नैसकॉम के सहयोग से) जैसी पहलों को आगे बढ़ा रहा है, जबकि स्किल इंडिया मिशन AI और डिजिटल कौशल विकास को बढ़ावा दे रहा है, जिससे भारत की मानव पूँजी मजबूत हो रही है।

रोजगार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रतिकूल प्रभाव

  • नियमित और शुरुआती स्तर की नौकरियों का विस्थापन: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दोहराव वाले, नियम-आधारित कार्यों को स्वचालित कर रही है, जिससे विशेष रूप से IT सेवाओं, बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (BPO) और लिपिकीय क्षेत्रों में शुरुआती स्तर की भूमिकाएँ प्रभावित हो रही हैं, और इस प्रकार स्नातकों के लिए पारंपरिक प्रवेश मार्ग सीमित हो रहे हैं।
  • भर्ती पैटर्न में संरचनात्मक परिवर्तन: IT क्षेत्र में सामूहिक भर्ती से कौशल-आधारित भर्ती की ओर बदलाव देखा जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप भर्ती लगभग 1.3 लाख (2021-22) से घटकर 70-80 हजार (2024-25) हो गई है, जो कम कुशल कार्यबल की घटती माँग को दर्शाती है।
  • कौशल अंतर और रोजगार क्षमता की चुनौती: सरकारी पहलों के बावजूद, भारत के कार्यबल के एक महत्त्वपूर्ण हिस्से में उन्नत डिजिटल और AI-संबंधित कौशल की कमी है, जिससे उद्योग की माँग और श्रम आपूर्ति के बीच असंतुलन उत्पन्न हो रहा है।
  • असमानता और डिजिटल विभाजन: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कौशल ध्रुवीकरण में योगदान दे रही है, जिससे उच्च कुशल श्रमिकों को लाभ हो रहा है, जबकि कम कुशल श्रमिकों को हाशिए पर धकेला जा रहा है, जिससे आय असमानता और शहरी-ग्रामीण डिजिटल विभाजन बढ़ रहा है।
  • अस्थायी रोजगार हानि और वेतन का दबाव: प्रौद्योगिकी के कारण विस्थापित हुए श्रमिकों को अल्पकालिक बेरोजगारी, वेतन में गिरावट और दीर्घकालिक आय वृद्धि में कमी का सामना करना पड़ता है, जो श्रम बाजारों में समायोजन संबंधी चुनौतियों को दर्शाता है।
  • छँटनी को ‘AI-वॉशिंग’ के माध्यम से सही ठहराना: प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कई छँटनियों का कारण AI को बताया जाता है, लेकिन वास्तव में ये महामारी के दौरान अत्यधिक भर्ती, लागत युक्तिकरण और वैश्विक मंदी के कारण होती हैं, जहाँ AI को एकमात्र कारण के बजाय एक रणनीतिक औचित्य के रूप में उपयोग किया जाता है।

भारत के श्रम बल को AI-अनुकूल बनाने और रोजगार में लचीलापन लाने के लिए उठाए गए कदम

  • इंडियाAI मिशन और फ्यूचरस्किल्स प्राइम पहल-लक्षित कार्यबल परिवर्तन
    • इंडियाAI मिशन के अंतर्गत समर्पित AI कार्यबल स्तंभ: केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के नेतृत्व वाले इंडियाAI मिशन के तहत, फ्यूचरस्किल्स पहल भविष्य के लिए तैयार कार्यबल के निर्माण पर केंद्रित है।
    • विकेंद्रीकृत कौशल विकास 
      • टियर-II और टियर-III समावेशन: छोटे शहरों में AI प्रयोगशालाओं की स्थापना यह सुनिश्चित करती है कि उच्च स्तरीय कौशल विकास बंगलूरू या हैदराबाद जैसे महानगरों तक ही सीमित न रहे, जिससे डिजिटल अवसरों में क्षेत्रीय समानता को बढ़ावा मिले।
    • प्रतिभा सृजन का व्यापक दायरा: यह कार्यक्रम AI में 500 पीएचडी, 5,000 स्नातकोत्तर और 8,000 स्नातक छात्रों को लक्षित करता है, साथ ही लाखों लोगों के लिए बुनियादी AI साक्षरता प्रदान करता है, जिससे विशिष्ट विशेषज्ञता और व्यापक कौशल विकास दोनों सुनिश्चित होते हैं।
    • प्रवेश स्तर की भूमिकाओं के लिए AI डेटा प्रयोगशालाएँ: डेटा एनोटेशन, क्यूरेशन और मॉडल परीक्षण में व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने के लिए 570 से अधिक AI डेटा प्रयोगशालाएँ स्थापित की गई हैं, जिससे AI पारिस्थितिकी तंत्र में प्रवेश स्तर के नए अवसर सृजित हुए हैं।
  • औपचारिक शिक्षा प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का एकीकरण
    • एक मूलभूत जीवन कौशल के रूप में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) (केंद्रीय बजट 2026-27): सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को एक बुनियादी कौशल के रूप में मुख्यधारा में शामिल किया है और इसे स्कूल, व्यावसायिक और उच्च शिक्षा प्रणालियों में समाहित किया है।
    • कंटेंट क्रिएटर और AI प्रयोगशालाओं का विस्तार: भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान के सहयोग से, 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में AI-सक्षम प्रयोगशालाएँ स्थापित की जा रही हैं, जो व्यावहारिक शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा दे रही हैं।
    • युवा AI कार्यक्रम (AI के साथ उन्नति और विकास के लिए युवा): कक्षा 8 से 12 तक के छात्रों को लक्षित करते हुए, उन्हें सामाजिक चुनौतियों के लिए AI-आधारित समाधान विकसित करने में सक्षम बनाता है, जिससे AI-निहित पीढ़ी का निर्माण होता है।
    • व्यावसायिक प्रशिक्षण में पाठ्यक्रम का पुनर्गठन: औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में AI मॉड्यूल को एकीकृत किया जा रहा है, यह सुनिश्चित करते हुए कि श्रमिक वर्ग के श्रमिक भी AI से लाभान्वित हों, न कि विस्थापित हों।
  • वैश्विक सहयोग के माध्यम से मानव पूँजी का सशक्तीकरण
    • ह्यूमन कैपिटल चक्र’ पहल (इंडियाAI इंपैक्ट समिट 2026): भारत ने AI-आधारित रोजगार परिवर्तनों के प्रबंधन के लिए एक वैश्विक ढाँचा प्रस्तावित किया है, जिससे वह नैतिक और समावेशी कार्यबल परिवर्तन में अग्रणी के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।
    • AI कौशल का वैश्विक मानकीकरण: वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त AI प्रमाण-पत्र विकसित करने के प्रयासों का उद्देश्य भारतीय डिजिटल प्रतिभा के निर्यात को सुगम बनाना और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में रोजगार क्षमता को बढ़ाना है।
    • लैंगिक समावेशी AI कार्यबल: ‘AI बाय हर’ (AI by HER) जैसे कार्यक्रम महिला-नेतृत्व वाली AI उद्यमिता और तकनीकी कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जिससे प्रौद्योगिकी क्षेत्र में लैंगिक असमानता को दूर किया जा सके।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) मॉडल
    • फ्यूचरस्किल्स प्राइम प्लेटफॉर्म: केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और नैसकॉम की एक संयुक्त पहल, जो उद्योग-मान्य, मॉड्यूलर AI प्रमाण-पत्र प्रदान करती है, अब प्रत्यक्ष रोजगार संबंधों के लिए जॉब पोर्टल्स के साथ एकीकृत की जा रही है।
    • MSMEs के लिए Dx-EDGE पहल: यह पहल सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) पर केंद्रित है, जो उन्हें उत्पादकता, प्रतिस्पर्द्धात्मकता और रोजगार स्थिरता बढ़ाने के लिए एजेंटिक AI अनुप्रयोगों में प्रशिक्षण प्रदान करती है।
    • उद्योग-नेतृत्व वाले कौशल विकास प्रयास: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और इन्फोसिस जैसी कंपनियाँ AI, क्लाउड और ऑटोमेशन में बड़े पैमाने पर कार्यबल के कौशल विकास के प्रयास कर रही हैं, जिससे उद्योग की माँग और कार्यबल की आपूर्ति में सामंजस्य स्थापित हो सके।
  • श्रम बाजार लचीलापन और सामाजिक सुरक्षा उपाय
    • डेटा-आधारित श्रम बाजार योजना (वर्ष 2026 पहल): भारत ने वास्तविक समय के श्रम बाजार डेटा पर वैश्विक संवाद शुरू किया है, जिससे AI-प्रेरित व्यवधानों का पूर्वानुमान लगाना और पूर्व-कुशल पुनर्प्रशिक्षण रणनीतियों को सुविधाजनक बनाना संभव हो सकेगा।
    • वेतन वृद्धि प्रोत्साहन: विश्व बैंक (2025) और PIB (2026) के हालिया विश्लेषणों के अनुसार, भारत में AI-संबंधित नौकरियों में वेतन वृद्धि होती है, जो कार्यबल को उच्च-मूल्य वाली, प्रौद्योगिकी-आधारित भूमिकाओं की ओर अग्रसर करती है।
    • गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा: सामाजिक सुरक्षा संहिता, वर्ष 2020 के अंतर्गत बनाए गए ढाँचे का उद्देश्य गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को सुरक्षा प्रदान करना है, जो AI-संचालित प्लेटफॉर्मीकरण से तेजी से प्रभावित हो रहे हैं।
  • डिजिटल विभाजन को पाटना और समावेशी परिवर्तन सुनिश्चित करना
    • डिजिटल अवसंरचना का विस्तार: डिजिटल इंडिया और भारतनेट जैसी पहलें ग्रामीण संपर्क को बढ़ा रही हैं, जिससे AI-सक्षम नौकरियों और ऑनलाइन कौशल प्रशिक्षण प्लेटफॉर्मों तक पहुँच संभव हो रही है।
    • कमजोर समूहों के लिए समावेशी कौशल विकास: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा प्रेरित बहिष्कार और असमानता को रोकने और एक न्यायसंगत परिवर्तन सुनिश्चित करने के लिए महिलाओं, ग्रामीण युवाओं और अनौपचारिक श्रमिकों पर केंद्रित प्रयास।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में वैश्विक कार्यवाहियाँ और सर्वोत्तम अभ्यास

  • जोखिम-आधारित विनियमन और नैतिक शासन: यूरोपीय संघ के AI अधिनियम में जोखिम-आधारित फ्रेमवर्क को अपनाया गया है, जो AI को अस्वीकार्य और उच्च-जोखिम वाली प्रणालियों में वर्गीकृत करता है और इसके लिए कठोर अनुपालन मानदंड निर्धारित करता है।
    • यह स्वास्थ्य सेवा और कानून प्रवर्तन जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में पारदर्शिता, जवाबदेही और मानवीय निगरानी सुनिश्चित करता है, साथ ही नवाचार तथा मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखता है।
  • वैश्विक सुरक्षा सहयोग और AI सुरक्षा: देशों ने AI सुरक्षा संस्थान (AISI) स्थापित किए हैं और AI प्रणालियों का रेड-टीमिंग (स्ट्रेस-टेस्टिंग AI सिस्टम) करने और जोखिम आकलन साझा करने के लिए वैश्विक साझेदारियाँ बनाई हैं।
    • यह प्रतिस्पर्द्धा को रोकता है और AI जोखिमों के सामूहिक वैश्विक शासन को बढ़ावा देता है।
  • मानव-केंद्रित कौशल विकास और श्रम संक्रमण: डेनमार्क जैसे देश “फ्लेक्सिक्यूरिटी” मॉडल का पालन करते हैं, जो श्रम लचीलेपन को सामाजिक सुरक्षा के साथ जोड़ता है।
  • डिजिटल संप्रभुता और ओपन-सोर्स AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर वैश्विक साझेदारी (GPAI) बिग टेक पर निर्भरता कम करने के लिए ओपन-सोर्स AI पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देती है।
    • फ्राँस जैसे देश स्वदेशी मूलभूत मॉडलों का समर्थन करते हैं, जो समान नवाचार और तकनीकी संप्रभुता को सक्षम बनाते हैं।
  • नवाचार के लिए नियामक सैंडबॉक्स: संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों ने AI नियामक सैंडबॉक्स शुरू किए हैं, जिससे स्टार्ट-अप नियंत्रित पर्यवेक्षण के तहत प्रौद्योगिकियों का परीक्षण कर सकते हैं।
    • यह जोखिमों का प्रबंधन करते हुए नवाचार-अनुकूल शासन सुनिश्चित करता है।
  • कंप्यूट अवसंरचना में निवेश: संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे वैश्विक हितधारक AI सुपरकंप्यूटर, क्लाउड सिस्टम और डेटा इकोसिस्टम में निवेश कर रहे हैं, क्योंकि वे कंप्यूटिंग शक्ति को दीर्घकालिक प्रतिस्पर्द्धात्मकता और स्वायत्तता के लिए एक रणनीतिक संपत्ति के रूप में पहचानते हैं।
  • AI सामग्री प्रमाणीकरण और भ्रामक सूचना नियंत्रण: G7 देश डीपफेक और भ्रामक सूचनाओं से निपटने के लिए AI वॉटरमार्किंग और सामग्री स्रोत मानकों (जैसे- सिंथआईडी, C2PA) को अपना रहे हैं, जिससे सूचना की अखंडता और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

AI-अनुकूल और लचीले रोजगार के लिए जिन चुनौतियों का समाधान करना आवश्यक 

  • कौशल विकास प्रणाली में संरचनात्मक कमियाँ
    • कौशल विकास में उद्देश्य और क्रियान्वयन में विसंगति: यद्यपि कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा सक्रिय रूप से कौशल विकास का प्रयास कर रहा है, फिर भी अपर्याप्त व्यावहारिक अनुभव और उद्योग की आवश्यकताओं के साथ कमजोर तालमेल के कारण सीखने के प्रयासों और वास्तविक रोजगार परिणामों के बीच एक महत्त्वपूर्ण अंतर बना हुआ है।
    • कौशल विकास को ‘निजी बोझ’ के रूप में देखना: कौशल विकास (Upskilling) को अक्सर एक व्यक्तिगत जिम्मेदारी माना जाता है, जिसे कार्य के घंटों के बाहर पूरा किया जाता है, जबकि कार्यस्थल की संरचना या जॉब डिजाइन में इसके अनुरूप कोई बदलाव नहीं किए जाते हैं।
      • इसके परिणामस्वरूप थकान, बर्नआउट और सीखने के कम प्रभावी परिणाम सामने आते हैं।
    • कॉरपोरेट निवेश और समर्थन की कमी: भले ही 80% से अधिक कर्मचारी संगठनात्मक समर्थन की अपेक्षा रखते हैं, लेकिन केवल 71% को ही ऐसी सहायता प्राप्त होती है।
      • यह नियोक्ता के नेतृत्व वाले कौशल निवेश में एक प्रणालीगत अंतराल को दर्शाता है, जो बड़े पैमाने पर कार्यबल परिवर्तन की प्रक्रिया को कमजोर करता है।
  • रोजगार विस्थापन, प्रवेश स्तर पर नौकरियों की कमी और श्रम बाजार का ध्रुवीकरण
    • प्रवेश स्तर पर नौकरियों के घटते अवसर: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेजी से उन नियमित, कम जटिल कार्यों को स्वचालित कर रही है, जो परंपरागत रूप से नए स्नातकों के लिए प्रवेश बिंदु का काम करते थे (उदाहरण के लिए, प्रति वर्ष लगभग 2.5 लाख कंप्यूटर विज्ञान स्नातक), जिससे प्रारंभिक रोजगार के अवसर सीमित हो रहे हैं।
    • मध्य-कॅरियर भूमिकाओं की बढ़ती असुरक्षा: पूर्व की अपेक्षाओं के विपरीत, मध्य-स्तरीय प्रबंधकीय और समन्वय भूमिकाएँ भी असुरक्षित होती जा रही हैं, क्योंकि AI प्रणालियाँ परियोजना प्रबंधन, समय-निर्धारण और कार्यप्रवाह अनुकूलन कार्यों का प्रबंधन कर रही हैं।
    • ध्रुवीकृत “वी-शेप” श्रम बाजार का उदय: AI को अपनाने से एक ऐसा श्रम बाजार बन रहा है, जहाँ उच्च-कुशल पेशेवरों और निम्न-कुशल मैनुअल श्रमिकों को लाभ हो रहा है, जबकि मध्यम-कुशल नौकरियाँ सिकुड़ रही हैं, जिससे असमानता और संरचनात्मक रोजगार असंतुलन बढ़ रहा है।
  • तकनीकी निर्भरता और वैश्विक बाजार में एकाग्रता
    • वैश्विक स्तर पर AI क्षमताओं का केंद्रीकरण: आर्थिक सर्वेक्षण वर्ष 2025-26 में उजागर हुआ है कि उच्च स्तरीय कंप्यूटिंग अवसंरचना, विशाल डेटासेट और मूलभूत मॉडल जैसे महत्त्वपूर्ण AI इनपुट कुछ वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों के हाथों में केंद्रित हैं, जिससे भारत की तकनीकी स्वायत्तता सीमित हो जाती है।
    • डेटा संप्रभुता और मूल्य अधिग्रहण के जोखिम: यह चिंता बढ़ रही है कि भारतीय डेटा से उत्पन्न आर्थिक मूल्य का एक बड़ा हिस्सा विदेशी संस्थाओं द्वारा हथिया लिया जा सकता है, जिससे डिजिटल संप्रभुता, आर्थिक रिसाव और रणनीतिक निर्भरता के मुद्दे उठते हैं।
  • अवसंरचना संबंधी बाधाएँ और AI विकास की उच्च लागत
    • उन्नत कंप्यूटिंग संसाधनों तक सीमित पहुँच: अत्याधुनिक कंप्यूटिंग अवसंरचना (जीपीयू, क्लाउड सिस्टम) की उच्च लागत भारतीय कंपनियों और संस्थानों की वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्द्धी AI मॉडल विकसित करने की क्षमता को सीमित करती है।
    • रणनीतिक समझौता – सामान्य AI बनाम अनुप्रयोग-विशिष्ट AI: भारत के सामने एक महत्त्वपूर्ण नीतिगत विकल्प है: या तो महँगे, बड़े पैमाने पर सामान्य AI मॉडल में निवेश करना या कृषि, स्वास्थ्य सेवा और शासन जैसे क्षेत्रों के लिए अधिक लागत प्रभावी और विशिष्ट रूप से ‘छोटे AI’ समाधानों को प्राथमिकता देना।
    • लगातार बनी हुई डिजिटल असमानता: किफायती उपकरणों, विश्वसनीय इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता की अपर्याप्त उपलब्धता, विशेष रूप से ग्रामीण और कम सुविधा प्राप्त क्षेत्रों में, AI-संचालित अर्थव्यवस्था में व्यापक भागीदारी को सीमित करती है।
  • असमानता, बहिष्कार और सामाजिक विभाजन
    • बढ़ती कौशल और आय असमानता: AI-संचालित विकास से उच्च-कुशल व्यक्तियों को असमान रूप से लाभ होता है, जिससे डिजिटल रूप से कुशल और गैर-कुशल श्रमिकों के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है और इस प्रकार आय असमानता और भी गंभीर हो रही है।
    • लिंग और अनौपचारिक क्षेत्र का बहिष्कार: लक्षित पहलों के बावजूद, महिलाएँ, अनौपचारिक श्रमिक और हाशिए पर रहने वाले समूह AI-संबंधित अवसरों तक पहुँचने में संरचनात्मक बाधाओं का सामना करते रहते हैं, जिससे AI-आधारित विकास की समावेशिता सीमित हो जाती है।
  • संस्थागत और नीतिगत समन्वय चुनौतियाँ
    • खंडित शासन और कार्यान्वयन संबंधी समस्याएँ: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और स्किल इंडिया मिशन जैसी विभिन्न एजेंसियों की कई पहलें अक्सर अलग-अलग संचालित होती हैं, जिससे दोहराव, समन्वय संबंधी चुनौतियाँ और कम अनुकूल परिणाम प्राप्त होते हैं।
    • कमजोर उद्योग-अकादमिक संबंध: अकादमिक पाठ्यक्रम और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच एक निरंतर अंतराल बना हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है जहाँ औपचारिक योग्यताएँ अनिवार्य रूप से नौकरी के लिए तैयार कौशल में परिवर्तित नहीं हो पातीं हैं।
  • नैतिक, विनियामक और श्रम बाजार संबंधी जोखिम
    • असंतुलित और तीव्र AI तैनाती: AI प्रौद्योगिकियों को अनियंत्रित या तीव्र गति से अपनाने से अर्थव्यवस्था की विस्थापित श्रमिकों को समायोजित करने की क्षमता से कहीं अधिक तेजी से रोजगार विस्थापन हो सकता है, जिससे सामाजिक और आर्थिक व्यवधान उत्पन्न हो सकते हैं।
    • भ्रामक सूचना, डीपफेक और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ: AI द्वारा उत्पन्न भ्रामक सूचना और डीपफेक सामाजिक एकता, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा करते हैं, जिसके लिए मजबूत और अनुकूलनीय विनियामक ढाँचों की आवश्यकता है।
    • अपर्याप्त सामाजिक सुरक्षा और संक्रमणकालीन सहायता: मौजूदा ढाँचे गिग वर्कर्स और विस्थापित कर्मचारियों को सीमित सुरक्षा प्रदान करते हैं, जो मजबूत सामाजिक सुरक्षा जाल, कौशल विकास सहायता और श्रम बाजार संक्रमणकालीन तंत्रों की आवश्यकता को उजागर करते हैं।

आगे की राह

  • कौशल-प्रधान श्रम बाजार की ओर संक्रमण
    • डिग्री से योग्यता-आधारित भर्ती की ओर: डिग्री-केंद्रित भर्ती से हटकर कौशल-प्रधान दृष्टिकोण अपनाएँ, जिसमें विशिष्ट, नौकरी के लिए तैयार योग्यताओं को दर्शाने वाले सूक्ष्म प्रमाण-पत्रों और संचयी प्रमाणनों (जैसे= प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, AI सेफ्टी टेस्टिंग) को मान्यता दी जाए।
    • शिक्षा में अनुभवात्मक अधिगम को समाहित करना: इंटर्नशिप, प्रशिक्षुता और उद्योग में सक्रिय परियोजनाओं को उच्च शिक्षा का अभिन्न और अनिवार्य घटक बनाएँ, यह सुनिश्चित करते हुए कि स्नातक पहले दिन से ही कार्यकुशल हों।
  • स्वदेशी और संप्रभु AI अवसंरचना को मजबूत करना
    • घरेलू कंप्यूटिंग क्षमता का विस्तार: प्रारंभिक सफलता के आधार पर, भारत का लक्ष्य स्टार्ट-अप और शोधकर्ताओं के लिए प्रवेश बाधाओं को कम करने के लिए उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग अवसंरचना (जैसे- 38,000 से अधिक GPU और वर्ष 2027 तक लगभग 20,000 और GPU की योजना) को बढ़ाना है।
    • बहुभाषी और प्रासंगिक डेटासेट विकसित करना: भारत-विशिष्ट, बहुभाषी डेटासेट में निवेश करना ताकि सरल अनुवाद से आगे बढ़कर रेफरेंस-अवेयरनेस AI सिस्टम’ विकसित किए जा सकें जो स्थानीय भाषाओं, संस्कृतियों और सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करते हों।
  • कार्य मॉडल की पुनर्कल्पना – “मानव + AI” तालमेल
    • परिणाम-आधारित सेवा मॉडल की ओर परिवर्तन: उद्योगों, विशेष रूप से IT सेवाओं को, ‘टाइम-बेस्ड बिलिंग’ से परिणाम-आधारित वितरण की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें, जिससे प्रोत्साहन दक्षता, नवाचार और मूल्य सृजन के साथ संरेखित हों।
    • AI-संवर्द्धित कार्यबल भूमिकाओं को बढ़ावा देना: कर्मचारियों को AI के साथ “सह-निर्माता” के रूप में कार्य करने के लिए प्रशिक्षित करें, जहाँ पेशेवर कई AI उपकरणों/एजेंटों का पर्यवेक्षण और समन्वय करते हैं, जिससे उत्पादकता बढ़ती है न कि प्रतिस्थापित होती है।
  • कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र और संस्थागत क्षमता को सुदृढ़ बनाना
    • उद्योग-अकादमिक संबंधों को मजबूत करना: शिक्षा जगत, उद्योग और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय जैसे संस्थानों के सहयोग से उभरती प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करते हुए, पाठ्यक्रमों को उद्योग की माँगों के अनुरूप निरंतर रूप से ढालना।
    • नियोक्ता-नेतृत्व वाले और आजीवन अधिगम मॉडल को बढ़ावा देना: 17% नियोक्ता समर्थन अंतर को दूर करने के लिए उद्योग निवेश और स्किल इंडिया मिशन जैसी पहलों द्वारा समर्थित निरंतर कार्यस्थल अधिगम पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देना।
  • मजबूत और नैतिक AI शासन ढाँचा तैयार करना
    • जिम्मेदार AI तंत्रों को संस्थागत रूप देना: विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवा और वित्त जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में पूर्वाग्रह ऑडिट, निष्पक्षता मूल्यांकन और जवाबदेही जाँच करने के लिए AI सुरक्षा संस्थान और AI शासन समूह जैसे निकायों की स्थापना करना।
    • डेटा-संचालित श्रम बाजार लचीलापन प्रणाली: AI व्यवधान के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने और पूर्व-कुशल पुनर्प्रशिक्षण, संक्रमण निधि और लक्षित नीतिगत सहायता प्रदान करने के लिए वास्तविक समय के श्रम बाजार डेटा का उपयोग करना।
  • समावेशी विकास और व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करना
    • ऑरेंज इकोनॉमी’ को बढ़ावा देना: एनिमेशन, गेमिंग, डिजिटल कंटेंट क्रिएशन जैसे रचनात्मक उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए AI का लाभ उठाना, जिससे भारत के युवा वर्ग के लिए मुख्य तकनीकी क्षेत्रों से परे रोजगार के अवसर सृजित हो सकें।
    • जेंडर-समावेशी AI ट्रांजिशन: AI बाय हर (AI by HER) जैसी पहलों का विस्तार करना ताकि AI उद्यमिता, नेतृत्व और तकनीकी भूमिकाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित हो सके और जेंडर-आधारित डिजिटल बहिष्कार को नियंत्रित किया जा सके।
  • डिजिटल विभाजन को पाटना और MSME का समर्थन करना
    • डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) का विस्तार: किफायती इंटरनेट, उपकरणों और डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुँच को मजबूत करना, ताकि ग्रामीण और हाशिए पर रहने वाली आबादी AI अर्थव्यवस्था में भाग ले सके।
    • MSME और अनौपचारिक क्षेत्र के लिए AI को अपनाना: प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और उपकरणों (जैसे- एजेंटिक AI) के माध्यम से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के बीच AI को अपनाने को बढ़ावा देना, जिससे उत्पादकता, प्रतिस्पर्द्धात्मकता और रोजगार की स्थिरता में वृद्धि हो।

निष्कर्ष 

भारत के लिए आगे बढ़ने का मार्ग कौशल-आधारित रोजगार, तकनीक संप्रभुता, मानव-AI सहयोग, नैतिक शासन और समावेशी विकास पर केंद्रित एक संतुलित AI पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में निहित है। इन उपायों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक संभावित व्यवधानकर्ता से सतत्, न्यायसंगत और भविष्य के लिए तैयार रोजगार के एक शक्तिशाली प्रवर्तक के रूप में विकसित हो सकती है।

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