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Lokesh Pal
April 18, 2026 03:15
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एक ऐतिहासिक निर्णय में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महिला को अपने पति, जो वर्तमान में ‘वेजिटेटिव’ अवस्था (Vegetative State) में हैं और एक भारतीय सैनिक हैं, के ‘शुक्राणु’ (स्पर्म) निष्कर्षण एवं संरक्षण की अनुमति प्रदान की है।

पूर्व उदाहरण: यूनाइटेड किंगडम (UK) में वर्ष 2018 के एक उच्च न्यायालय के निर्णय में, जीवन रक्षक प्रणाली पर निर्भर एक अचेत व्यक्ति से शुक्राणु प्राप्त करने की अनुमति दी गई, क्योंकि यह प्रमाणित हुआ कि दंपत्ति पूर्व में संतान प्राप्ति की इच्छा व्यक्त कर चुके थे।
यद्यपि यह प्रक्रिया चिकित्सकीय रूप से संभव है, तथापि ‘पेरिमॉर्टम स्पर्म’ निष्कर्षण से संबंधित अनेक चिकित्सीय, नैतिक एवं विधिक अनिश्चितताएँ हैं, जिनका सावधानीपूर्वक परीक्षण एवं संतुलित समाधान आवश्यक है।
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