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Lokesh Pal
June 15, 2026 03:43
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हाल ही में भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम [Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques (PCPNDT) Act] की धारा 23 के तहत आरोपों को चुनौती देने वाली एक चिकित्सक की अपील को खारिज कर दिया।


सर्वोच्च न्यायालय का कड़ा रुख यह सिद्ध करता है कि गहरी जड़ें जमा चुकी सामाजिक समस्याओं को केवल कानूनी ढाँचे के बल पर ठीक नहीं किया जा सकता है। भारत की महिला आबादी के अस्तित्व को सुरक्षित करने के लिए, सरकार को तकनीक के दुरुपयोग के विरुद्ध अपनी कठोर प्रशासनिक शून्य-सहनशीलता की नीति के साथ-साथ एक बड़े सांस्कृतिक परिवर्तन में संतुलन बनाना होगा, जो बेटियों को समान, स्वतंत्र आर्थिक और सामाजिक संपत्ति के रूप में महत्त्व दे।
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