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Lokesh Pal
May 02, 2026 02:30
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‘जनहित याचिका’ (PIL) पर पुनर्विचार की बहस उस समय पुनः उभरकर सामने आई जब केंद्र सरकार ने सबरीमाला संदर्भ मामले के दौरान एजेंडा-प्रेरित PIL की संख्या में वृद्धि को लेकर चिंता व्यक्त की।
जनहित याचिका (PIL) भारत के संवैधानिक लोकतंत्र का एक आधार स्तंभ बनी हुई है, जो वंचित वर्गों के लिए न्याय तक पहुँच सुनिश्चित करती है। तथापि, इसके दुरुपयोग को देखते हुए इसकी वैधता को बनाए रखने, न्यायिक अतिक्रमण को रोकने तथा प्रभावी एवं उत्तरदायी शासन सुनिश्चित करने हेतु संतुलित सुधारों की आवश्यकता है।
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