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श्वेत क्रांति 2.0

Lokesh Pal February 12, 2026 03:27 4 0

संदर्भ

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में श्वेत क्रांति 2.0 पर चर्चा की।

श्वेत क्रांति 2.0 के बारे में

  • यह एक ऐसी पहल है, जिसका उद्देश्य दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देना, महिला सशक्तीकरण को प्रोत्साहित करना तथा कुपोषण की समस्या का समाधान करना है।
  • श्वेत क्रांति 2.0 चार प्राथमिक क्षेत्रों पर केंद्रित है
    • महिला सशक्तीकरण
      • औपचारिक आर्थिक प्रणालियों में एकीकृत कर महिला दुग्ध उत्पादकों को सशक्त बनाने का लक्ष्य।
      • महिला-नेतृत्व वाली डेयरी संस्थाओं एवं स्वयं सहायता समूह (SHG) के साथ जुड़ाव को सुदृढ़ करना।
    • स्थानीय दुग्ध उत्पादन में वृद्धि
      • यह पहल अगले पाँच वर्षों में डेयरी सहकारी समितियों द्वारा दुग्ध संग्रहण में 50 प्रतिशत वृद्धि करने का लक्ष्य रखती है।
      • सहकारी-नेतृत्व वाले दुग्ध संग्रहण को प्रतिदिन 660 लाख किलोग्राम से बढ़ाकर 1,007 लाख किलोग्राम करने का लक्ष्य।
    • डेयरी अवसंरचना को सुदृढ़ करना
      • बड़े पैमाने पर सहकारी विकास: श्वेत क्रांति 2.0 के अंतर्गत लगभग 1.20 लाख नई एवं मौजूदा सहकारी संस्थाओं की स्थापना एवं सुदृढ़ीकरण शामिल है, जिनमें शामिल हैं—
        • डेयरी सहकारी समितियाँ (DCS)
        • बहुउद्देशीय डेयरी सहकारी समितियाँ (M-DCS)
        • बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ (M-PACS)।
    • डेयरी निर्यात को बढ़ावा देना।
      • वर्ष 2030 तक वैश्विक दुग्ध उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी को एक-चौथाई से बढ़ाकर एक-तिहाई करने का लक्ष्य।
  • नोडल मंत्रालय: सहकारिता मंत्रालय।
  • कार्यान्वयन सहयोग: पशुपालन एवं डेयरी विभाग (DAHD), राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB), तथा राज्य डेयरी संघ।
  • वित्तपोषण: श्वेत क्रांति 2.0 के अंतर्गत गतिविधियों को पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अंतर्गत राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम 2.0 (NPDD 2.0) के माध्यम से वित्तपोषित किया जा रहा है।
  • कवरेज विस्तार योजनाएँ
    • अविकसित क्षेत्रों में नई सहकारी समितियाँ: कार्यक्रम के अंतर्गत अनावृत क्षेत्रों में 75,000 नई डेयरी सहकारी समितियों की स्थापना का प्रस्ताव है।
    • मौजूदा सहकारी समितियों को सुदृढ़ करना: लगभग 46,422 मौजूदा DCS को बाजर पहुँच, आय के अवसरों एवं पोषण उपलब्धता में सुधार हेतु सुदृढ़ किया जाएगा।

भारत में डेयरी क्षेत्र

  • वैश्विक स्थिति
    • भारत वर्ष 1998 से विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक बना हुआ है (वैश्विक दुग्ध उत्पादन का 25%), जो अमेरिका एवं पाकिस्तान से आगे है।
    • कुल दुग्ध उत्पादन 247.87 मिलियन टन (2024–25) तक पहुँच गया, जो 239.30 मिलियन टन (2023–24) की तुलना में 3.58% की वृद्धि दर्शाता है।
    • न्यूजीलैंड डेयरी उत्पादों का सबसे बड़ा निर्यातक है, जबकि चीन विश्व का सबसे बड़ा डेयरी आयातक है।
      • भारत दुग्ध निर्यात में 49वें स्थान पर है, जो सीमित निर्यात उपस्थिति को दर्शाता है।
  • प्रति व्यक्ति उपलब्धता: 319 ग्राम/दिन (2014–15) से बढ़कर 485 ग्राम/दिन (2024–25)।
  • शीर्ष दुग्ध उत्पादक राज्य: बेसिक एनिमल हसबैंड्री स्टैटिस्टिक्स 2025 के अनुसार, प्रमुख उत्पादक राज्य हैं— उत्तर प्रदेश (15.66%), राजस्थान (14.82%), मध्य प्रदेश (9.12%), गुजरात (7.78%), महाराष्ट्र (6.71%)।
  • कृषि GDP में योगदान: दुग्ध समूह (दुग्ध, घी, मक्खन, लस्सी) ने वित्त वर्ष 2022–23 में कृषि, पशुधन, वानिकी एवं मत्स्य क्षेत्र के कुल उत्पादन मूल्य में लगभग 40% का योगदान दिया।

श्वेत क्रांति के बारे में

  • तीन दशकों में तीन चरणों में लागू किया गया एक राष्ट्रव्यापी सहकारी दुग्ध आंदोलन, जिसका नेतृत्व सामाजिक उद्यमियों, राजनीतिक नेतृत्व एवं लाखों दुग्ध उत्पादकों ने किया।
  • प्रारंभ: “ऑपरेशन फ्लड” की शुरुआत वर्ष 1970 में हुई, जिससे भारत में ‘श्वेत क्रांति’ की शुरुआत हुई।
  • नेतृत्व: डॉ. वर्गीज कुरियन के नेतृत्व में, जिन्होंने गुजरात के आणंद से विश्व के सबसे बड़े डेयरी विकास कार्यक्रम का संचालन किया।
  • उद्देश्य: सहकारी-आधारित डेयरी विकास के माध्यम से भारत को दुग्ध की कमी वाले देश से विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक बनाना।

ऑपरेशन फ्लड के चरण

  • चरण I (1970–1980): आधार चरण
    • 10 राज्यों को शामिल किया किया।
    • ग्रामीण दुग्ध संग्रहण 0.46 मिलियन लीटर/दिन (1960 के दशक) से बढ़कर 2.2 मिलियन लीटर/दिन हुआ।
  • चरण II (1981–1985): विस्तार चरण
    • 43,000 गाँवों तक विस्तार; 42.5 लाख उत्पादकों को शामिल किया किया।
    • 290 शहरी बाजारों को आपूर्ति करने वाले 136 मिल्क शेड स्थापित किए गए।
  • चरण III (मध्य 1980 के दशक से मध्य 1990 के दशक तक): समेकन चरण
    • सदस्यता बढ़कर 1 करोड़ कृषि परिवारों तक पहुँची।
    • पशु चिकित्सा स्वास्थ्य, नस्ल सुधार, उत्पादकता वृद्धि एवं डेयरी सहकारी संस्थाओं को सुदृढ़ करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

भारत में डेयरी सहकारी समितियाँ

  • डेयरी सहकारी समितियाँ भारत के लगभग 70% जिलों में कार्यरत हैं, जो व्यापक संस्थागत पहुँच को दर्शाता है।
  • वर्ष 2025 तक, भारत की सहकारी डेयरी प्रणाली में शामिल हैं: 22 दुग्ध महासंघ, 241 जिला सहकारी संघ, 28 विपणन डेयरी एवं 25 दुग्ध उत्पादक संगठन (MPOs)।
  • ये मिलकर लगभग 2.35 लाख गाँवों को कवर करते हैं और 1.72 करोड़ दुग्ध उत्पादकों को सदस्य के रूप में शामिल करते हैं।
  • मजबूत सहकारी उपस्थिति वाले राज्य हैं: गुजरात, महाराष्ट्र, केरल, सिक्किम, पुदुचेरी।
  • NDDB डेयरी सेवाओं के अंतर्गत 48,000 से अधिक महिला-नेतृत्व वाली सहकारी समितियाँ एवं 16 पूर्णतः महिला MPOs संचालित हैं।
    • आंध्र प्रदेश की पूर्णतः महिला-नेतृत्व वाली श्रीजा MPO सशक्तीकरण का प्रमुख उदाहरण है।
  • बहु-राज्यीय डेयरी सहकारी समितियों के उदाहरण
    • कामधेनु डेयरी मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड
    • नेचर डिलाइट मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी एंड एग्रो प्रोडक्ट्स लिमिटेड

डेयरी क्षेत्र हेतु अन्य सरकारी पहलें

  • राष्ट्रीय गोकुल मिशन (2014): स्वदेशी गौवंशीय नस्लों के संरक्षण, संवर्द्धन एवं वैज्ञानिक विकास हेतु प्रारंभ, जिससे दुग्ध उत्पादकता में वृद्धि हो सके।
  • राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD) (2014): राज्य कार्यान्वयन एजेंसियों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पादन, संग्रहण, प्रसंस्करण एवं विपणन हेतु अवसंरचना को सुदृढ़ करने का लक्ष्य।
  • पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (LHDCP) (2019): एफएमडी, ब्रुसेलोसिस, क्लासिकल स्वाइन फीवर (CSF) जैसी प्रमुख बीमारियों के टीकाकरण हेतु राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता तथा उभरती एवं जूनोटिक बीमारियों के नियंत्रण हेतु ASCAD का समर्थन।
  • राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम (NAIP) (2019): कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से वैज्ञानिक प्रजनन को बढ़ावा देना, उत्पादकता में सुधार तथा प्रजनन/जननांग संबंधी रोगों की रोकथाम। इस कार्यक्रम के अंतर्गत किसानों को घर के द्वार पर निःशुल्क पशु गर्भाधान सेवाएँ प्रदान की जाती हैं।
  • पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (AHIDF) (2020): आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत डेयरी प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन एवं अवसंरचना निर्माण हेतु स्थापित।
  • राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) (2014–15): रोजगार सृजन, उद्यमिता, प्रति पशु उत्पादकता में वृद्धि तथा दुग्ध, मांस, अंडे एवं ऊन के उत्पादन में वृद्धि पर बल देते हुए पशुधन क्षेत्र की सतत् वृद्धि को बढ़ावा देना।

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