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Lokesh Pal
March 12, 2026 05:00
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केंद्र सरकार तथा भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा भारत के भूकंप क्षेत्र निर्धारण में किए गए संशोधन को वापस लेने का निर्णय लिया गया है। इसके पीछे पद्धति (methodology) को लेकर विद्यमान चिंताएँ और निर्माण तथा अवसंरचना परियोजनाओं पर बढ़ने वाली लागत प्रमुख कारण रहे।
भारत में भूकंपीय जोनिंग सुधार में वैज्ञानिक जोखिम मूल्यांकन, लागत क्षमता और व्यावहारिक क्रियान्वयन के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, ताकि आपदा-प्रतिरोधी निर्मित वातावरण तैयार किया जा सके।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्नप्रश्न: भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा प्रस्तावित संशोधित भूकंप जोनिंग ढाँचे को हाल ही में वापस लेना (Rollback) इस बात को दर्शाता है कि आपदा-लचीलापन (Disaster Resilience), आर्थिक व्यवहार्यता (Economic Viability) और जलवायु शमन (Climate Mitigation) के बीच जटिल संतुलन मौजूद है। भारत के तेजी से बढ़ते शहरी अवसंरचना के संदर्भ में इस कथन का विश्लेषण कीजिए तथा भूकंपीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण सुझाइए। (15 अंक, 250 शब्द) |
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