100% तक छात्रवृत्ति जीतें

रजिस्टर करें

भारत में जंक फूड विज्ञापनों के प्रबंधन में कमी से उत्पन्न चुनौतियाँ

Lokesh Pal June 22, 2026 05:15 10 0

संदर्भ

टेलीविजन, सोशल मीडिया, सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट और बच्चों को लक्षित करने वाले अभियानों के माध्यम से उच्च वसा, चीनी और सोडियम (HFSS) युक्त खाद्य पदार्थों तथा अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों (Ultra-Processed Foods – UPFs) के आक्रामक विपणन (मार्केटिंग) ने एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता का रूप ले लिया है। यह सूचित विकल्प के अधिकार, विशेष रूप से बच्चों के अधिकार से समझौता करता है, जबकि भारत में मोटापे, मधुमेह, उच्च रक्तचाप तथा अन्य गैर-संचारी रोगों (NCDs) के बोझ को और गंभीर बनाता है।

प्रमुख अवधारणाएँ

  • HFSS खाद्य पदार्थ: HFSS से तात्पर्य उच्च वसा, चीनी और सोडियम (High in Fat, Sugar and Sodium) वाले खाद्य पदार्थों से है, जो अत्यधिक स्वादिष्ट होते हैं लेकिन पोषण के मामले में बेहद खराब होते हैं।
  • अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ (Ultra-Processed Foods): अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स कारखानों में निर्मित किए जाने वाले ऐसे उत्पाद हैं जिनमें एडिटिव्स (योजक), प्रिजर्वेटिव्स (परिरक्षक), सिंथेटिक फ्लेवर (कृत्रिम स्वाद), इमल्सीफायर, स्वीटनर (कृत्रिम मिठास) और एसिडिटी रेगुलेटर शामिल होते हैं।
  • ब्लिस पॉइंट : ब्लिस पॉइंट चीनी, नमक और वसा का वैज्ञानिक रूप से तैयार किया गया ऐसा संयोजन (कॉम्बिनेशन) है, जो स्वाद को अधिकतम करता है और बार-बार खाने की आदत को ट्रिगर करता है।
  • सूचित विकल्प का अधिकार (Right to informed choice): उपभोक्ताओं, विशेष रूप से बच्चों और माता-पिता को उपभोग के निर्णय लेने से पहले खाद्य उत्पादों के बारे में सटीक और पूरी जानकारी मिलनी चाहिए।

जंक फूड विज्ञापन उपभोक्ताओं के साथ कैसे हेरफेर करते हैं?

  • चयनात्मक प्रकटीकरण (Selective Disclosure): कंपनियाँ “बेक्ड”, “मैदा मुक्त”, “12 अनाज”, “उच्च फाइबर”, या “प्राकृतिक” जैसे सकारात्मक दावों को उजागर करती हैं, जबकि चीनी, वसा, सोडियम और एडिटिव्स के उच्च स्तर को छुपाती हैं।
  • अस्वास्थ्यकर उत्पादों की हेल्थ-वाशिंग: भ्रामक पैकेजिंग, चयनात्मक लेबलिंग और आकर्षक पोषण संबंधी दावों के माध्यम से अस्वास्थ्यकर उत्पादों को स्वस्थ उत्पाद के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
  • सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट: प्रसिद्ध हस्तियाँ विश्वास और भावनात्मक अपील उत्पन्न करती हैं, जिससे बच्चों और परिवारों द्वारा भ्रामक स्वास्थ्य दावों को स्वीकार करने की संभावना बढ़ जाती है।
  • बच्चों को लक्षित करना : बच्चे कार्टून, जिंगल्स (आकर्षक धुन), रंगीन पैकेजिंग, गेमिंग टाई-इन्स और इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग के प्रति संवेदनशील होते हैं, क्योंकि उनमें परिपक्व पोषण संबंधी निर्णय क्षमता की कमी होती है।
  • माँग का सृजन: विज्ञापन केवल उपभोक्ता की माँग को नहीं दर्शाते; वे सक्रिय रूप से लालसा (Cravings), आकांक्षाएँ और बार-बार खरीदने के व्यवहार को उत्पन्न करते हैं।
  • डिजिटल प्रवर्द्धन: सोशल मीडिया और शॉर्ट-वीडियो प्लेटफॉर्म ब्रांडों को एल्गोरिदम-संचालित विज्ञापनों के माध्यम से बच्चों तथा युवाओं को बार-बार लक्षित करने की अनुमति देते हैं।

सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

  • मोटापा: उच्च कैलोरी और निम्न पोषण युक्त खाद्य पदार्थ अस्वास्थ्यकर वजन बढ़ाने में योगदान करते हैं, विशेष रूप से बच्चों में।
  • मधुमेह और इंसुलिन प्रतिरोध: उच्च चीनी और परिष्कृत (Refined) कार्बोहाइड्रेट सामग्री टाइप-2 मधुमेह के जोखिम को बढ़ाती है।
  • उच्च रक्तचाप (Hypertension): अतिरिक्त सोडियम का सेवन उच्च रक्तचाप में योगदान देता है।
  • हृदय रोग : उच्च वसा, चीनी और नमक का सेवन हृदय रोग के जोखिम को बढ़ाता है।
  • आंत्र स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँ: एडिटिव्स, इमल्सीफायर और सिंथेटिक सामग्रियाँ आंत्र के माइक्रोबायोटा और पाचन को प्रभावित कर सकती हैं।
  • अस्वास्थ्यकर आदतों का शीघ्र निर्मित होना: बचपन में जंक फूड के विज्ञापनों के संपर्क में आने से दीर्घकालिक भोजन प्राथमिकताएँ बन जाती हैं, तथा पारंपरिक आहार संबंधी आदतें कमजोर होती हैं।

शासन और विनियामकीय चिंताएँ

  • नियामक शून्यता : भारत ने HFSS और अस्वास्थ्यकर खाद्य विपणन पर प्रतिबंधों पर चर्चा की है, लेकिन प्रवर्तन कमजोर और खंडित बना हुआ है।
  • पैकेट पर कमजोर लेबलिंग: स्पष्ट चेतावनी लेबल के बिना, उपभोक्ता पैकेज्ड खाद्य पदार्थों के वास्तविक स्वास्थ्य जोखिम को नहीं समझ पाते हैं।
  • स्कूली भोजन परिदृश्य: यदि बच्चों को स्कूल की कैंटीन, पास की दुकानों और मीडिया विज्ञापनों में जंक फूड मिलता है, तो केवल पोषण शिक्षा अप्रभावी सिद्ध होती है।
  • कॉर्पोरेट लाभ बनाम सार्वजनिक स्वास्थ्य: खाद्य कंपनियाँ दीर्घकालिक सार्वजनिक स्वास्थ्य पर बिक्री, बाजार हिस्सेदारी तथा ब्रांड निष्ठा को प्राथमिकता दे सकती हैं।
  • भ्रामक डिजिटल विज्ञापन: इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग और छिपे हुए सशुल्क प्रचार (Paid Promotions) नई नियामक चुनौतियाँ उत्पन्न करते हैं।

नीतिगत और न्यायिक संदर्भ

  • राष्ट्रीय बहु-क्षेत्रीय कार्य योजना : भारत के नीतिगत ढाँचे ने गैर-संचारी रोगों पर ध्यान देने और HFSS खाद्य पदार्थों को विनियमित करने की आवश्यकता को मान्यता दी है, लेकिन इसका कार्यान्वयन अभी भी सीमित बना हुआ है।
  • सर्वोच्च न्यायालय की चिंता: भ्रामक विज्ञापनों को तेजी से उपभोक्ता-अधिकारों और सार्वजनिक-स्वास्थ्य के मुद्दे के रूप में देखा गया है, जो विशेष रूप से संवेदनशील समूहों को प्रभावित कर रहे हैं।
  • आर्थिक सर्वेक्षण की चिंता: हाल की नीतिगत चर्चाओं ने अस्वास्थ्यकर आहार और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों को महत्त्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिमों के रूप में चिह्नित किया है।
  • FSSAI के नेतृत्व में विनियमन: खाद्य नियामक को पारदर्शी लेबलिंग, सख्त पोषण मानकों और भ्रामक दावों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

वैश्विक सर्वोत्तम अभ्यास 

  • चिली: चिली अस्वास्थ्यकर खाद्य उत्पादों की पहचान करने के लिए पैकेट के सामने चेतावनी लेबल का उपयोग करता है।
  • मेक्सिको: मेक्सिको ने अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों के अत्यधिक उपभोग को हतोत्साहित करने के लिए चेतावनी लेबल तथा विनियामक कदम उठाए हैं।
  • ब्राजील: ब्राजील अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के उपभोग को हतोत्साहित करता है और स्वास्थ्यप्रद आहार दिशानिर्देशों तथा स्कूली भोजन विनियमन को बढ़ावा देता है।

आगे की राह

  • अनिवार्य फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल: चीनी, नमक या वसा की उच्च मात्रा वाले उत्पादों पर तंबाकू की चेतावनियों के समान स्पष्ट चेतावनी लेबल होने चाहिए।
  • पिगोवियन कराधान (Pigovian taxation): सामाजिक स्वास्थ्य लागत थोपने वाले अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों पर उपभोग को हतोत्साहित करने तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य को वित्तपोषित करने के लिए उच्च कराधान लगाया जाना चाहिए।
  • विज्ञापन-मुक्त स्कूल क्षेत्र: स्कूलों, आँगनवाड़ी केंद्रों, खेल के मैदानों और बच्चों पर केंद्रित स्थानों के पास जंक फूड विज्ञापनों को प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।
  • सेलिब्रिटी और इन्फ्लुएंसर एंडोर्समेंट का विनियमन: मशहूर हस्तियों और इन्फ्लुएंसर्स को भ्रामक स्वास्थ्य दावों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
  • स्पष्ट प्रकटीकरण मानदंड: विविध ब्रांडों को सरल, दृश्यमान और तुलनीय प्रारूपों में चीनी, नमक, वसा, एडिटिव्स और प्रसंस्करण की डिग्री को प्रदर्शित करना चाहिए।
  • स्थानीय खाद्य प्रणालियों को बढ़ावा देना: स्कूलों, सार्वजनिक अभियानों और सामुदायिक पोषण कार्यक्रमों के माध्यम से पारंपरिक, स्थानीय, मौसमी और न्यूनतम प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
  • पोषण साक्षरता: नागरिकों को लेबल पढ़ना, भ्रामक दावों की पहचान और वास्तविक भोजन तथा अत्यधिक प्रसंस्कृत उत्पादों के बीच अंतर समझना सिखाया जाना चाहिए।

निष्कर्ष

निष्कर्षस्वरूप जंक फूड का विज्ञापन केवल एक बाजार का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक सार्वजनिक स्वास्थ्य, उपभोक्ता संरक्षण और नैतिक शासन की चुनौती है। भारत को स्वैच्छिक प्रकटीकरण से लागू करने योग्य विनियमन की ओर बढ़ना चाहिए, ताकि हेरफेर वाले खाद्य विपणन के खिलाफ बच्चों के स्वास्थ्य तथा नागरिकों के सूचित विकल्प के अधिकार की रक्षा की जा सके।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

प्रश्न. अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों (UPFs) का प्रसार और उनके भ्रामक विज्ञापन भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य खतरा उत्पन्न करते हैं। स्वास्थ्य के अधिकार पर सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियों के आलोक में, खाद्य उद्योग द्वारा स्व-नियमन के स्थान पर एक मजबूत विनियामक ढाँचे की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

THE MOST
LEARNING PLATFORM

Learn From India's Best Faculty

      

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.