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Lokesh Pal
June 22, 2026 05:15
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टेलीविजन, सोशल मीडिया, सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट और बच्चों को लक्षित करने वाले अभियानों के माध्यम से उच्च वसा, चीनी और सोडियम (HFSS) युक्त खाद्य पदार्थों तथा अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों (Ultra-Processed Foods – UPFs) के आक्रामक विपणन (मार्केटिंग) ने एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता का रूप ले लिया है। यह सूचित विकल्प के अधिकार, विशेष रूप से बच्चों के अधिकार से समझौता करता है, जबकि भारत में मोटापे, मधुमेह, उच्च रक्तचाप तथा अन्य गैर-संचारी रोगों (NCDs) के बोझ को और गंभीर बनाता है।
निष्कर्षस्वरूप जंक फूड का विज्ञापन केवल एक बाजार का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक सार्वजनिक स्वास्थ्य, उपभोक्ता संरक्षण और नैतिक शासन की चुनौती है। भारत को स्वैच्छिक प्रकटीकरण से लागू करने योग्य विनियमन की ओर बढ़ना चाहिए, ताकि हेरफेर वाले खाद्य विपणन के खिलाफ बच्चों के स्वास्थ्य तथा नागरिकों के सूचित विकल्प के अधिकार की रक्षा की जा सके।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्नप्रश्न. अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों (UPFs) का प्रसार और उनके भ्रामक विज्ञापन भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य खतरा उत्पन्न करते हैं। स्वास्थ्य के अधिकार पर सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियों के आलोक में, खाद्य उद्योग द्वारा स्व-नियमन के स्थान पर एक मजबूत विनियामक ढाँचे की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द) |
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