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Lokesh Pal
March 05, 2026 05:30
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समुद्र के बढ़ते स्तर और वैश्विक तापमान में वृद्धि के कारण राज्यत्व (Statehood), संप्रभुता (Sovereignty) और मानवाधिकारों की पारंपरिक परिभाषाएँ चुनौती के सामने हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढाँचों को अद्यतन करने की तत्काल आवश्यकता है।
जलवायु संकट अंतरराष्ट्रीय कानून में बदलाव की मांग करता है ताकि राज्य की संप्रभुता और वैश्विक पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्नप्रश्न: जलवायु परिवर्तन केवल एक पर्यावरणीय चुनौती ही नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए कानूनी और शासन संबंधी चुनौती भी है। जीवाश्म ईंधन अधिकार, जलवायु प्रवासन और समुद्री सीमाओं के संदर्भ में चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द) |
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