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भारत के लिए 2025 की वैश्विक स्थितियाँ तथा 2026 की राजनयिक प्रतिकूलताएँ

Lokesh Pal January 30, 2026 05:30 17 0

संदर्भ:

2025 में भारतीय विदेश नीति की परिभाषित भावना ‘झटके और आश्चर्य’ (shock and surprise) वाली रही, क्योंकि सरकार को इस वर्ष के दौरान विभिन्न दिशाओं से कई अप्रत्याशित अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

ट्रम्प कारक – अमेरिकी संबंध और “अमेरिका फर्स्ट नीति” का प्रभाव:

  • डोनाल्ड ट्रम्प की वापसी: जनवरी 2025 में उन्होंने दूसरे कार्यकाल के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। यह घटना भारत के लिए वर्ष की सबसे महत्त्वपूर्ण विदेश नीति बन गई।
  • बहुपक्षीय व्यवस्था में व्यवधान: अमेरिका के ‘लिबरेशन डे’ टैरिफ ने बहुपक्षीय आर्थिक प्रणाली को प्रभावित दिया। इन उपायों ने मौजूदा विश्व व्यवस्था को अस्थिर कर दिया।
  • रणनीतिक प्राथमिकताओं में परिवर्तन: ट्रम्प ने रूस और चीन (जिन्हें पहले अमेरिका के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया गया था) के प्रति नीतियों में बदलाव किया। इससे यूरोप और इंडो-पैसिफिक में अमेरिका के सबसे करीबी गठबंधन नकारात्मक रूप से प्रभावित हुए।
  • राजनयिक आचरण: ट्रम्प ने विश्व नेताओं के साथ अपने कठोर व्यवहार के माध्यम से वैश्विक संवाद के स्तर को नीचे गिराया। साथ ही, उन्होंने नोबेल पुरस्कार जीतने के लिए आठ युद्धों को समाप्त करने का दावा करते हुए अत्यधिक प्रशंसा की माँग की।

भारत-अमेरिका संबंधों पर प्रभाव:

  • टैरिफ: रूसी तेल खरीदने के कारण अमेरिका ने भारत पर 25% टैरिफ और अतिरिक्त 25% अधिभार लगा दिया।
  • अप्रवासन और वीज़ा नीतियाँ: अप्रवासन पर अमेरिकी कार्रवाई में H-1B वीज़ा, विद्यार्थी वीज़ा और अवैध भारतीय प्रवासियों का निर्वासन शामिल था।
  • पाकिस्तान संबंधी कार्रवाइयाँ: डोनाल्ड ट्रम्प ने बार-बार दावा किया, कि उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के संघर्ष विराम में मध्यस्थता की। उन्होंने व्हाइट हाउस में पाकिस्तानी नेतृत्व की मेजबानी की और पाकिस्तान को F-16 की डिलीवरी को मंजूरी दी।
  • राजनयिक परिणाम: इन कार्रवाइयों ने पाकिस्तान से होने वाले सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत के अभियान को नुकसान पहुँचाया।
    • इससे तुर्की, अजरबैजान और मलेशिया के साथ भी संबंध तनावपूर्ण हुए, जिन्हें पाकिस्तान समर्थक माना गया।

वैश्विक परिदृश्य – दक्षिणपंथी राजनीति और तेल का विरोधाभास:

  • अति-दक्षिणपंथ का उदय: यूरोपीय संसद चुनाव, जापान और चिली सहित विश्व स्तर पर अति-दक्षिणपंथी राजनेताओं ने बढ़त बनाई। यह बढ़ती रूढ़िवादी और ज़ेनोफोबिक (विदेशी-द्वेषी) प्रवृत्ति का संकेत था।
  • तेल की कीमतों में गिरावट: ओपेक (OPEC) देशों द्वारा उत्पादन में अधिकता के कारण तेल की कीमतें गिर गईं। इससे जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा प्रयासों पर चिंता उत्पन्न हुई।
  • वैश्विक विकास परिदृश्य: वैश्विक विकास दर 2024 के 3.3% से घटकर 2025 में 3.2% और 2026 में 3.1% रहने का अनुमान है। इससे भारत के निर्यात की माँग में कमी आ सकती है।
  • रूस-यूक्रेन युद्ध: युद्ध अपने चौथे वर्ष में प्रवेश कर गया।
  • भारत पर आर्थिक प्रभाव:
    • पहली बार भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए गंभीर आर्थिक परिणामों का सामना करना पड़ा।
    • यूरोपीय संघ और यूके ने भारत-रूस संयुक्त उद्यम ‘नयारा एनर्जी’ पर प्रतिबंध लगाए। अमेरिका ने रूसी तेल दिग्गजों पर प्रतिबंध लगाए, जिससे सस्ता तेल खरीदना कठिन हो गया।

पश्चिम एशिया संकट:

  • गाजा संघर्ष: वर्ष पर्यंत गाजा पर इजराइली हमले जारी रहे, जिसमें 20,000 बच्चों सहित 70,000 से अधिक लोग मारे गए।
  • युद्धविराम से जुड़े घटनाक्रम: वर्ष के अंत में अमेरिका समर्थित युद्धविराम समझौते से कुछ आशा जगी थी।
  • आर्थिक हानि: भारत-मध्य पूर्व आर्थिक गलियारा (IMEC) की योजनाएँ ठप हो गईं।
  • राजनयिक चुनौतियाँ: जून में ईरान पर इजराइली हमलों की आलोचना करने से भारत के इनकार के कारण SCO और BRICS (जहाँ ईरान सदस्य है) में असहज स्थिति उत्पन्न हुई।

पड़ोसी संकट – “रिंग ऑफ फायर”

  • पाकिस्तान: अप्रैल 2025 में कश्मीर के पहलगाम में एक बड़े आतंकी हमले के जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ आरंभ किया। इस हमले में नागरिकों को निशाना बनाया गया था, जिसके परिणामस्वरूप व्यापक रूप से भारतीय हताहत हुए।
  • नेपाल: जेन-जी (Gen-Z) विरोध प्रदर्शनों ने सरकार को परिवर्तित कर दिया, जिससे खुली सीमा पार अस्थिरता उत्पन्न हुई।
  • बांग्लादेश: एक दक्षिणपंथी नेता की हत्या के बाद भीड़ द्वारा हिंसा भड़क उठी। यह हिंसा प्रकृति में भारत-विरोधी हो गई।
  • ‘नेबरहुड फर्स्ट’ की नीति: इन घटनाक्रमों ने भारत की नेबरहुड फर्स्ट की नीति की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए।
    • भारत को “दो-मोर्चों” वाली राजनयिक चुनौती का सामना करना पड़ा, क्योंकि पड़ोस में अस्थिरता ने आंतरिक सुरक्षा लागत को बढ़ा दिया।

भारत की रणनीतिक जीत:

  • कनाडा के साथ संबंध: 2023 से चल रहे तनाव के बाद भारत ने कनाडा के साथ संबंधों में परिवर्तन किया। यह तनाव उन आरोपों के कारण पैदा हुआ था, कि भारत ने एक खालिस्तानी अलगाववादी की हत्या की निगरानी की थी।
    • प्रधानमंत्री मोदी ने G-7 आउटरीच में शामिल होने के लिए कनाडा का दौरा किया, और नए कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ अपने मतभेदों को अलग रखने पर सहमति व्यक्त की।
  • तालिबान के साथ संबंध: भारत ने तालिबान के साथ संबंध स्थापित किया, जिसने 2021 में बलपूर्वक काबुल पर आधिपत्य स्थापित कर लिया था।
    • भारतीय विदेश सचिव और तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खाँ मुत्ताकी के बीच एक बैठक के बाद संबंधों में सुधार हुआ।
    • बिगड़ते अफगान-पाकिस्तान संबंधों और उनके संघर्ष ने भारत के पक्ष में कार्य किया, क्योंकि पाकिस्तान को “दो-मोर्चे” की समस्या से जूझना पड़ा—ऐसी स्थिति जिसका सामना आमतौर पर भारत चीन और पाकिस्तान के साथ करता है।
  • चीन के साथ संबंध: भारत ने अक्तूबर 2024 में मोदी-शी बैठक के बाद शुरू हुई संबंधों की प्रक्रिया को जारी रखा।
    • अन्य प्रयासों में कैलाश-मानसरोवर तीर्थयात्रा को पुनः खोलना, वीज़ा और वायुयान उड़ानों को बहाल करना तथा जल डेटा साझाकरण शामिल था।
  • बहुपक्षीय संबंध: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के लिए चीन के समर्थन के बावजूद, भारतीय नेता चीन में SCO की बैठकों में शामिल हुए।
  • पड़ोसी संबंध: भारत ने भूटान, श्रीलंका और मालदीव के साथ संबंधों को मजबूत किया। प्रधानमंत्री मोदी ने 2025 में इन तीनों देशों का दौरा किया।
  • मानवीय सहायता: चक्रवात दितवाह (Cyclone Ditwah) के बाद भारत ने श्रीलंका को $450 मिलियन की सहायता प्रदान की। इस चक्रवात में 600 से अधिक लोग मारे गए, तथा भारत के समर्थन की व्यापक रूप से सराहना की गई।

2026 के लिए रोडमैप:

  • व्यापार वार्ता: भारत ने यू.के., ओमान और न्यूजीलैंड के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते संपन्न किए।
  • लंबित व्यापार समझौते: अमेरिका, ईयू, ऑस्ट्रेलिया, EAEU, GCC और आसियान के साथ व्यापार समझौते लंबित हैं। हालांकि, 2026 की शुरुआत में सफलता प्राप्त होने की उम्मीद है।
  • भारत-ईयू संबंध: गणतंत्र दिवस के लिए यूरोपीय संघ आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के आने की उम्मीद है। भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते के अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।
  • क्षेत्रीय चुनाव: भारत म्याँमार, बांग्लादेश और नेपाल के चुनावों पर ध्यान रखेगा, क्योंकि प्रत्येक के भारत के लिए निहितार्थ है।
  • बहुपक्षीय जुड़ाव: भारत फरवरी महीने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के मार्च में भारत आने की उम्मीद है।
  • क्वाड (Quad) और एपेक (APEC): ध्यान इस बात पर है, कि क्या ट्रम्प क्वाड शिखर सम्मेलन के लिए भारत आएंगे। एपेक शिखर सम्मेलन के लिए उनकी संभावित चीन यात्रा पर भी आवश्यक है।
  • ब्रिक्स (BRICS) और जी-20 (G-20): व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग सहित नेताओं को ब्रिक्स तथा जी-20 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया जाएगा।
    • प्रधानमंत्री मोदी को दिसंबर में मियामी में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया जाएगा, जो अमेरिका में महत्वपूर्ण मध्यावधि चुनावों के ठीक बाद होगा।

निष्कर्ष

भू-राजनीतिक परिवर्तन के एक वर्ष बाद, भारतीय विदेश नीति निर्माता कम आश्चर्यों की उम्मीद करते हैं। भारत के राजनयिक विकल्पों का अधिक यथार्थवादी और संतुलित मूल्यांकन भी आवश्यक है।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

प्रश्न. 2025 में भारत की विदेश नीति अप्रत्याशित वैश्विक घटनाक्रमों और बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता से प्रभावित रही। 2025 के दौरान भारत के समक्ष विद्यमान प्रमुख बाह्य चुनौतियों की चर्चा कीजिए तथा उन अवसरों का आकलन कीजिए, जिन्हें 2026 में भारतीय कूटनीति का मार्गदर्शन करना चाहिए।

(10 अंक, 150 शब्द)

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