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Lokesh Pal
April 29, 2026 05:30
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यह चर्चा दिल्ली शराब नीति मामले (CBI बनाम कुलदीप सिंह एवं अन्य) पर केंद्रित है, जहाँ आरोपी, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा के रिक्यूज़ल (स्वयं को अलग करने) की मांग की। केजरीवाल ने यह तर्क देते हुए मामले को किसी अन्य पीठ को स्थानांतरित करने की याचिका दायर की कि वर्त्तमान पीठ से निष्पक्ष सुनवाई की अपेक्षा नहीं की जा सकती।
मुख्य अवधारणाएँ:
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लेखक ने दिल्ली उच्च न्यायालय की आलोचना करते हुए कहा है कि वह “रिक्यूसल परीक्षण” में विफल रहा। प्रस्तुत तर्कों के बावजूद, न्यायमूर्ति शर्मा ने एक “आत्म-रक्षात्मक निर्णय” दिया और स्वयं को मामले से अलग करने (रिक्यूसल) से इनकार कर दिया।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:प्रश्न: भारत में न्यायिक रिक्यूज़ल से संबंधित कानून अधिकतर एक नैतिक मुद्दा है, न कि तकनीकी। हाल की घटनाओं के आलोक में भारत में न्यायिक रिक्यूज़ल को नियंत्रित करने वाले सिद्धांतों पर चर्चा कीजिए। क्या आपको लगता है कि इन नियमों को संहिताबद्ध (Codify) करने की आवश्यकता है? (15 अंक, 250 शब्द) |
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