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Lokesh Pal
May 01, 2026 05:00
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वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में, भारत एक ऐसे मार्ग पर खड़ा है जहाँ विज्ञान में उसकी अपार मानवीय क्षमता प्रायः प्रणालीगत अक्षमता से संघर्ष करती है।
प्राथमिक मुद्दा एक ऐसी संस्कृति है, जो वास्तविक वैज्ञानिक खोज की बजाय दिखावे (optics) को प्राथमिकता देती है।
महत्त्वपूर्ण भविष्योन्मुखी क्षेत्रों में भारत की अनुसंधान उपस्थिति वर्तमान में नगण्य है, जिनमें शामिल हैं:
ये वैज्ञानिक इसलिए सफल हुए, क्योंकि उनके पास नौकरशाही हस्तक्षेप के बिना सीधे शासन तक पहुँच थी, तथा उन्होंने अपने अधीनस्थों को समय के साथ विचारों को विकसित करने की स्वायत्तता प्रदान की।
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