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Lokesh Pal
April 11, 2026 05:30
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भारतीय नौसेना की तीसरी अरिहंत-श्रेणी की परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN), INS अरिधमन के चालू होने के बारे में हालिया अटकलें भारत के समुद्र-आधारित परमाणु प्रतिरोध और ‘परमाणु त्रय’ क्षमता को मजबूत करने के प्रयासों को उजागर करती हैं।
तेजी से विवादित होते हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विश्वसनीय समुद्र-आधारित प्रतिरोध, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए भारत की परमाणु पनडुब्बी क्षमता को मजबूत करना महत्त्वपूर्ण है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्नप्रश्न. आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति, जो ‘क्रॉस-डोमेन स्पिलओवर’ द्वारा चिह्नित है, भारत के लिए एक मजबूत समुद्र-आधारित परमाणु प्रतिरोध को अनिवार्य बनाती है। INS अरिधमन के सेवा में शामिल होने और हिंद महासागर क्षेत्र में बदलती भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के आलोक में इस कथन का विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द) |
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