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सिविल सेवाएँ केवल फ़ाइल निस्तारण के लिए नहीं निर्मित की गई थीं — सरकार का ‘स्कोरकार्ड’ यह भूल जाता है

Lokesh Pal February 13, 2026 05:00 6 0

संदर्भ:

हाल ही में कैबिनेट सचिवालय द्वारा केंद्रीय सचिवों के लिए प्रदर्शन स्कोरकार्ड लागू करने का निर्णय भारत के शीर्ष सिविल सेवकों के मूल्यांकन के तरीके में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है। हालाँकि, आलोचकों का तर्क है कि यह भारतीय सिविल सेवाओं के मूल उद्देश्य की अनदेखी करता है।

निजी क्षेत्र के प्रबंधन मॉडल को अपनाना

  • KPI-आधारित मूल्यांकन ढाँचा: यह प्रणाली निजी कंपनियों में उपयोग होने वाले ‘की परफॉर्मेंस इंडिकेटर्स’ (KPIs) पर आधारित है।
    • अधिकारियों को “A” या “B” श्रेणियों में रखा जाता है और प्रदर्शन के आधार पर नकारात्मक अंक भी प्रदान किए जाते हैं।
  • ग्रेडेड प्रदर्शन वर्गीकरण: सचिवों का मूल्यांकन एक बैंड-आधारित स्कोरिंग प्रणाली के माध्यम से किया जाता है, जो प्रतिस्पर्धात्मक और लक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण को दर्शाता है।

केंद्रीय सचिवों के लिए प्रदर्शन मापदंड

  • फ़ाइल निस्तारण दर: फ़ाइलों को कितनी तेजी से संसाधित और अग्रेषित किया जाता है, इसके आधार पर मूल्यांकन किया जाता है।
  • लंबित मामलों में कमी: लंबित मामलों को कम करने (बैकलॉग) और देरी रोकने के लिए किए गए प्रयासों का आकलन।
  • व्यय नियंत्रण: वित्तीय अनुशासन, लागत बचत और बजटीय संयम का मूल्यांकन।
  • उत्पादक परिणाम (आउटपुट) की डिलीवरी: निर्धारित लक्ष्यों और मापनीय परिणामों की प्राप्ति के आधार पर निर्णय।

“पिज़्ज़ा डिलीवरी” ट्रैप

  • शासन में गति बनाम गुणवत्ता: शासन को “पिज़्ज़ा डिलीवरी” मॉडल तक सीमित नहीं किया जा सकता, जहाँ गति ही दक्षता का एकमात्र संकेतक हो।
    • सही होना/यथार्थता, वैधता, और दीर्घकालिक सार्वजनिक हित तात्कालिक लाभ से अधिक महत्वपूर्ण हैं।
  • भूमिका का प्रक्रियात्मक प्रबंधन तक सीमित होना: फ़ाइल क्लियरेंस पर अत्यधिक जोर देने से केंद्रीय सचिवों की भूमिका केवल प्रक्रिया प्रबंधकों तक सिमट सकती है, जबकि उनका मूल कार्य रणनीतिक नीतिगत सलाह और सूचित निर्णय-निर्माण प्रदान करना है।

स्कोरकार्ड क्या भूल जाता है: सिविल सेवकों का “वास्तविक कार्य”

  • नीति निर्माण और रणनीतिक सलाह: सचिव की प्राथमिक भूमिका मंत्रियों को दीर्घकालिक दृष्टि और रणनीतिक परामर्श देना है।
    • यह नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया से कहीं अधिक है।
  • जोखिम उठाना और परिवर्तनकारी दृष्टि: हरित क्रांति जैसी ऐतिहासिक पहलों के लिए साहसिक व्यय और सोचा-समझा जोखिम आवश्यक था।
    • व्यय नियंत्रण पर अत्यधिक बल परिवर्तनकारी नीति-निर्माण को हतोत्साहित कर सकता है।
  • आलोचनात्मक और स्पष्ट सलाह देने का कर्तव्य: सिविल सेवक संवैधानिक और नैतिक रूप से उचित सलाह देने के लिए बाध्य हैं, जिसमें अव्यावहारिक या वित्तीय रूप से अस्थिर वादों के प्रति सावधान करना भी शामिल है।
    • गति-केंद्रित प्रणाली ऐसी सतर्कता को गलत तरीके से अकार्यकुशलता के समान मान सकती है।
  • राष्ट्रीय एकीकरण और संवैधानिक भूमिका: अनुच्छेद 312 के अंतर्गत अखिल भारतीय सेवाओं की परिकल्पना राष्ट्रीय एकीकरण और प्रशासनिक एकता को सुदृढ़ करने के लिए की गई थी।
    • सरदार पटेल के “स्टील फ्रेम” के आदर्श ने निष्पक्ष और निर्भीक अधिकारियों पर बल दिया था, न कि केवल क्रियान्वयन प्रबंधकों पर।

चार प्रमुख प्रणालीगत जोखिम

  • संस्थागत स्मृति का ह्रास: शासन एक दीर्घकालिक प्रक्रिया है। स्कोर सुधारने के लिए अल्पकालिक लक्ष्यों पर अत्यधिक ध्यान देने से अब तक संचित नीतिगत ज्ञान और पिछले अनुभवों, जिसमें पूर्व योजनाओं की असफलताएँ भी शामिल हैं, का महत्व कम हो सकता है।
  • खोखली नौकरशाही: यदि अधिकारी समय-सीमा को प्राथमिकता देंगे, तो नीति-निर्माण धीरे-धीरे बाहरी सलाहकारों और थिंक टैंकों की ओर स्थानांतरित हो सकता है।
    • यह जिलों और गाँवों में वर्षों के क्षेत्रीय अनुभव के माध्यम से विकसित आंतरिक विशेषज्ञता को कमजोर करता है।
  • गुणवत्ता से अधिक गति: लंबित मामलों को कम करने के लिए प्रस्तावों को बिना पर्याप्त जाँच के स्वीकृत किया जा सकता है।
    • लोक प्रशासन में निवारक सावधानी आवश्यक है, किंतु मेट्रिक-आधारित प्रणाली इसे अकार्यकुशलता मान सकती है।
  • प्रशिक्षण और विशेषज्ञता का अवमूल्यन: सिविल सेवकों के चयन और प्रशिक्षण में UPSC के माध्यम से महत्वपूर्ण सार्वजनिक संसाधन निवेशित किए जाते हैं।
    • उन्हें केवल क्रियान्वयन प्रबंधक तक सीमित करना उनकी बौद्धिक, रणनीतिक और राष्ट्र-निर्माण संबंधी भूमिकाओं को कम करता है।

आगे की राह

  • संवैधानिक और संसदीय निगरानी को सुदृढ़ करना: जवाबदेही को नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा व्यय की जाँच, केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) द्वारा सत्यनिष्ठा की निगरानी, तथा संसदीय समितियों द्वारा नीतियों के मूल्यांकन और प्रभाव आकलन के माध्यम से मजबूत किया जा सकता है।

निष्कर्ष

केवल संख्यात्मक संकेतकों पर निर्भरता सिविल सेवकों को मैक्स वेबर द्वारा वर्णित “आयरन केज” (लोहे के पिंजरे) जैसी अत्यधिक तर्कशीलता में सीमित कर सकती है, जिससे शासन के व्यापक नैतिक और राष्ट्र-निर्माण संबंधी आयाम संकुचित हो जाते हैं।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न: केंद्रीय सचिवों के लिए प्रदर्शन स्कोरकार्ड की शुरुआत प्रबंधकीय शासन की ओर एक बदलाव को दर्शाती है। संसदीय लोकतंत्र में नीति-निर्माण और संस्थागत जवाबदेही पर इसके प्रभावों की चर्चा कीजिए।

 (10 अंक, 150 शब्द)

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